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सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय |

सुभाष चन्द्र बोस का जन्म कब हुआ था और कहाँ हुआ था?
23 जनवरी 1897 को कटक (ओडिशा) शहर में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ। उनके पिता श्री जानकीनाथ बोस और माँ श्रीमती प्रभावती थे।

सुभाष जी के पिता जी शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी वकील थे फिर उन्होंने निजी अभ्यास शुरू कर दी थी।




उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक का काम किया और वे बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे थे। उन्हें रायबहादुर का खिताब भी अंग्रेजन द्वारा मिला।

सुभाष चन्द्र के नानाजी का नाम गंगा नारायण दत्त था। दत्त परिवार को कोलकाता का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। सुभाष चन्द्र बोस को मिला कर वे 6 बेटियां और 8 बेटे यानी कुल 14 संतानें थी। सुभाष चन्द्र जी 9 स्थान पर थे।

कहा जाता है कि सुभाष चन्द्र जी को अपने भाई शरद चन्द्र से सबसे अधिक लगाव था। शरद बाबु प्रभावती जी और जानकी नाथ के दूसरे बेटे थे। शरद बाबु की पत्नी का नाम विभावती था।

Information About Subhash Chandra Bose in Hindi – Education



सुभाष चन्द्र बोस की शिक्षा और आई.सी.एस. का सफर: प्राइमरी शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल से पूरी की और 1909 में उन्होंने रावेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला लिया। उन पर उनके प्रिंसिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का बहुत प्रभाव पड़ा। वह विवेकानंद जी के साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था।

सन् 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने पर भी दूसरी श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में बी० ए० (ऑनर्स) के छात्र थे। प्रेसिडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया।

सुभाष ने छात्रों का साथ दिया जिसकी वजह से उन्हें एक साल के लिए निकाल दिया और परीक्षा नहीं देने दी। उन्होंने बंगाली रेजिमेंट में भर्ती के लिए परीक्षा दी मगर आँखों के खराब होने की वजह से उन्हें मना कर दिया गया।



स्कॉटिश चर्च में कॉलेज में उन्होंने प्रवेश किया लेकिन मन नहीं माना क्योंकि मन केवल सेना में ही जाने का था।

जब उन्हें लगा की उनके पास कुछ समय शेष बचता है तो उन्होंने टेटोरियल नामक आर्मी में परीक्षा दी और उन्हें विलियम सेनालय में प्रवेश मिला| और फिर बी०ए० (आनर्स) में खूब मेहनत की और सन् 1919 में एक बी०ए० (आनर्स) की परीक्षा प्रथम आकर पास की| और साथ में कलकत्ता विश्वविद्यालय में उनका स्थान दूसरा था।

उनकी अब उम्र इतनी हो चुकी थी की वे केवल एक ही बार प्रयास करने पर ही आईसीएस बना जा सकता था.

उनके पिता जी की ख्वाहिश थी की वह आईसीएस बने और फिर क्या था सुभाष चन्द्र जी ने पिता से एक दिन का समय लिया। केवल ये सोचने के लिए की आईसीएस की परीक्षा देंगे या नही। इस चक्कर में वे पूरी रात सोये भी नहीं थे। अगले दिन उन्होंने सोच लिया की वे परीक्षा देंगे।

वे 15 सितम्बर 1919 को इंग्लॅण्ड चले गए। किसी वजह से उन्हें किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला फिर क्या था उन्होंने अलग रास्ता निकाला।



सुभाष जी ने किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक ज्ञान की ट्राईपास (ऑनर्स) की परीक्षा के लिए दाखिला लिया इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी| और फिर ट्राईपास (ऑनर्स) की आड़ में आईसीएस की तैयारी की और 1920 में उन्होंने वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण की।

स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविन्द घोष के आदर्शों और ज्ञान ने उन्हें अपने भाई शरत चन्द्र से बात करने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने एक पत्र अपने बड़े भाई शरत चन्द्र को लिखा जिसमें उन्होंने पूछा की मैं आईसीएस बन कर अंग्रेजों की सेवा नहीं कर सकता।


फिर उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई०एस० मांटेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र दिया। एक पत्र देशबंधु चित्तरंजन दस को लिखा।

उनके इस निर्णय में उनकी माता ने उनका साथ दिया उनकी माता को उन पर गर्व था| फिर सन् 1921 में ट्राईपास (ऑनर्स) की डिग्री ले कर अपने देश वापस लौटे।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस की भूमिका
भारत की आजादी में सुभाष चन्द्र जी का योगदान



सुभाष चन्द्र बोस ने ठान ली थी की वे भारत की आजादी के लिए कार्य करेंगे। वे कोलकाता के देशबंधु चित्तरंजन दास से प्रेरित हुए और उनके साथ काम करने के लीये इंग्लैंड से उन्होंने दिबबू को पत्र लिखा और साथ में काम करने के लिए अपनी इच्छा जताई।

कहा जाता है कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की सलाह के अनुसार ही सुभाष जी मुंबई गए और महात्मा गांधी जी से मिले।

सुभाष जी, महात्मा गांधी जी से 20 जुलाई 1921 को मिले और गांधी जी के कहने पर सुभाष जी कोलकाता जाकर दास बाबू से मिले।


असहयोग आन्दोलन का समय चल रहा था। दासबाबु और सुभाष जी इस आन्दोलन को बंगाल में देख रहे थे। दासबाबु ने सन् 1922 कांग्रेस के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की।

अंग्रेज सरकार का विरोध करने के लिए कोलकाता महापालिका का चुनाव स्वराज पार्टी ने विधानसभा के अन्दर से लड़ा और जीता।

फिर क्या था…

दासबाबू कोलकाता के महापौर बन गए और इस अधिकार से उन्होंने सुभाष चन्द्र को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बना दिया।

सुभाष चन्द्र ने सबसे पहले कोलकाता के सभी रास्तों के नाम ही बदल डाले और भारतीय नाम दे दिए| उन्होंने कोलकाता का रंगरूप ही बदल डाला।

सुभाष देश के महत्वपूर्ण युवा नेता बन चुके थे। स्वतंत्र भारत के लिए जिन लोगों ने जान दी थी उनके परिवार के लोगों को महापालिका में नौकरी मिलने लगी।



सुभाष जी की पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के साथ अच्छी बनती थी। उसी कारण सुभाष जी ने जवाहर लाल जी के साथ कांग्रेस के अंतर्गत युवकों की इंडिपेंडेंस लीग शुरू की।

सन् 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया था तब कांग्रेस के लोगों ने उसे काले झंडे दिखाए और कांग्रेस ने आठ लोगों की सदस्यता आयोग बनाया ताकि साइमन कमीशन को उसका जवाब दे सके, सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया.

उस आयोग में मोतीलाल नेहरु अध्यक्ष और सुभाष जी सदस्य थे।

आयोग ने नेहरु रिपोर्ट पेश की और और कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कोलकाता में हुआ| ये बात सन् 1928 में हुआ था, सुभाष चन्द्र जी ने खाकी कपडे पहन के मोतीलाल जी को सलामी दी थी।

इस अधिवेशन में गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से पूर्ण स्वराज की जगह डोमिनियन स्टेट्स मांगे।


सुभाष और जवाहर लाल जी तो पूर्ण स्वराज की मांग कर रहे थे| लेकिन गाँधी जी उनकी बात से सहमत नहीं थे.

आखिर में फैसला ये हुआ की गांधी जी ने अंग्रेज सरकार को 2 साल का वक्त दिया जिसमे डोमिनियन स्टेट्स वापस दे दिया जाए, मगर सुभाष और जवाहर लाल जी को गांधी जी का ये निर्णय अच्छा नहीं लगा और गांधी जी से 2 साल की वजह अंग्रेजी सरकार को 1 साल का वक्त देने को कहा।

निर्णय ये हुआ की अगर 1 साल में अंग्रेज सरकार ने डोमिनियन स्टेट्स नहीं दिए तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की मांग करेगी| लेकिन अंग्रेज सरकार के कानों के नीचे जूं भी नहीं रेंगा।


अंत में आकर सन् 1930 में जब कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन जवाहर लाल नेहरु की अध्यक्षता में लाहौर में हुआ तब ऐसा तय किया गया कि 26 जनवरी का दिन स्वतंत्रता का दिन मनाया जाएगा.

कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष बड़ी मात्रा में लोगों के साथ मोर्चा निकल रहे थे। 26 जनवरी 1931 की बात है ये उनके इस कारनामे से पुलिस ने उन पर लाठियां चलाई और उन्हें घायल कर जेल में भेज दिया.

गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सभी कैदियों को जेल से सुभाष चन्द्र सहित छुड़ा लिया और अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे बहादुर क्रांतिकारी को आजाद करने से मना कर दिया।

गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेज सरकार से बात की मगर नरमी के साथ सुभाष जी कभी नहीं चाहते थे की ऐसा हो उनका कहना था की गाँधी जी इस समझौते को तोड़ दे| मगर कहा जाता है की गाँधी जी अपने दिए हुए वचन को कभी नहीं तोड़ते थे।

अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह व उनके साथ काम करने वालों को फांसी दे दी और सुभाष चन्द्र जी के दिलों दिमाग में आग लगा दी उन्हें गांधी जी
और कांग्रेस के तरीके बिलकुल पसंद नहीं आये।

Netaji Subhash Chandra Bose Wikipedia in Hindi
कितनी बार कारावास जाना पड़ा सुभाष चन्द्र बोस को?


पूरे जीवन में सुभाष चन्द्र जी को करीब 11 बार कारावास हुआ| 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ।

गोपीनाथ साहा नाम के एक क्रांतिकारी ने सन् 1925 मे कोलकाता की पुलिस में अधिकारी चार्ल्स टेगार्ट को मारना चाहा मगर गलती से अर्नेस्ट डे नाम के व्यापारी को मार दिया| जिस वजह से गोपीनाथ को फांसी दे दी गयी।

इस खबर से सुभाष चन्द्र जी फूट फूट कर रोये और गोपीनाथ का मृत शरीर मांगकर अंतिम संस्कार किया।


सुभाष चन्द्र जी के इस कार्य से अंग्रेजी सरकार ने सोचा की सुभाष चन्द्र कहीं क्रांतिकारियों से मिला हुआ तो नहीं है या फिर क्रांतिकारियों को हमारे लिए भड़काता है।

किसी बहाने अंग्रेज सरकार ने सुभाष को गिरफ्तार किया और बिना किसी सबूत के बिना किसी मुकदमे के सुभाष चन्द्र को म्यांमार के मंडल कारागार में बंदी बनाकर डाल दिया।

चित्तरंजन दास 05 नवम्बर 1925 को कोलकाता में चल बसे| ये खबर रेडियो में सुभाष जी ने सुन ली थी।

कुछ दिन में सुभाष जी की तबियत ख़राब होने लगी थी उन्हें तपेदिक हो गया था| लेकिन अंग्रेजी सरकार ने उन्हें रिहा फिर भी नही किया था.

सरकार की शर्त थी की उन्हें रिहा जभी किया जायेगा जब वे इलाज के लिए यूरोप चले जाए, मगर सुभाष चन्द्र जी ने ये शर्त भी ठुकरा दी क्योंकि सरकार ने ये नहीं बात साफ़ नहीं की थी की सुभाष चन्द्र जी कब भारत वापस आ सकेंगे।

अब अंग्रेजी सरकार दुविधा में पड़ गई थी क्योंकि सरकार ये भी नहीं चाहती थी की सुभाष चन्द्र जी कारावास में ही खत्म हो जाए। इसलिए सरकार के रिहा करने पर सुभाष जी ने अपना इलाज डलहौजी में करवाया।

सन् 1930 में सुभाष कारावास में ही थे और चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुन लिया गया था| जिस कारण उन्हें रिहा कर दिया गया।

सन् 1932 में सुभाष जी को फिर कारावास हुआ और उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया, अल्मोड़ा जेल में उनकी तबियत फिर ख़राब हो गयी, चिकित्सकों की सालाह पर वे यूरोप चले गए।

Netaji Subhash Chandra Bose Biography in Hindi Language
यूरोप में रह कर देश भक्ति: सन् 1933-1936 सुभाष जी यूरोप में ही रहे| वहां वे इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सहायता करने का वादा किया।

आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे मित्र बन गए| उन दिनों जवाहर लाल जी की पत्नी कमला नेहरु का आस्ट्रिया में निधन हो गया, सुभाष जी ने जवाहर जी को वहां जा कर हिम्मत दी। बाद में विट्ठल भाई पटेल से भी मिले।

विठ्ठल भाई पटेल के साथ सुभाष ने मत्रना की जिसे पटेल व बोस की विश्लेषण के नाम से प्रसिद्धि मिली। उस वार्तालाप में उन दोनों ने गांधी जी की घोर निंदा की, यहाँ तक की विठ्ठल भाई पटेल के बीमार होने पर सुभाष जी ने उनकी सेवा भी की मगर विठ्ठल भाई पटेल जी का निधन हो गया।

विठ्ठल भाई पटेल ने अपनी सारी संपत्ति सुभाष जी के नाम कर दी और सरदार भाई पटेल जो विठ्ठल भाई पटेल छोटे भाई थे उन्होंने इस वसीयत को मना कर दिया और मुकदमा कर दिया।

मुकदमा सरदार भाई पटेल जीत गये और सारी संपत्ति गांधी जी के हरिजन समाज को सौंप दी।

सन् 1934 में सुभाष जी के पिता जी की मृत्यु हो गयी। जब उनके पिता जी मृत्युशय्या पर थे तब वे कराची से हवाई जहाज से कोलकाता लौट आये। मगर देर हो चुकी थी.

कोलकाता आये ही थे की उन्हें अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और करावास में डाल दिया और बाद में यूरोप वापस भेज दिया।

History of Subhash Chandra Bose in Hindi
History of Subhash Chandra Bose in Hindi



क्या आपको पता है कि प्रेम विवाह हुआ था सुभाष चंद्र जी का?

आस्ट्रिया में जब वे अपना इलाज करवा रहे थे तब उन्हें अपनी पुस्तक लिखने के लिए अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की जरूरत पड़ी।

उनकी मुलाकात अपने मित्र द्वारा एक महिला से हुई जिनका नाम एमिली शेंकल था। एमिली के पिता जी पशुओं के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। ये बात सन् 1934 की थी।

एमिली और सुभाष जी एक दूसरे की और आकर्षित हुए और प्रेम करने लगे। उन्होंने हिन्दू रीति रिवाज से सन् 1942 में विवाह कर लिया और उनकी एक पुत्री हुई।

सुभाष जी ने जब वो बच्ची चार सप्ताह की थी बस तभी देखा था और फिर अगस्त सन् 1945 में ताद्वान में उनकी विमान दुर्घटना हो गयी और उनकी मृत्यु हो गयी जब उनकी पुत्री अनीता पौने तीन साल की थी।

अनीता अभी जीवित है और अपने पिता के परिवार जानो से मिलने के लिए भारत आती रहती हैं।

हरीपूरा कांग्रेस का अध्यक्ष पद – Subhash Chandra Bose Essay in Hindi
सन् 1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरिपुरा में हुआ| कांग्रेस के 51वां अधिवेशन था इसलिए उनका स्वागत 51 बैलों द्वारा खींचे गए रथ से किया गया| इस अधिवेशन में उनका भाषण बहुत ही प्रभाव शाली था.

सन् 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया| सुभाष जी ने चीनी जनता की सहायता के लिए डा० द्वारकानाथ कोटिनस के साथ चिकित्सा दल भेजने के लिए निर्णय लिया.

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जापान से सहयोग लिया| कई लोगों का कहना था की सुभाष जी जापान की कठपुतली और फासिस्ट कहते थे| मगर ये सब बातें गलती थी.

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi
गांधी जी की जिद की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा

सन् 1938 में गाँधी जी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाष को चुना था लेकिन सुभाष जी की कार्य पद्धति उन्हें पसंद नहीं आयी और द्वितीय विश्वयुद्ध के बादल छा गए थे.

सुभाष जी ने सोचा की क्यों न इंग्लॅण्ड की इस कठिनाई का फायदा उठा कर भारत का स्वतंत्रता संग्राम में तेजी लाइ जाए| परन्तु गाँधी जी इस से सहमत नहीं हुए.

सन् 1939 में जब दुबारा अध्यक्ष चुनने का वक्त आया तब सुभाष जी चाहते थे की कोई ऐसा इंसान अध्यक्ष पद पर बैठे जो किसी बात पर दबाव न बर्दाश्त करें और मानवजाति का कल्याण करें.

जब ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया तो उन्होंने दुबारा अध्यक्ष बनने का प्रताव रखा तो गाँधी जी ने मना कर दिया.

दुबारा अध्यक्ष पद के लिए पट्टाभी सीतारामैय्या को चुना, मगर कवी रविन्द्रनाथ ठाकुर ने गाँधी जी को खत लिखा और कहा की अध्यक्ष पद के लिए सुभाष जी ही सही है.

प्रफुल्लचंद्र राय और मेघ्नाद्र जैसे महान वैज्ञानिक भी सुभाष की फिर अध्यक्ष के रूप मे देखना चाहते थे मगर गाँधी जी ने किसी की भी बात नहीं सुनी और कोई समझौता नहीं किया.

जब महात्मा गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या का साथ दिया और उधर सुभाष जी ने भी चुनाव में अपना नाम दे दिया|

चुनाव में सुभाष जी को 1580 मत और पट्टाभी सीतारामैय्या को 1377 मत प्राप्त हुए और सुभाष जी जीत गए| मगर गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या हार को अपनी हार बताया और अपने कांग्रेस के साथियों से कहा की अगर वे सुभाष जी के तौर तरीके से सहमत नहीं है तो वो कांग्रेस से हट सकते है.

इसके बाद कांग्रेस में 14 में से 12 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया| जवाहर लाल नेहरु तटस्थ बने और शरदबाबु सुभाष जी के साथ रहे.

सन् 1939 का वार्षिक अधिवेशन त्रिपुरी में हुआ| इस अधिवेशन के समय सुभाष जी को तेज बुखार हो गया और वो इतने बीमार थे की उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर अधिवेशन में लाया गया.

गाँधी जी और उनके साथी इस अधिवेशन में नहीं आये और इस अधिवेशन के बाद सुभाष जी ने समझौते के लिए बहुत कोशिश की मगर गाँधी जी ने उनकी एक न सुनी.

स्थिति ऐसी थी की वे कुछ नहीं कर सकते थे| आखिर में तंग आकर 29 अप्रैल 1939 को सुभाष जी ने इस्तीफा दे दिया.

नजराबंदी से पलायन : सुभाष चंद्र बोस की जीवनी
16 जनवरी 1941 को वे पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद जियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकले.

शरद बाबू के बड़े बेटे शिशिर ने उन्हें अपनी गाडी में कोलकाता से दूर गोमोह तक पहुँचाया| गोमोह रेलवे स्टेशन से फ्रंटियर मेल पकड़कर वे पेशावर पञ्च गए.

उन्हें पेशावर में फोरवर्ड ब्लॉक के एक सहकारी, मियां अकबर शाह मिले| मियां अकबर शाह ने उनकी मुलाकात, कीर्ति किसान पार्टी के भगतराम तलवार से करा दी.

भगतराम के साथ सुभाष जी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की और निकल गए| इस सफ़र में भगतराम तलवार रहमत खान नाम के पठान और सुभाष उनके गूंगे-बहरे चाचा जी बन गए| पहाड़ियों में पैदल चल कर सफ़र पूरा किया.

सुभाष जी काबुल में उत्तमचंद मल्होत्रा एक भारतीय व्यापारी के घर दो महिने रहे| वहां उन्होंने पहले रुसी दूतावास में प्रवेश पाना चाहा| इसमें सफलता नहीं मिली तब उन्होने जर्मन और इटालियन दूतावासों में प्रवेश पाने की कोशिश की| इटालियन दूतावास में उनकी कोशिश सफल रही.

जर्मन और इतालियन के दुतावसों ने उनकी मदद की| अंत में आरलैंड मैजोन्टा नामक इटालियन व्यक्ति के साथ सुभाष काबुल से निकल कर रूस की राजधानी मास्को होते हुए जर्मनी राजधानी बर्लिन पहुचे.

हिटलर से मुलाकात – Story About Netaji Subhash Chandra Bose and Hitler
सुभाष बर्लिन में कई नेताओं के साथ मिले उन्होंने जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता संघठन और आजाद हिन्द रेडियो की स्थापना की|

इसी दौरान सुभाष नेताजी के नाम से भी मशहूर हो गए| जर्मन के एक मंत्री एडम फॉन सुभाष जी के अच्छे मित्र बन गए.

29 मई 1942 के दिन, सुभाष जर्मनी के सर्वोच्च नेता एडोल्फ हिटलर से मिले| लेकिन हिटलर को भारत के विषय में विशेष रूचि नहीं थी| उन्होने सुभाष की मदद को कोई पक्का वादा नहीं किया.

हिटलर ने कई साल पहले माईन काम्फ़ नामक आत्मचित्र लिखा था.

इस किताब मैं उन्होंने भारत और भारतीय लोगों की बुराई की थी| इस विषय पर सुभाष ने हिटलर से अपनी नाराजगी दिखाई, हिटलर ने फिर माफ़ी मांगी और माईन काम्फ़ के अगले संस्करण में वह परिच्छेद निकालने का वादा किया.

अंत में सुभाष को पता लगा की हिटलर और जर्मनी से किये वादे झुटे निकले इसलिए 8 मार्च 1943 को जर्मनी के कील बंदरगाह में वे अपने साथी आबिद हसन सफरानी के साथ एक जर्मन पनडुब्बी में बैठकर पर्वी एशिया की और निकल दिए.

वह जर्मनी पनडुब्बी उन्हें हिन्द महासागर में मैडागास्कर के किनारे तक लेकर गयी| फिर वहां दोनों ने समुद्र में तैरकर जापानी पनडुब्बी तक पहुचे.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान किन्ही भी दो देशों की नौसेनाओं की पनडुब्बियों के द्वारा नागरिकों की यह एक मात्र अदला-बदली हुई थी, वो जापनी पनडुब्बी उन्हें इंडोनेशिया के पादांग बंदरगाह तक पहुचाकर आई.

सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु कैसे हुई?
सुभाष चन्द्र जी की मृत्यु का कारण क्या था

जापान द्वितीय विश्वयुद्ध में हार गया, सुभाष जी को नया रास्ता निकलना जरुरी था। उन्होंने रूस से मदद मांगने की सोच रखी और 18 अगस्त 1945 को नेताजी हवाई जहाज से मचुरिया की तरफ जा रहे थे| इस सफ़र के दौरान वे लापता हो गए| इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए.

23 अगस्त 1945 को रेडियो ने बताया कि सैगोन में नेताजी एक बड़े बमवर्षक वीमान से आ रहे थे की 18 अगस्त को जापान के ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटीत हो गए.

विमान में उनके साथ सवार जापानी जनरल शोदाई पाईलेट और कुछ अन्य लोग मारे गए| नेताजी गंभीर रूप से जल गए थे.

वहां जापान में अस्पताल में ले जाया गया और जहाँ उन्हें मृत घोषीत कर दिया गया और उनका अंतिम संस्कार भी वही कर दिया गया.

सितम्बर में उनकी अस्थियों को इकठ्ठा करके जापान की राजधानी टोकियो के रैकाजी मंदिर में रख दी गयी| भारतीय लेखागार ने सुभाष जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में रात्रि 09:00 बजे हुई थी.

आजदी के बाद भारत सरकार ने इस घटना की जांच करने के लिए सन् 1956 और 1977 में दो बार जांच आयोग नियुक्त किया गया पर दोनों बार ये साबित हुआ की दुर्घटना में ही सुभाष जी की मृत्यु हुई थी.

सन् 1999 में मनोज कुमार मुखर्जी के नेतृत्व में तीसरा आयोग बनाया गया| 2005 में ताइवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बता दिया की ताइवान की भूमि पर उस दिन कोई जहाज दुर्घटना हुई ही नहीं थी| मुखर्जी आयोग रिपोर्ट पेश की जिसमे सुभाष जी की मृत्यु का कोई साबुत पाया नहीं गया.

लेकिन भारत के सरकार ने मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया.

आज तक ये रहस्य ही बना हुआ है की आखिर सुभाष जी की मृत्यु कैसे हुई थी (Subhash Chandra Bose Death) और अभी 2018 से करीब एक दो साल पहले न्यूज रिपोर्ट द्वारा ये बात सामने आई थी की सुभाष जी कुछ साल बाद भी जिन्दा थे और वेश बदल कर जी रहे थे.

फैजाबाद के गुमनामी बाबा से लेकर छतिसगढ राज्य में जिला रायगढ तक में नेताजी के होने को लेकर कई दावे किये गए लेकिन कोई साबुत सामने नहीं आया.

Subhash Chandra Bose Poem in Hindi
सुभाष चंद्र बोस पर कविता

है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं
अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं

यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है
जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जयहिन्द निशानी है
प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था
पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था

यह वीर चक्रवर्ती होगा , या त्यागी होगा सन्यासी
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग-युग तक भारतवासी
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था

बाँधे जाते इंसान,कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं
काया ज़रूर बाँधी जाती,बाँधे न इरादे जाते हैं
वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था,जो मौका पाकर निकल गया
वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया

जिस तरह धूर्त दुर्योधन से,बचकर यदुनन्दन आए थे
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के,पहरेदार छकाए थे
बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा , तोते-सा बेदाग़ गया।
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया

वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है
हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है

साभार - कविताकोश
Netaji Subhash Chandra Bose Motivational Thoughts in Hindi
प्रिय देशवासियों सुभाष चन्द्र बोस के बारे में पूरी दुनिया अच्छे से जानते है और उनके द्वारा बोली गयी कुछ लाइंस नीचे लिखी गयी है। आपको सुभाष चन्द्र बोस की जानकारी भी इस लेख में मिल जाएगी।

स्वतंत्रता की लड़ाई में सुभाष चन्द्र जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है और उनकी सोच जिसने उन्हे सबसे अलग बनाया है। भारत की आजादी में सुभाष चंद्र बोस ने अपने साईंकोन को बहुत प्रेरित किया और उनके दिशा निर्देश पर लोगों ने अपने कदम रखे।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi: ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा !’ यह कहना था भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी “नेताजी सुभाष चन्द्र बोस” का।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की और देश में राज्य कर रहे अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, जिसने भारत को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा दिया गया “जय हिन्द जय भारत का नारा” भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi
“एक सच्चे सैनिक को सैन्य प्रशिक्षण और आध्यात्मिक प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है।”

“राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों ; सत्यम् , शिवम्, सुन्दरम् से प्रेरित है।”

“मेरे पास एक लक्ष्य है जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना हैं। मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ! मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है।”

“अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है।”

“अपने पूरे जीवन में मैंने कभी खुशामद नहीं की है। दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनमोल वचन
“जीवन की अनिश्चितता से मैं जरा भी नहीं घबराता।”

“आज हमारे पास एक इच्छा होनी चाहिए ‘मरने की इच्छा’, क्योंकि मेरा देश जी सके – एक शहीद की मौत का सामना करने की शक्ति, क्योंकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीद के खून से प्रशस्त हो सके।”

“जब आज़ाद हिंद फौज खड़ी होती हैं तो वो ग्रेनाइट की दीवार की तरह होती हैं ; जब आज़ाद हिंद फौज मार्च करती है तो स्टीमर की तरह होती हैं।”

“भविष्य अब भी मेरे हाथ में है।”

“राजनीतिक सौदेबाजी का एक रहस्य यह भी है जो आप वास्तव में हैं उससे अधिक मजबूत दिखते हैं।”

Netaji Subhash Chandra Bose Speech in Hindi
“अजेय (कभी न मरने वाले) हैं वो सैनिक जो हमेशा अपने राष्ट्र के प्रति वफादार रहते हैं, जो हमेशा अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं।” – सुभाष चंद्र बोस के विचार

“मैंने अपने अनुभवों से सीखा है ; जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती।” – सुभाष चंद्र बोस के नारे

“इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।” – Subhash Chandra Bose Slogan in Hindi

“एक व्यक्ति एक विचार के लिए मर सकता है, लेकिन वह विचार उसकी मृत्यु के बाद, एक हजार जीवन में खुद को अवतार लेगा।”

“यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का भुगतान अपने रक्त से करें। आपके बलिदान और परिश्रम के माध्यम से हम जो स्वतंत्रता जीतेंगे, हम अपनी शक्ति के साथ संरक्षित करने में सक्षम होंगे।”

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi in 500 Words
“अच्छे चरित्र निर्माण करना ही छात्रों का मुख्य कर्तव्य होना चाहियें।”

“मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है।”

“माँ का प्यार स्वार्थ रहित और होता सबसे गहरा होता है ! इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।”

“हमारा कार्य केवल कर्म करना हैं ! कर्म ही हमारा कर्तव्य है ! फल देने वाला स्वामी ऊपर वाला है।”

“संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले मुझमे नहीं था।”

“जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।”

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दसवीं क्लास के बाद क्या करें

2020 में दसवीं क्लास के बाद करियर ऑप्शंस
दसवीं क्लास के बाद क्या करें, दसवीं के बाद करियर विकल्प, 10th class ke bad kya kare
‘दसवीं क्लास की परीक्षा के बाद क्या करें, किस स्ट्रीम का चुनाव करें, क्या मुझे किसी प्रोफेशनल कोर्स का चयन करना चाहिए या फिर ट्रेडिशनल विकल्पों की तरफ ही अपने आप को केन्द्रित करना चाहिए आदि कुछ ऐसे सवाल हैं जो लगभग हर दसवीं पास या दसवीं की पढ़ाई कर रहे छात्रों के दिमाग में उठते हैं और इससे वे बेवजह परेशान रहते हैं. वस्तुतः इन प्रश्नों के उत्तर का सीधा सीधा सम्बन्ध भविष्य में उनके अध्ययन तथा प्रोफेशन से होता है. इनका मुख्य फोकस इन्हीं दो बातों पर होता है. इस लिए इस दौरान ऐसे प्रश्नों के विषय में सोंचकर परेशान होना स्वाभाविक है.



यह जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय क्यों है ?
दसवीं के बाद कुछ भी करने का निर्णय छात्रोंन के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है. इस समय वे एक ऐसी राह पर खड़े होते हैं जहाँ आपको एक निर्णय लेना है जो आपके जीवन को सुखी और समृद्ध बना सके. यदि आप करियर से जुड़े इस निर्णय को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तथा कहीं न कहीं आपके मन में किसी तरह का संदेह हो,तो इस सम्बन्ध में निर्णय लेना काफी मुश्किल हो जाता है.साथ ही इस दौरान अगर आपने कोई गलत निर्णय ले लिया तो उसका परिणाम आपको जीवन भर भुगतना पड़ेगा.

आगे कुछ ऐसे सुझाव प्रस्तुत किये गए हैं जिसकी मदद से आप भविष्य में एक सही निर्णय ले सकते हैं.    

सही डिसीजन (निर्णय) लेने की क्षमता का विकास - किसी भी काम की सफलता के पीछे मुख्यतः सही समय पर लिए गए सही निर्णय की ही अहम भूमिका होती है. इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने सीनियर्स, टीचर्स या माता-पिता तथा अभिभावकों की राय अवश्य लेनी चाहिए.इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि यह बात सही है कि इस निर्णय का प्रभाव दूरगामी होता है लेकिन यह आपके जीवन का आखिरी निर्णय नहीं होता है. वस्तुतः निर्णय लेने की क्षमता जैसी क्वालिटी की डिमांड जॉब मार्केट में बहुत ज्यादा होती है. आप चाहे किसी भी क्षेत्र में जाएं हर जगह आपके इस क्वालिटी की परख की जाती है और इसी पर आपका करियर कुछ हद तक डिपेंड करता है. इसलिए दसवीं के बाद आप सही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं जिससे आपके तार्किक क्षमता का विकास होता है और इसी दौरान आप जीवन से जुड़े पहलुओं पर गौर करना सीखते हैं.

इससे आपको अपने अनुसार चयन करने की स्वतन्त्रता मिलती है - अभी तक आपसे जुड़े हर चीज का निर्णय आपके माता पिता या अभिभावकों द्वारा लिया जाता है लेकिन दसवीं के बाद आप अपने करियर से जुड़े ऑप्शंस को चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं. इसलिए दसवीं के बाद मुझे क्या करना है ? इस महत्वपूर्ण निर्णय को अब आपको ही लेना होता है. हो सकता है कि बहुत सारे करियर विकल्पों की उपस्थिति में आप थोड़ा बहुत कन्फ्यूज हो जाएं लेकिन अत्यधिक सूक्ष्म परीक्षण और डिस्कशन के बाद आप सशक्तता पूर्वक अपने लिए फायदेमंद और तार्किक रूप से संगत करियर विकल्प का चयन अपने लिए कर सकते हैं.

आप को किन किन स्ट्रीम्स का चयन करना चाहिए ?-
दसवीं के बाद सबसे कठिन निर्णय होता है स्ट्रीम का चुनाव करना. सही स्ट्रीम का चुनाव करना बहुत जरुरी है.कारण कि भविष्य के सभी निर्णय मुख्यतः आपके इसी निर्णय पर अवलंबित होते हैं.

किस विषय का चुनाव स्टूडेंट्स को करना चाहिए ?- कभी कभी स्टूडेंट्स अपने जीवन हर्ड मेंटालिटी ( झुण्ड मानसिकता) के दबाव में आकर उस स्ट्रीम का चुनाव कर लेते हैं जो उनकी रुची तथा क्षमता के बिलकुल विपरीत होते हैं लेकिन चूँकि उनके मित्र या जानकार भी इसे ही चुने हैं,इसलिए वे भी ऐसा करते हैं.लेकिन यह एक गलत प्रैक्टिस है और इसके परिणाम आपके लिए भयावह हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अपनी रुचि,योग्यता और क्षमता के अनुरूप ही किसी स्ट्रीम का चयन करें ताकि आप बेहतर रीजल्ट पा सकें. इसलिए सही स्ट्रीम के चयन में आपकी मदद हेतु दसवीं के बाद उपलब्ध कुछ महत्वपूर्ण स्ट्रीम्स का वर्णन आगे कर रहे हैं --

साइंस

सामान्यतः सबका पसंदीदा विषय – विज्ञानं अधिकांश स्टूडेंट्स का पसंदीदा विषय होता है और लगभग हर माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा विज्ञान विषय से ही पढ़ाई करे. यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे कई आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करती है और विभिन्न डोमेनों में शोध करने का अवसर भी प्रदान करती है. दसवीं के बाद विज्ञान विषय चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लेने के बाद आगे चलकर वे आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन ले सकते हैं. इसके विपरीत अगर आपने 12 वीं तथा ग्रेजुएशन आर्ट्स या कॉमर्स से की है तो आप भविष्य में साइंस नहीं ले सकते हैं जबकि साइंस स्ट्रीम वाले पुनः किसी भी स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं.

जहां तक ​​ कक्षा 11 वीं और 12 वीं का सवाल है,तो आपको कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे आधारभूत विषयों का चयन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स द्वारा चुने गए इंस्ट्रक्शन के भाषा के आधार पर उन्हें एक अनिवार्य भाषा का भी चुनाव करना होगा. साथ ही क्लास में थियरी की पढ़ाई के अतिरिक्त लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल भी करना होगा.

यदि आप इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पीसीएम या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित को मूल विषयों के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन आगर आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं तो  आप पीसीएमबी या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित + जीवविज्ञान ले सकते हैं.

कॉमर्स

बिजनेस के लिए सर्वश्रेष्ठ - साइंस के बाद स्टूडेंट्स द्वारा सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीम है कॉमर्स. यदि स्टैटिक्स, फायनांस या इकोनॉमिक्स के फील्ड में जाना चाहते हैं तो आपको इस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा. अगर करियर की बात की जाय तो कॉमर्स स्ट्रीम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी, एकाउंटेंट्स, निवेश बैंकिंग और वित्तीय सलाहकार जैसे कुछ सबसे अधिक आकर्षक और उच्च भुगतान वाली नौकरियों में जाया जा सकता है हालांकि, इसकेलिए कक्षा 12 के बाद इन संबंधित डोमेन में प्रोफेशनल कोर्सेज का चयन करना होगा.

कॉमर्स स्टूडेंट्स के रूप में आपको बिजनेस इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और बिजनेस लॉ आदि मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स को कॉमर्स स्ट्रीम के एक हिस्से के रूप में अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, इनकम टैक्स, मार्केटिंग और जेनरल बिजनेस इकोनोमिक्स में आधारभूत प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. साइंस के स्टूडेंट्स की तरह ही इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा का चयन करना होता है.

आर्ट्स/कला / मानविकी

अवसर गैलरी - आर्ट्स आज भी स्टूडेंट्स का बीच बहुत काम पसंद किया जाने वाला विषय है जबकि इस क्षेत्र में अवसरों की भरमार है. लेकिन आजकल इस विषय को लेकर लोगों की धारणा बदली है तथा अधिकतर स्टूडेंट्स आर्ट्स विषय लेना पसंद कर रहे हैं. यह कुछ रोचक ऑफ-बीट और रोमांचक कैरियर के अवसर प्रदान कर रही है. पहले आर्ट्स विषय को उन्हीं स्टूडेंट्स के लिए सही माना जाता था जो आगे चलकर शोध में दिलचस्पी रखते थें लेकिन अब यह धारणा बिलकुल बदल चुकी है. आजकल आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास अन्य स्ट्रीम की भांति ही आकर्षक और संतोषजनक करियर विकल्प मौजूद हैं. एक आर्ट्स का स्टूडेंट जर्नलिज्म, लिटरेचर, सोशल वर्क, एजुकेशन और कई अन्य करियर विकल्पों का चयन कर सकता है.

जहां तक ​​विषयों का संबंध है, तो आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास विभिन्न प्रकार के विषयों के चयन का विकल्प होता है  जिनमें से समाजशास्त्र, इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र इत्यादि विषय शामिल हैं. इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा विकल्प का चयन करना पड़ता है.

इसके अतरिक्त कुछ अन्य बातें -पिछले दशक में  भारत के शिक्षा क्षेत्र में बहुत विविधता देखने को मिली है, इसकी वजह से दसवी के बाद कई सुनहरे करियर विकल्प मौजूद हैं. कई ऐसे कई शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और यहां तक ​​कि कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी हैं जिन्हें आप अपनी दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद चुन सकते हैं. एक दसवीं के छात्र होने के नाते यह हो सकता है कि आपको भविष्य में मिलने वाले सभी अवसरों तथा उसके अंतर्गत आने वाली चुनौतियों का सही ज्ञान न हो, तो ऐसी परिस्थिति में किसी काउंसेलर की मदद लें.

निर्णय लेने के दौरान किन किन बातों पर गौर करना चाहिए?-
अब आपको प्रत्येक विषय तथा स्ट्रीम्स की जानकारी हो चुकी है तो अब आपके लिए कौन सा स्ट्रीम तथा विषय आपके लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है यह निर्णय लेने का समय होता है. लेकिन अभी भी यदि आप निर्णय लेने में अपने आप को समर्थ नहीं पा रहे हैं तो आप को घबड़ाने की जरुरत नहीं है. कभी भी जीवन से सम्बंधित ऐसे निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए. इस प्रक्रिया को आपके लिए थोड़ा और सरल बनाने के उद्देश्य से यहाँ कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं जिनका पालन आपको करना चाहिए-

अपनी रुचियों और जुनून का आकलन करें

अक्सर हम देखते हैं कि बहुत सारे प्रोफेशनल्स अनचाहे मन से काम करते हैं तथा अपने काम में दैनिक रूप से पीसते हुए नजर आते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि आप ऐसा बिलकुल नहीं चाहेंगे. जीवन में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हमेशा अपनी रुचियों और जुनूनों  को ध्यान में रखना चाहिए.

और इस प्रक्रिया में आपका पहला कदम यह पहचाने का होना चाहिए कि कौन सा विषय या करियर विकल्प आपको उत्साहित करता है. आप जीवन भर उसके लिए कुछ कर सकते हैं और कभी भी इससे नाखुश और असंतुष्ट नहीं हो सकते,केवल तभी आप वास्तव में इसका आनंद उठा सकते हैं.इसलिए, चाहे आप कोई भी स्ट्रीम चुनते हों,  सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप इसके अंतर्गत कवर किए गए विषयों में दिलचस्पी रखते हैं या नहीं.

अपनी शक्तियों और कमजोरियों का विश्लेषण करें

अपनी रुचियों का आकलन करने के बाद,आपके लिए दूसरा कदम अपने स्किल्स और क्षमताओं का आकलन करना है. यदि आप केवल अपनी रुचि के आधार पर एक एक स्ट्रीम चुनते हैं लेकिन इसमें शामिल विषयों को समझने का सही स्किल  और क्षमता आपमें नहीं है, तो भविष्य में यह आपके लिए एक बड़ी समस्या पैदा करेगा. उदाहरण के लिए, आपकी रूचि प्राइमरी साइंस में हो सकती है लेकिन 12 वीं के स्तर पर पढ़ाए जाने वाले साइंस  विषय अधिक विस्तृत और कठिन लग सकते हैं. मानलीजिये आपका मौलिक अंकगणित बहुत अच्छा है लेकिन हो सकता है कि 12 वीं के पीसीएम में पढ़ाया जाने वाला मैथ आपको बहुत कठिन लगे. तो आप उन विषयों में बेहतर रीजल्ट नहीं दे पाएंगे. इसलिए हमेशा अपने स्किल्स और क्षमताओं का पूर्ण विश्लेषण करना चाहिए, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी स्ट्रीम का चयन करना चाहिए.

सही करियर विकल्प की पहचान करें

एक बार जब आप उन चीज़ों की पहचान करना शुरू करते हैं जिनके बारे में आप रुचि रखते हैं, तो बहुत सारे और विविध विकल्प आपके सामने होते हैं, जिनमें से सबका चयन करना सही निर्णय नहीं हो सकता है. उदाहरण के लिए मानलीजिये कि आपको पतंग उड़ाना बहुत पसंद है, लेकिन एक करियर विकल्प के रूप में इसका चयन करना शायद एक सही निर्णय नहीं हो सकता है.

इसलिए, आपको यह पहचानने की आवश्यकता है कि आपके कौन से इन्ट्रेस्ट क्षेत्र आपको अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिसमें आप एक स्थायी करियर बना सकते हैं. इसके लिए आप प्रोफेशनल करियर काउंसेलर की मदद ले सकते हैं. वे आपको अपने कौशल का विश्लेषण करने में मदद कर सकते हैं और सही करियर विकल्प चुनने में आपकी सहायता कर सकते हैं.

दूसरों की मदद लें

ऊपर के पहले तीन चरणों के बाद भी, यदि आपको अभी भी लगता है कि आप स्ट्रीम के चयन को लेकर भ्रमित और अनिश्चित हैं, तो आपको कक्षा 10 के बाद अपने माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर से सलाह लेनी चाहिए. आजकल मार्केट में कई अन्य करियर विकल्प और अवसर मौजूद हैं जो कक्षा 10 के बाद आपकी  प्रतीक्षा कर रहे हैं जिनका आप चयन कर सकते हैं. माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर आपको हमेशा सही सलाह देंगे तथा सही स्ट्रीम के चयन में आपकी भरपूर मदद करेंगे.

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया में DAF कितना महत्वपूर्ण है
UPSC IAS k interview me puche jane wale sawal v unke jawab 

अगर आप UPSC सिविल सेवा की तैयारी कर रहें हैं तो निश्चित है की आपने DAF के बारे में ज़रूर सुना होगा। UPSC सिविल सेवा परीक्षा के prelims qualified candidates को मेंस परीक्षा से पहले एक Detailed application Form यानी DAF भरना होता है। ये एक बहुत ही important document है जो कैंडिडेट के करियर से ले कर पोस्टिंग तक, सब कुछ डिफाइन करता है। DAF को 8 भागो में बांटा गया है और हर एक भाग को भरना कंपल्सरी होता है।

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया


इंटरव्यू बोर्ड में DAF ही आपकी पहचान है
UPSC इंटरव्यू बोर्ड आपको आपके DAF के through ही पहचानता है इसीलिए जितने सटीक तरीके से आप अपना DAF fill करेंगे उतना ही interview आपके favour में होगा। जो भी इनफार्मेशन आप DAF में भरे वह सच और सही होनी ज़रूरी है। आपके DAF की कॉपी बोर्ड रूम में बैठे हर एक पैनेलिस्ट् के पास होगी। इंटरव्यू की शुरुआत generally पर्सनल questions से की जाती है जिसमे आपका इंट्रोडक्शन, आपका family background, hobbies इत्यादी के बारे में आपसे पूछा जाएगा। इसलिए ये ज़रूरी है की आप इन प्रश्नों पर घबराये नहीं और इमानदारी से जवाब दे। ये इंटरव्यू आपकी नॉलेज टेस्ट करने के लिए नहीं बल्कि आपकी alertness और Presence of mind के साथ साथ प्रेशर situations में आपकी decision-making capability को जानने के लिए लिया जाता है।

अक्सर कैंडिडेट्स अपनी इंटरव्यू ड्रेस, अपना चलने का तरीका, अपनी इंग्लिश लैंग्वेज पर कमांड को ले कर चिंता में रहते है। जबकि इंटरव्यू में इन सब चीजों के मायने काफी कम है। आपकी इंटरव्यू ड्रेस presentable होनी चाहिए और बोलने के तरीके में शालीनता और कॉन्फिडेंस होना ज़रूरी है।



इंट्रोडक्शन से होती है इंटरव्यू की शुरुआत
इंटरव्यू के शुरुआत की बात करे तो panelists कैंडिडेट को relax करने के लिए सबसे पहला सवाल उनके introduction से रिलेटेड ही करते है। अगर panelists “Tell us about yourself” या “introduce yourself” कहते है तो आप अपने इंट्रोडक्शन में आपका नाम, place of birth (यानि जन्म का स्थान), आपकी academic क्वालिफिकेशन, institutes के नाम और वर्क प्रोफाइल के बारे में बताएं। कुछ कैंडिडेट्स अपने interests और hobbies के बारे में भी इंट्रोडक्शन देते है हालाकि ये ऑप्शनल है। interview में आपसे आपके नाम का मतलब भी पूछा जा सकता है। आपके पर्सनल इंट्रोडक्शन से पैनल आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस को चेक करता है वही साथ साथ आपकी अपने बारे में दी गयी जानकारी को भी verify करता है।

अपने आप को introduce करने में घबराए नहीं और हर सवाल को अपने बारे में बताने का एक अवसर समझे। वहाँ मोजूद बोर्ड मेम्बर्स आपको आपके answers से नहीं बल्कि आपके आंसर देने की रीजनिंग और आपके beliefs के बेसिस पर judge  करते हैं।

DAF में दी पर्सनल इनफार्मेशन से पूछा जा सकता है सवाल
इसके अलावा आपके होम टाउन (यानि जन्म स्थान), होम स्टेट से रिलेटेड कोई भी प्रश्न पूछा जा सकता है। इसलिए इन टॉपिक्स को जियोग्राफी, हिस्ट्री, कल्चर और करंट इवेंट्स के बेसिस पर अच्छे से तैयार करे। होम स्टेट के साथ साथ neighbouring states के बारे में भी अच्छे से पढ़े। अगर आप एक से ज्यादा स्टेट्स में रहे है तो सभी स्टेट्स के बारे में जानकारी होना ज़रूरी है। इन  प्रश्नों से panelists ना सिर्फ आपकी awareness को चेक करते है बल्कि आपकी देश और उसके प्रति जागरूकता का भी टेस्ट लेते है।

स्टेट इश्यूज से रिलेटेड अगर आपसे कोई सवाल पूछा जाये तो आपकी कोशिश यही होनी चाहिए की आप एक भारतीय नागरिक के रूप में balanced और impartial जवाब दे।

जैसे की अगर आप हरियाणा से belong करते है तो सतलज वाटर डिस्प्यूट जैसे सवाल पर आप ना सिर्फ हरियाणा की समस्याओ बल्कि पंजाब के point of view से भी इस टॉपिक को discuss करें। panelists आपसे एक न्यूट्रल जवाब की अपेक्षा रखते है इसीलिए आपको ये बात हर सवाल का उत्तर देते समय हमेशा ध्यान रखनी चाहिए। एक सिविल सर्वेंट को प्रदेश हित से हट कर राष्ट्र हित के बारे में सोच कर ही निर्णय लेना होता है इसीलिए panelists ऐसे सवाल करते है जो आपकी सामाजिक सोच को जानने में उनकी मदद करे।

 DAF में आपसे आपके माता पिता के बारे में भी पूछा जाता है। उनका जन्म स्थान, उनका profession इत्यादि। उदहारण के लिए यदि आपके माता या पिता बैंक में कार्यरत है तो पनेलिस्ट्स आपसे bank रिलेटेड questions भी पूछ सकते है। इससे वह आपकी अपने आस पास और आपसे जुड़े लोगो में रूचि और जिज्ञासा को जाचते है। इसीलिए आपको अपने पेरेंट्स के profession के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

DAF में अपनी hobbies की दें सही जानकारी
DAF में आपकी पर्सनल इनफार्मेशन के साथ साथ आपकी hobbies, extra-curricular एक्टिविटीज और स्पोर्ट्स पार्टिसिपेशन के लिए भी एक कॉलम दिया जाता है। इस कॉलम को भरते टाइम आपको ये ध्यान में रखना चाहिए की आप जो भी इनफार्मेशन यहाँ मेंशन करेगे उससे रिलेटेड सवाल पैनल मेम्बेर्स आपसे पूछ सकते है। उदहारण के लिए अगर आपने अपनी hobbies में रीडिंग मेंशन किया है तो यह एक vague (यानि अस्पष्ट) hobby है। रीडिंग में आपको ये मेंशन करना ज़रूरी है की आप क्या पढना पसंद करते है - नोवेल्स, फिक्शन, नॉन-फिक्शन. इसी के आधार पर panelist आपसे सवाल करते है। अगर आप फिक्शन मेंशन करते है तो हो सकता है वह आपसे आपकी कोई favourite फिक्शन या ऑथर का नाम पूछे। या उस ऑथर की अन्य बुक्स के बारे में या ऑथर की लाइफ से जुड़ा कोई प्रसिद्ध वाक्य भी पूछ सकते हैं।



DAF में दे सही और सटीक जानकारी
इसी तरह अगर आप कोई भी स्पोर्ट्स मेंशन करते हैं तो आपसे उस स्पोर्ट्स के रूल्स, उससे जुड़ी प्रसिद्ध हस्तियाँ और खेल से संभंधित प्रतियोगिताओ के बारे में भी पूछा जा सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है की आप जो कुछ भी DAF में मेंशन करे उसे अच्छे से prepare ज़रूर करे। पैनल में मोजूद सभी मेम्बेर्स सुशिक्षित और अनुभवी होते है इसलिए हर प्रश्न का जवाब स्पष्ट तरीके से दे और ब्लफ करने की कोशिश न करे। अगर आपको किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं आता है तो आप इसे इमानदारी से पैनेलिस्ट को बता सकते है। आपके सही होने से ज्यादा आपका ईमानदार होना matter करता है।

IAS इंटरव्यू में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उद्देश्य एडमिनिस्ट्रेशन के लिए कैंडिडेट की उपयुक्तता यानि (suitability) चेक करना है। इस पर्सनल इंटरव्यू का motive आपसे सही जवाब लेना नहीं बल्कि प्रेशर सिचुएशन में आपकी मेंटल alertness और प्रजेंस ऑफ़ माइंड को चेक करना है। इसीलिए ये ज़रूरी है की आप हर सवाल का जवाब संयम और आत्मविश्वास से दे। question पूछे जाने के बाद कुछ सेकंड अपने जवाब को सोचे. ये आपको calm रह कर आपके थॉट्स recollect करने में मदद करेगा। किसी भी जवाब में carried away ना हो और अपना मेंटल बैलेंस बना कर रखे। 

इन 3 कामों को करने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए

इन 3 कामों को करने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए, नहीं तो आपके साथ हो सकता ऐसा

हिंदू धर्म में हर इंसान को स्नान रोज जरूर करना चाहिए, कहते है ऐसा करना शरीर स्वाथ और पवित्र रहता है, लेकिन कई लोग स्नान करना जरूरी नहीं समझते हैं। लेकिन जीवन में एक बात याद रखना कि ये 3 काम करने के बाद स्नान करना बेहद जरूरी हो जाता है। आज मैं आपको उन्हीं तीन कामों के बारे में बताने वाली हूँ।


1) श्मशान घाट से आने के बाद



वैज्ञानिक कारण के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके शरीर में कई प्रकार के बैक्टीरिया पनप जाते हैं। जो जीवित व्यक्ति के शरीर में फैल सकते हैं। और कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इस वजह से अंतिम संस्कार के बाद नहाना जरूरी हो जाता है।


2) मालिश करवाने के बाद



दोस्तों शरीर का मालिश करवाना एक अच्छी बात है। लेकिन शरीर में मालिश करवाने के बाद शरीर अपवित्र हो जाता है। इसलिए मालिश करवाने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए।


3) सफर से लौटकर आने के बाद



कुछ दिनों के सफर से घर लौट कर आने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए। क्योंकि बाहर की गंदगी और धूल मिट्टी घर के अन्दर आ जाती हैं। और इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। इसलिए सफर से लौट कर आने के बाद आसमान जरूर करना चाहिए।

सुभाष चन्द्र बोस के प्रेरणादायक विचार

23 January - Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti
सुभाष चन्द्र बोस के प्रेरणादायक विचार : Read Best Collection Of Subhash Chandra Bose Quotes, Netaji Subhash Chandra Bose Motivational Thoughts And Great Subhash Chandra Bose Desh Bhakti Shayari in Hindi.

Subhash Chandra Bose Quotes And Shayari with Photos



तुम  मुझे  खून  दो  मैं  तुम्हें  आज़ादी  दूंगा!

मुझे यह नहीं मालूम की,
स्वतंत्रता के इस युद्ध में हममे से कौन  कौन जीवित बचेंगे.
परन्तु में यह जानता हूँ, अंत में विजय हमारी ही होगी....


subhash chandra bose quotes in hindi



चरित्र निर्माण ही छात्रों का मुख्य कर्तव्य है..

एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है।

संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया,
मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले नहीं था....

हम संघर्षों और उनके समाधानों द्वारा ही आगे बढ़ते हैं..

याद रखिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है.



netaji subhash chandra bose shayari

कष्टों का निसंदेह एक आंतरिक नैतिक मूल्य होता है...

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके

अपने कॉलेज जीवन की देहलीज पर खड़े होकर मुझे अनुभव हुआ,
जीवन का कोई अर्थ और उद्देश्य है...


"मध्या भावे गुडं दद्यात"
अर्थात जहाँ शहद का अभाव हो वहां गुड से ही शहद का कार्य  निकालना  चाहिए

एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है.




subhash chandra bose inspirational quotes

में जीवन की अनिश्चितता से जरा भी नहीं घबराता...

समझोतापरस्ती बड़ी अपवित्र वस्तु है..

स्वामी विवेकानंद का यह कथन बिलकुल सत्य है ,
यदि तुम्हारे पास लोह शिराएं हैं और कुशाग्र बुद्धि है ,तो तुम सारे विश्व  को अपने चरणों में झुक सकते हो... 

subhash chandra bose motivational shayari

मुझमे जन्मजात प्रतिभा तो नहीं थी,
परन्तु कठोर परिश्रम से बचने की प्रवृति मुझमे कभी नहीं रही...

श्रद्धा की कमी ही सारे कष्टों और दुखों की जड़ है..




इतिहास  में  कभी  भी विचार-विमर्श  से  कोई  वास्तविक  परिवर्तन   हासिल  नहीं हुआ है।

जिस व्यक्ति में सनक नहीं होती, वह कभी भी महान नहीं बन सकता,
परन्तु सभी पागल व्यक्ति महान नहीं बन जाते,
क्योंकि सभी पागल व्यक्ति प्रतिभाशाली नहीं होते.  आखिर क्यों ?
कारण यह है की केवल पागलपन ही काफी नहीं है.
इसके अतिरिक्त कुछ और भी आवश्यक है....


subhash chandra bose great thoughts in hindi 

अगर संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़,
तब जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है...

इतना तो आप भी मानेंगे, एक न एक दिन तो मैं जेल से अवश्य मुक्त हो  जाऊँगा,
क्योंकि प्रत्येक दुःख का अंत होना अवश्यम्भावी है ...


मैंने अमूल्य जीवन का इतना समय व्यर्थ ही नष्ट कर दिया,
यह सोच कर बहुत ही दुःख होता है.
कभी कभी यह पीड़ा असह्य हो उठती है,
मनुष्य जीवन पाकर भी जीवन का अर्थ समझ में नहीं आया.
यदि मैं अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाया, तो यह जीवन व्यर्थ है,
इसकी क्या सार्थकता है ?

netaji ke famous speech in hindi



यदि आपको अस्थायी रूप से झुकना पड़े,
त ब वीरों की भांति झुकना...

इतिहास में कभी भी विचार -विमर्श से कोई ठोस परिवर्तन नहीं हासिल किया गया है.

हमें केवल कार्य करने का अधिकार है,
कर्म ही हमारा कर्तव्य है.
कर्म के फल का स्वामी वह (भगवान ) है, हम नहीं...

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके.

subhash chandra bose desh prem slogan in hindi

असफलताएं कभी कभी सफलता की स्तम्भ होती हैं..

समय से पूर्व की परिपक्वता अच्छी नहीं होती,
चाहे वह किसी वृक्ष की हो,
या व्यक्ति की और उसकी हानि आगे चल कर भुगतनी ही होती है...

freedom struggle quote in hindi

भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है जो लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी.

एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा - सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो।

व्यर्थ की बातों में समय खोना मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता..

परीक्षा का समय निकट देख कर हम बहुत घबराते हैं.
लेकिन एक बार भी यह नहीं सोचते की जीवन का प्रत्येक पल परीक्षा का  है,
यह परीक्षा ईश्वर और धर्म के प्रति है ! स्कूल की परीक्षा तो दो दिन की  है,
परन्तु जीवन की परीक्षा तो अनंत काल के लिए देनी होगी..
उसका फल हमें जन्म-जन्मान्तर तक भोगना पड़ेगा....

subhash chandra bose suvichar in hindi

मैं चाहता हूँ  चरित्र ,ज्ञान और कार्य

हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो,
हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक  हो,
फिर भी हमें आगे बढ़ना ही है..
सफलता का दिन दूर हो सकता है, पर उसका आना अनिवार्य है....

हमें अधीर नहीं होना चहिये,  न ही यह आशा करनी चाहिए,
की जिस प्रश्न का उत्तर खोजने में न जाने कितने ही लोगों ने अपना  सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया,
उसका उत्तर हमें एक-दो दिन में प्राप्त हो जाएगा....

netaji ke bhasan hindi me



भावना के बिना चिंतन असंभव है,
यदि हमारे पास केवल भावना की पूंजी है तो चिंतन कभी भी फलदायक  नहीं हो सकता.
बहुत सारे लोग आवश्यकता से अधिक भावुक होते हैं, परन्तु वह कुछ  सोचना नहीं चाहते ...

मेरे जीवन के अनुभवों में एक यह भी है,
मुझे आशा है की कोई-न-कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर  भटकने नहीं देती...

याद  रखिए  सबसे  बड़ा  अपराध अन्याय सहना और  गलत  के  साथ  समझौता  करना  है

भविष्य अब भी मेरे हाथ में है..

प्रांतीय ईर्ष्या-द्वेष दूर करने में जितनी सहायता हिन्दी प्रचार से मिलेगी, दूसरी किसी चीज से नहीं।

मैंने अपने छोटे से जीवन का बहुत सारा,
समय व्यर्थ में ही खो दिया है..

कर्म के बंधन को तोडना बहुत कठिन कार्य है..

मैंने जीवन में कभी भी खुशामद नहीं की है,
दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता....

मैं संकट एवं विपदाओं से भयभीत नहीं होता.
संकटपूर्ण दिन आने पर भी मैं भागूँगा नहीं,
वरन आगे बढकर कष्टों को सहन करूँगा .....

निसंदेह बचपन और युवावस्था में,
पवित्रता और संयम अति आवश्यक है...

ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए.

मुझे जीवन में एक निश्चित लक्ष्य को पूरा करना है.
मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है. मुझे नेतिक विचारों की धारा में नहीं  बहना है...

सुबह से पहले अँधेरी घडी अवश्य आती है,
बहादुर बनो और संघर्ष जारी रखो, क्योंकि स्वतंत्रता निकट है...

राष्ट्रवाद  मानव  जाति  के  उच्चतम आदर्शों  सत्यम्  , शिवम्, सुन्दरम्  से   प्रेरित  है।

मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं,
और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है....

जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें,
और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे...

मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की प्रमुख समस्याएं गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, कुशल उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है.

लड़कियों के व्हाटसएप्प मोबाइल नंबर की सूची 2020

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दोस्तों, आज मैं आपके लिए व्हाटसएप्प वाली लड़कियों के मोबाइल नंबर, Mobile numbers of whatsapp girl, Whatsapp chlaane wali ladkiyon ke mobile number प्राप्त करने की जानकारी लेकर आया हूँ. मुझे विश्वास है इससे आपका काम बन जाएगा और आप अपने लिए कोई अच्छी गर्लफ्रेंड बना सकोगे।

आज के इस पोस्ट में आप इस बारे में जानकारी प्राप्त करेंगें कि किसी ऐसी लड़की का नंबर कैसे प्राप्त करें जो whatsapp का इस्तेमाल करती हो. जो लड़के किसी लड़की के सामने जाकर प्रपोज नहीं कर सकते है वो लड़की के whatsapp पर अपना प्यारा सा मैसेज छोड़कर इजहार कर सकते है।

Interst : Whatsapp Friendship
Whatsapp Number :Number Dhekne ke liye Post ko Whatsapp par share karen
Contry : India
Profession : Student


Interst : Whatsapp Friendship
Whatsapp Number : Number Dhekne ke liye Post ko Whatsapp par share karen
Contry : India
Profession : Student


Name : Agarwal Barad
Tnterst : Whatsapp Friendship
Whatsapp Number : Number Dhekne ke liye Post ko Whatsapp par share karen
Contry : India
Profession : Student

आज का राशिफल सभी राशियों का

दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित है। आज का राशिफल निकालते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है। हमारे इस दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों का भविष्यफल बताया जाता है। इस राशिफल को पढ़कर आप अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे। आज का राशिफल में आपके लिए नौकरी, व्यापार, लेन-देन, परिवार और मित्रों के साथ संबंध, सेहत और दिन भर में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का भविष्यफल होता है। आज का पंचांग माघ कृष्ण की पंचमी तिथि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है। चंद्रमा आज सिंह राशि में स्थित है। सबसे अहम बात ये है कि आज मकर संक्रांति का पर्व भी है।



पढ़ें चंद्र राशि पर आधारित 15 जनवरी 2020 का दैनिक राशिफल। सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन। किसको मिलेंगी खुशियां और किस राशि वालो को करना पड़ सकता है परेशानियों का सामना। अपनी राशि के अनुसार जानिए क्या कहता है आपका का राशिफल।

मेष
आज का दिन आपके लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। खर्चे बढ़ेंगे। किसी आवश्यक कार्य के लिए आप कर्ज भी ले सकते हैं और संभवत: यह कर्ज आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। भाग्य में वृद्धि होगी। घर के बड़ों का स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। काम के सिलसिले में की गई यात्राएं सफलता देंगी, हालांकि बड़ी यात्रा पर जाने से बचना चाहिए। इनकम सामान्य रहेगी। परिवार का माहौल शांत रहेगा। वैवाहिक जीवन में आज का दिन कमजोर रहेगा और आप अपने काम में व्यस्तता के चलते प्रिय की बात नहीं मान पाएंगे, जिसका उन्हें अफसोस होगा।

वृष
आपके लिए आज का दिन काफी अनुकूल रहने वाला है। प्रेम जीवन में अच्छे परिणाम मिलेंगे और आपने प्रिय के साथ अच्छे संबंधों का पालन करेंगे और उनसे भविष्य की योजनाएं साझा करेंगे। दांपत्य जीवन जी रहे लोगों के लिए दिन थोड़ा कमजोर रहेगा, क्योंकि जीवन साथी अपने स्वभाव में उग्रता के चलते आपको दबाने की कोशिश करेगा। शांति से काम लेना बेहतर होगा। पारिवारिक जीवन ठीक-ठाक रहेगा घर से कोई व्यक्ति यात्रा पर जाने के लिए निकल सकता है। स्वास्थ्य ठीक ठाक रहेगा। काम पर फोकस आपकी अहम चुनौती होगी।

मिथुन 
आपके लिए आज का दिन परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को निभाने का दिन रहेगा। परिवार में अधिक समय बिताएंगे और घर की जरूरतों को पूरा करेंगे। घरेलू खर्चे से आर्थिक बोझ बढ़ेगा। कोर्ट कचहरी के मामले में आपका दिन काफी मजबूत रहेगा और आपके पक्ष में स्थितियां बनेंगी। व्यापार के मामले में आप का दिन सामान्य रहने वाला है, हालांकि जो लोग नौकरी करते हैं उन्हें आज काफी परिश्रम करना पड़ेगा। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। मन में नए विचार आएंगे।

कर्क
आपके लिए आज का दिन यात्रा पर जाने के लिए बेहतर रहेगा। आप की गई यात्रा को मानसिक रूप से उर्जा भी देगी और सफलता भी प्रदान करेगी। घर के छोटे लोगों का सहयोग आपके व्यापार में मिलेगा और आपका व्यापार गति पकड़ेगा। जीवनसाथी को स्वास्थ्य समस्या परेशान कर सकती है, लेकिन खर्चों में बढ़ोतरी भी होगी, जिससे आपको थोड़ा ध्यान देना होगा पारिवारिक जीवन ठीक रहेगा और प्रेम जीवन जी रहे व्यक्तियों को आज अपनी बात मजबूती से रखनी होगी। तभी उनका प्रिय उनकी बातों को समझ पाएगा। भाग्य के सहारे काम को छोड़ना बेहतर नहीं होगा।

सिंह 
आज का दिन आपके लिए धन के मामले में अनुकूलता देगा। पैसा इकट्ठा होगा जिससे आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनेगी। इसके लिए आपको काफी मेहनत भी करनी पड़ी है, इसलिए ऑफिस के सच्चे हकदार हैं। इनकम बढ़ाने के लिए कोई नई योजना बना सकते हैं। प्रेम जीवन में थोड़ा कमजोर रह सकता है, लेकिन जो लोग शादीशुदा जीवन हैं उनके लिए दिन बेहतर रहेगा और जीवनसाथी से प्रेम मिलेगा। पारिवारिक जीवन की बात की जाए तो थोड़ा तनाव दिखाई दे रहा है, लेकिन कोई भी गंभीर समस्या नहीं होगी, इसलिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी।

कन्या 
मानसिक रूप से आज खुद को काफी मजबूत महसूस करेंगे और बड़े-बड़े निर्णय लेंगे, जिससे आपकी योजनाएं गति पकड़ेंगी। दांपत्य जीवन में भी खुशी बढ़ेगी और अपने जीवनसाथी को कोई तोहफा उपहार में देंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति बेहतर बनेगी, लेकिन काम से संतुष्ट नहीं होंगे और नौकरी बदलने की दिशा में प्रयास करेंगे। प्रेम जीवन के लिए दिन बेहतर रहेगा और अपने प्रिय को अपने मन की बातें बताएंगे। कठिन परिश्रम के बल पर आप आज के दिन को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। किसी से व्यर्थ में झगड़ा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। किसी के झगड़े में ना पड़ें।

तुला 
आज के दिन को बेहतर बनाने में आप कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, लेकिन आपके खर्चे बहुत बढ़ जाएंगे जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ेगा। सोच समझकर खर्च करने की आदत डालें। परिवार का वातावरण बहुत ही खुशनुमा रहेगा और घर को सुंदर बनाने का प्रयास करेंगे। अपने गुस्से पर नियंत्रण रख कर काम करेंगे तो सफलता मिलेगी, नहीं तो रिश्तो में तनाव बढ़ेगा। घर के छोटों से कुछ दिक्कतें पेश आ सकती हैं। प्रेम जीवन में आपको आज अनुकूल परिणाम मिलेंगे और आपका प्रिय आपसे अपने प्रेम का इजहार भी खुलकर करेगा जिससे आपकी खुशी कई गुना बढ़ जाएगी। यदि आप शादीशुदा हैं तो दांपत्य जीवन में थोड़ा तनाव रहेगा। लेकिन संतान की ओर से आपको खुशी मिलेगी। कार्य क्षेत्र में स्थिति अनुकूल रहेगी और आप काम के विस्तार के बारे में विचार करेंगे और यात्रा भी करेंगे।

वृश्चिक 
आपके अंदर आज गजब की फुर्ती रहेगी, जिससे हर काम को बड़ी जल्दी निपटा लेंगे और आपके पास काफी समय बचेगा, जो अपने परिवार को देंगे। इससे परिवार का वातावरण खुशनुमा रहेगा और परिवार के लोगों के साथ समय बिताकर आप भी राहत की सांस लेंगे। दांपत्य जीवन में भी आज का दिन अनुकूल रहेगा और जो लोग प्रेम जीवन में हैं। उन्हें आज अच्छे परिणाम मिलेंगे या नहीं आप कई मोर्चों पर बेहतर तरीके से दिन बिताएंगे। क्षेत्र की स्थितियां भी आपके पक्ष में रहेंगी, लेकिन आज आपको अपने सहकर्मियों पर निर्भर रहना होगा और उनसे अच्छा व्यवहार ही आपको आगे बढ़ाएगा।

धनु 
आज का दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। अचानक से कुछ अटके हुए काम बन जाएंगे और कुछ बनते हुए काम रुक सकते हैं, इसलिए आपको ना ही अधिक खुशी होगी ना ही अधिक दुख होगा। अपने कार्यों को सही अंजाम देने के लिए सही रणनीति बनाएं और आलस्य त्याग कर काम करें। पारिवारिक जीवन से लेकर दांपत्य जीवन तक आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। कार्य क्षेत्र में आपका काम आपको धन दिलवाएगा, लेकिन खर्चे अधिक होंगे और आपका प्रेम संबंध भी खर्चे का कारण बन सकता है, क्योंकि आप अपने प्रिय को कोई चीज खरीद कर दे सकते हैं। खुशनुमा यात्रा से आपका दिन बन जाएगा।

मकर
आपके लिए आज का दिन थोड़ा कमजोर रहने वाला है। स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रहेगा और मानसिक रूप से तनाव भी बढ़ेगा। वहीं दांपत्य जीवन में दिन अनुकूल रहेगा और जीवनसाथी के द्वारा को समाज में ख्याति प्राप्त होगी। उनके साथ किसी धर्म कर्म से जुड़े काम में हिस्सा लेंगे। जैसे आपकी सामाजिक स्थिति बेहतर होगी। जो लोग प्रेम जीवन में हैं उन्हें आज सोच समझकर रहना होगा, क्योंकि उनके परिवार से किसी बात को लेकर नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। कार्यक्षेत्र में भी आपके पक्ष में नजर आएगी और आप को अच्छा लाभ भी होगा। परिवार का वातावरण अनुकूल रहेगा।

कुम्भ 
अकेले आज का दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। स्वास्थ्य में थोड़ी कमी का एहसास होगा, जिससे मानसिक रूप से तनाव भी होगा और खर्चों में बढ़ोतरी होगी। पारिवारिक जीवन के लिए दिन बेहतर रहेगा और आप परिवार वालों का सानिध्य प्राप्त करेंगे। ऑफिस में आपकी स्थिति बेहतर रहेगी और आपके काम को तारीफ भी हासिल होगी। भाग्य का आपको साथ मिलेगा और परिवार की महिलाएं आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे। प्रेम जीवन में स्थिति अनुकूल रहेगी और किसी पुरानी योजना के फिर से चालू हो जाने से आपको लाभ होगा।

मीन
आपके लिए आज का दिन काफी अनुकूल रहेगा। दिन की शुरुआत थोड़ी कमजोर रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, दांपत्य जीवन में खुशियां आएंगी। व्यापार के सिलसिले में किए गए प्रयास सार्थक होंगे और आपकी इनकम बढ़ेगी। परिवार और काम के बीच आपको संतुलन बिठाना होगा, नहीं तो स्थिति आपके हाथ से निकल सकती है। भाग्य पूरी तरह से आपके साथ खड़ा है, इसलिए समय का सदुपयोग करें। आमदनी बढ़ेगी। थोड़े से खर्चे भी रहेंगे, लेकिन उन से डरने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और प्रेम जीवन में सफलता मिलेगी।
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