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गर्भ निरोधक उपाय हो सकते हैं महिलाओं के लिए खतरनाक By Rajiv Dixit Ji

 गर्भ निरोधक उपाय हो सकते हैं महिलाओं के लिए खतरनाक By Rajiv Dixit Ji

RAJIV DIXIT JI /


मित्रो कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं !(Contraceptive) कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं ! जैसे norplant,depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है !



ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन भारत मे लाकर बेच रही हैं ! जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधन के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं !


ये injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है ! कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और depo provera का injection लगा दिया ! जिससे उनको cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई !


इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है ! steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !


इसकी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है ! फिर एक यू क ले फ नाम की एक है फिर एक norplant है ! फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं ! उससे uterus की मांस पेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है ! और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई मताए बहने बिहोश हो जाती है ! लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये contraceptive दिया गया जिसके कारण से ये हुआ है ! और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !


इसके इलवा अभी 3 -4 साल मे कंडोम का व्यपार विदेशी कंपनियो दावरा बहुत बढ़ गया है !! और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है !AIDS का बहाना लेकर TV मे अखबारो मे मैगजीनो मे एक ही बात क विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो !

ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो ! ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ !! वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ , बहन बेटी के साथ करो ,बस कंडोम का इस्तेमाल करो !! और इसका परिणाम पात क्या हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं ! 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी !

और इन कंपनियो का target ये है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए !!

एड्स का हल्ला मचा कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (साथ ही साथ देशी कम्पनियों ने भी) कण्डोम का बाजार खड़ा किया है और कई सौ करोड़ रूपये का सालाना मुनाफा पीट रही हैं। हालांकि एड्स खतरनाक बीमारी है और यौन संसर्ग के अलावा कई अन्य तरीकों से भी इसका प्रसार होता हे। जैसे इन्जेक्शन की सुई द्वारा, रक्त लेने से एवं पसीने के सम्पर्क द्वारा।


परन्तु बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की शह पर एड्स को रोकने के जिन तरीकों को ज्यादा प्रचारित किया जा रहा है उनमें हैं सुरक्षित सम्भोग और कण्डोम का प्रयोग। डाक्टर लार्ड ओ कलिंग्स के अनुसार एक बार के यौन सम्पर्क से 0.1-1 प्रतिशत ! सुई से 0.5-1 प्रतिशत, ! रक्त चढाए जाने से 0.9 प्रतिशत एड्स होने की सम्भावना रहती है। इस तरह संक्रमित व्यक्ति के साथ सम्भोग या सुई के इस्तेमाल और रक्त चढाने से एड्स होने की बराबर सम्भावनाएं रहती हैं। देश में यौन सम्बन्धों के लायक सिर्फ 30 % लोग ही हैं


जो अधिकतर अपने जीवन साथी के अलावा किसी अन्य से यौन सम्पर्क नहीं बनाते। दूसरी तरफ बच्चे से लेकर बूढे तक इन्जेक्शन की सुई का प्रयोग करते हैं अतः इस रास्ते एड्स फैलने की सम्भावनाएं बहुत अधिक हैं। इसके अलावा रक्तदान द्वारा इस बीमारी का होना लगभग तय है। और अभी भी हमारे देश में 50 प्रतिशत मामलों में रक्त बिना जांच के ही चढा दिये जाते हैं। भारत में विशेष स्थितियोें में उपर्युक्त दोनों तरीकों से एड्स प्रसार की ज्यादा सम्भावनाओं को नजर अंदाज कर यौन सम्पर्को को ही मुख्य जिम्मेदार मानना पश्चिम का प्रभाव और कण्डोम निर्माता कम्पनियों की पहुंच का ही परिणाम है। विलासी उपभोक्तावादी संस्कृति के इस दौर में कण्डोम संस्कृति और उस का प्रचार विवाहोतर यौन सम्बन्धों को बढ़ाकर इस बीमारी की जड को हरा ही बनायेंगे।


हमारे देश में लगभग 40 करोड़ रूपये का कण्डोम देशी कम्पनियाँ और इतना ही कण्डोम विदेशी कम्पनियाँ बेच रही हैं। विदेशी कण्डोमों के बारे में यह बात खास तौर से उल्लेखनीय है कि 1982 से ही सरकार ने इनके आयात पर से सीमा शुल्क समाप्त कर दिया था और उस फैसले के बाद ही देश का बाजार विदेशी कण्डोमों से भर गया। करीब 25-30 एजेन्सियाँ जापान, कोरिया, ताइवान, हांगकांग, थाइलैण्ड वगैरा से कण्डोम थोक के भाव मंगाती और बेचती हैं। करीब 20 देशी व 80 विदेशी ब्रांडो अर्थात 100 से ज्यादा ब्रांडो में 100 करोड़ से ज्यादा कण्डोम सालाना बिक रहे हैं।


”मुक्त यौन” की संस्कृति और उसे कण्डोम द्वारा सुरक्षा कवच पहना कर प्रचारित करने से युवाओं की उर्जा का प्रवाह किस दिशा में मोड दिया गया है यह अलग से एक बहुत ही गम्भीर सवाल है।


अंत सरकार और ये विदेशी कंपनिया AIDS रोकने से ज्यादा कंडोम की बिक्री बढ़ाना चाहती है !

इसके लिए देश के युवाओ को बहलाया-फुसलाया जा रहा है ! ताकि विवाह से पहले ही किसी भी लड़की के साथ संब्ध स्थापित करे ! और एक पत्नी से अधिक औरतों से संबंध बनाए !! जिससे समाज और परिवार खत्म हो जाये !


ताकि देश की सनातन संस्कृति को खत्म कर देश को जल्दी ही अमेरिका की कुत्ता संस्कृति मे मिलाया जाये ! कुत्ता संस्कृति से अभिप्राय सुबह किसी के साथ,दोपहर किसी के साथ, अगले दिन किसी के साथ !!


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हैजा का इलाज किसने ढूंढा ???

क्या आपको पता है उन्नीसवीं सदी में करोड़ो को ग्रसने वाली हैजा का इलाज किसने ढूंढा ???

नहीं न !!!

आइए उस गुमनाम नायक के बारे में जानते हैं।

"सन 1817"

1817 में विश्व में एक नई बीमारी ने दस्तक दी। 




नाम था "ब्लू डेथ" 

ब्लू डेथ यानि "कॉलेरा" जिसे हिंदुस्तान में एक नया नाम दिया गया........"हैजा"।

हैजा विश्व भर में मौत का तांडव करने लगा और इसकी चपेट में आकर कर उस समय लगभग 1,80,00,000(एक करोड़ अस्सी लाख) लोगों की मौत हो गयी। दुनिया भर के वैज्ञानिक हैजा का ईलाज खोजने में जुट गये। 

"सन 1844"

रॉबर्ट कॉख नामक वैज्ञानिक ने उस जीवाणु का पता लगाया जिसकी वजह से हैजा होता है और उस जीवाणु को नाम दिया वाइब्रियो कॉलेरी। 
रॉबर्ट कॉख ने जीवाणु का पता तो लगा लिया लेकिन वह यह पता लगाने में नाकाम रहे के वाइब्रियो कॉलेरी को कैसे निष्क्रिय किया जा सकता है। 

हैज़ा फैलता रहा ........लोग मरते रहे और इस जानलेवा बीमारी को ब्लू डेथ यानि "नीली मौत" का नाम दे दिया गया। 

"1 फरवरी 1915"

पश्चिम बंगाल के एक दरिद्र परिवार में एक बालक का जन्म हुआ। नाम रखा गया "शंभूनाथ"।  शुरुआत से ही शंभूनाथ पढ़ाई में अव्वल रहे। कोलकाता मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। डॉक्टरी से अधिक उनका रुझान "रिसर्च" की ओर था। इसलिये 1947 में उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के कैमरोन लैब में पीएचडी में दाखिला लिया। मानव शरीर की संरचना पर शोध करते समय शंभूनाथ डे का ध्यान हैज़ा फैलाने वाले जीवाणु वाइब्रियो कॉलेरी की ओर गया। 

1949 

माटी का प्यार शंभूनाथ डे को वापिस हिंदुस्तान खींच लाया। उन्हें कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया और वह महामारी का रूप ले चुके हैज़े का ईलाज ढूंढने में जुट गये। 
बंगाल उस समय हैज़े के कहर से कांप उठा था। हॉस्पिटल हैजे के मरीजों से भरे हुये थे। 

1844 में रॉबर्ट कॉक के शोध के अनुसार जीवाणु व्यक्ति के सर्कुलेटरी सिस्टम यानी कि खून में जाकर उसे प्रभावित करता है। दरअसल यहीं पर रॉबर्ट कॉख ने गलती की, उन्होंने कभी सोचा ही नहीं कि यह जीवाणु व्यक्ति के किसी और अंग के ज़रिए शरीर में जहर फैला सकता है।

शंभूनाथ डे ने अपने शोध के निष्कर्ष से विश्व भर में सनसनी फैला दी। शंभूनाथ के शोध से पता चला वाइब्रियो कॉलेरी खून के रास्ते नहीं बल्कि छोटी आंत में जाकर एक टोक्सिन/जहरीला पदार्थ छोड़ता है।इसकी वजह से इंसान के शरीर में खून गाढ़ा होने लगता है और पानी की कमी होने लगती है।

1953
शंभूनाथ डे का शोध प्रकाशित के पश्चात ही ऑरल डिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) को बनाया गया। यह सॉल्यूशन हैजे का रामबाण इलाज साबित हुआ। हिंदुस्तान और अफ्रीका में इस सॉल्यूशन के जरिये लाखों मरीजों को मौत के मुँह से निकाल लिया गया। 

विश्व भर में शंभूनाथ डे के शोध का डंका बज चुका था। परंतु उनका दुर्भाग्य था के वह शोध भारत भूमि पर हुआ था। लाखों करोड़ों लोगों को जीवनदान देने वाले शंभूनाथ को अपने ही राष्ट्र में सम्मान नहीं मिला। 

शंभूनाथ आगे इस जीवाणु पर और शोध करना चाहते थे लेकिन भारत में साधनों की कमी के चलते नहीं कर पाये। 

उनका नाम एक से अधिक बार नोबेल पुरस्कार के लिए भी दिया गया। इसके अलावा, उन्हें दुनिया भर में सम्मानों से नवाज़ा गया लेकिन भारत में वह एक गुमनाम शख्स की ज़िंदगी जीते रहे। 

शंभूनाथ की रिसर्च ने ब्लू डेथ के आगे से डेथ(मृत्यु) शब्द को हटा दिया। करोड़ों लोगों की जान बच गयी। इतनी बड़ी उपलब्धि के पश्चात भी वह "राष्ट्रीय नायक" ना बन सके। ना किसी सम्मान से नवाजे गये। ना सरकार ने सुध ली। 

यही नहीं करोड़ों लोगों की ज़िंदगी बचाने वाले इस राष्ट्रनायक के विषय में हमें पढ़ाया तक नहीं गया। 

हमें अपने असली नायकों को पहचाना होगा। उन्हें सम्मान देना होगा। 
साभार🙏

LOCKDOWN कोरोना संकट के बीच कल सुबह 9 बजे देश को फिर संबोधित करेंगे PM मोदी

देश में जारी कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की सुबह 9 बजे एक बार राष्ट्र को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि वो देश के नाम वीडियो संदेश जारी करेंगे.
MASK BOY



नई दिल्ली: देश में जारी कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की सुबह 9 बजे एक बार फिर राष्ट्र को संबोधित करेंगे. कोरोना मामले पर पीएम मोदी का देश के नाम यह तीसरा संबोधन होगा. हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो देशवासियों के लिए वीडियो संदेश जारी करेंगे.  गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री कोरोना संकट को लेकर दो बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं. इससे पहले नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च और 19 मार्च को राष्ट्र को संबोधित किया था. 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन का एलान किया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बता दें कि19 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से देश में निर्मित हालात को लेकर देश को संबोधित किया था. उन्होंने देशवासियों से कोरोना के खिलाफ लड़ने का संकल्प लेने का आग्रह किया था. उन्होंने कहा था कि बीते कुछ दिनों से ऐसा भी लग रहा है जैसे हम संकट से बचे हुए हैं, सब कुछ ठीक है. लेकिन अभी तक विज्ञान, कोरोना महामारी से बचने के लिए, कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है. इसका सामना करने के लिए देश वासियों को सजग रहने और संयम बरतने की जरूरत है.साथ ही उन्होंने देश के लोगों से 22 मार्च को एक दिनों के लिए जनता कर्फ्यू करने की अपील भी की थी.वहीं 24 मार्च के संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लागू करने की बात कही थी.

बता दें कि भारत में कोरोना संकट गहराता जा रहा है देश में कोविड-19 के मामले बढ़कर गुरुवार को 1,965 हो गए और वहीं इससे अब तक 50 लोगों की जान जा चुकी है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना वायरस से अभी 1,764 लोग संक्रमित हैं. जबकि 150 लोग वे हैं, जिन्हें या तो इलाज के बाद छुट्टी मिल चुकी है या दूसरे देश जा चुके हैं. पिछले 24 घंटे में 328 नए मामले (कल के दोपहर के आंकड़े के आधार पर) सामने आए हैं. वहीं, पिछले 24 घंटे में 12 लोगों की मौत हुई है. मंत्रालय द्वारा गुरुवार सुबह जारी किए आकंड़ों के अनुसार देश में कोरोना वायरस के नौ नए मामले सामने आए, जिनमें से चार महाराष्ट्र, तीन मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश तथा पंजाब से एक-एक मामला आया. देश में वायरस से अधिक महाराष्ट्र में 13 लोगों की जान गई. इसके बाद गुजरात में 6, मध्य प्रदेश में 6, पंजाब में 4, कर्नाटक में 3 , तेलंगाना में 3, पश्चिम बंगाल में 3, दिल्ली में 2, जम्मू-कश्मीर में 2, उत्तर प्रदेश में 2 और केरल में 2 मौतें हुई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से एक-एक मौत की खबर है.

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया में DAF कितना महत्वपूर्ण है
UPSC IAS k interview me puche jane wale sawal v unke jawab 

अगर आप UPSC सिविल सेवा की तैयारी कर रहें हैं तो निश्चित है की आपने DAF के बारे में ज़रूर सुना होगा। UPSC सिविल सेवा परीक्षा के prelims qualified candidates को मेंस परीक्षा से पहले एक Detailed application Form यानी DAF भरना होता है। ये एक बहुत ही important document है जो कैंडिडेट के करियर से ले कर पोस्टिंग तक, सब कुछ डिफाइन करता है। DAF को 8 भागो में बांटा गया है और हर एक भाग को भरना कंपल्सरी होता है।

जानें UPSC IAS की इंटरव्यू प्रक्रिया


इंटरव्यू बोर्ड में DAF ही आपकी पहचान है
UPSC इंटरव्यू बोर्ड आपको आपके DAF के through ही पहचानता है इसीलिए जितने सटीक तरीके से आप अपना DAF fill करेंगे उतना ही interview आपके favour में होगा। जो भी इनफार्मेशन आप DAF में भरे वह सच और सही होनी ज़रूरी है। आपके DAF की कॉपी बोर्ड रूम में बैठे हर एक पैनेलिस्ट् के पास होगी। इंटरव्यू की शुरुआत generally पर्सनल questions से की जाती है जिसमे आपका इंट्रोडक्शन, आपका family background, hobbies इत्यादी के बारे में आपसे पूछा जाएगा। इसलिए ये ज़रूरी है की आप इन प्रश्नों पर घबराये नहीं और इमानदारी से जवाब दे। ये इंटरव्यू आपकी नॉलेज टेस्ट करने के लिए नहीं बल्कि आपकी alertness और Presence of mind के साथ साथ प्रेशर situations में आपकी decision-making capability को जानने के लिए लिया जाता है।

अक्सर कैंडिडेट्स अपनी इंटरव्यू ड्रेस, अपना चलने का तरीका, अपनी इंग्लिश लैंग्वेज पर कमांड को ले कर चिंता में रहते है। जबकि इंटरव्यू में इन सब चीजों के मायने काफी कम है। आपकी इंटरव्यू ड्रेस presentable होनी चाहिए और बोलने के तरीके में शालीनता और कॉन्फिडेंस होना ज़रूरी है।



इंट्रोडक्शन से होती है इंटरव्यू की शुरुआत
इंटरव्यू के शुरुआत की बात करे तो panelists कैंडिडेट को relax करने के लिए सबसे पहला सवाल उनके introduction से रिलेटेड ही करते है। अगर panelists “Tell us about yourself” या “introduce yourself” कहते है तो आप अपने इंट्रोडक्शन में आपका नाम, place of birth (यानि जन्म का स्थान), आपकी academic क्वालिफिकेशन, institutes के नाम और वर्क प्रोफाइल के बारे में बताएं। कुछ कैंडिडेट्स अपने interests और hobbies के बारे में भी इंट्रोडक्शन देते है हालाकि ये ऑप्शनल है। interview में आपसे आपके नाम का मतलब भी पूछा जा सकता है। आपके पर्सनल इंट्रोडक्शन से पैनल आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस को चेक करता है वही साथ साथ आपकी अपने बारे में दी गयी जानकारी को भी verify करता है।

अपने आप को introduce करने में घबराए नहीं और हर सवाल को अपने बारे में बताने का एक अवसर समझे। वहाँ मोजूद बोर्ड मेम्बर्स आपको आपके answers से नहीं बल्कि आपके आंसर देने की रीजनिंग और आपके beliefs के बेसिस पर judge  करते हैं।

DAF में दी पर्सनल इनफार्मेशन से पूछा जा सकता है सवाल
इसके अलावा आपके होम टाउन (यानि जन्म स्थान), होम स्टेट से रिलेटेड कोई भी प्रश्न पूछा जा सकता है। इसलिए इन टॉपिक्स को जियोग्राफी, हिस्ट्री, कल्चर और करंट इवेंट्स के बेसिस पर अच्छे से तैयार करे। होम स्टेट के साथ साथ neighbouring states के बारे में भी अच्छे से पढ़े। अगर आप एक से ज्यादा स्टेट्स में रहे है तो सभी स्टेट्स के बारे में जानकारी होना ज़रूरी है। इन  प्रश्नों से panelists ना सिर्फ आपकी awareness को चेक करते है बल्कि आपकी देश और उसके प्रति जागरूकता का भी टेस्ट लेते है।

स्टेट इश्यूज से रिलेटेड अगर आपसे कोई सवाल पूछा जाये तो आपकी कोशिश यही होनी चाहिए की आप एक भारतीय नागरिक के रूप में balanced और impartial जवाब दे।

जैसे की अगर आप हरियाणा से belong करते है तो सतलज वाटर डिस्प्यूट जैसे सवाल पर आप ना सिर्फ हरियाणा की समस्याओ बल्कि पंजाब के point of view से भी इस टॉपिक को discuss करें। panelists आपसे एक न्यूट्रल जवाब की अपेक्षा रखते है इसीलिए आपको ये बात हर सवाल का उत्तर देते समय हमेशा ध्यान रखनी चाहिए। एक सिविल सर्वेंट को प्रदेश हित से हट कर राष्ट्र हित के बारे में सोच कर ही निर्णय लेना होता है इसीलिए panelists ऐसे सवाल करते है जो आपकी सामाजिक सोच को जानने में उनकी मदद करे।

 DAF में आपसे आपके माता पिता के बारे में भी पूछा जाता है। उनका जन्म स्थान, उनका profession इत्यादि। उदहारण के लिए यदि आपके माता या पिता बैंक में कार्यरत है तो पनेलिस्ट्स आपसे bank रिलेटेड questions भी पूछ सकते है। इससे वह आपकी अपने आस पास और आपसे जुड़े लोगो में रूचि और जिज्ञासा को जाचते है। इसीलिए आपको अपने पेरेंट्स के profession के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

DAF में अपनी hobbies की दें सही जानकारी
DAF में आपकी पर्सनल इनफार्मेशन के साथ साथ आपकी hobbies, extra-curricular एक्टिविटीज और स्पोर्ट्स पार्टिसिपेशन के लिए भी एक कॉलम दिया जाता है। इस कॉलम को भरते टाइम आपको ये ध्यान में रखना चाहिए की आप जो भी इनफार्मेशन यहाँ मेंशन करेगे उससे रिलेटेड सवाल पैनल मेम्बेर्स आपसे पूछ सकते है। उदहारण के लिए अगर आपने अपनी hobbies में रीडिंग मेंशन किया है तो यह एक vague (यानि अस्पष्ट) hobby है। रीडिंग में आपको ये मेंशन करना ज़रूरी है की आप क्या पढना पसंद करते है - नोवेल्स, फिक्शन, नॉन-फिक्शन. इसी के आधार पर panelist आपसे सवाल करते है। अगर आप फिक्शन मेंशन करते है तो हो सकता है वह आपसे आपकी कोई favourite फिक्शन या ऑथर का नाम पूछे। या उस ऑथर की अन्य बुक्स के बारे में या ऑथर की लाइफ से जुड़ा कोई प्रसिद्ध वाक्य भी पूछ सकते हैं।



DAF में दे सही और सटीक जानकारी
इसी तरह अगर आप कोई भी स्पोर्ट्स मेंशन करते हैं तो आपसे उस स्पोर्ट्स के रूल्स, उससे जुड़ी प्रसिद्ध हस्तियाँ और खेल से संभंधित प्रतियोगिताओ के बारे में भी पूछा जा सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है की आप जो कुछ भी DAF में मेंशन करे उसे अच्छे से prepare ज़रूर करे। पैनल में मोजूद सभी मेम्बेर्स सुशिक्षित और अनुभवी होते है इसलिए हर प्रश्न का जवाब स्पष्ट तरीके से दे और ब्लफ करने की कोशिश न करे। अगर आपको किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं आता है तो आप इसे इमानदारी से पैनेलिस्ट को बता सकते है। आपके सही होने से ज्यादा आपका ईमानदार होना matter करता है।

IAS इंटरव्यू में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उद्देश्य एडमिनिस्ट्रेशन के लिए कैंडिडेट की उपयुक्तता यानि (suitability) चेक करना है। इस पर्सनल इंटरव्यू का motive आपसे सही जवाब लेना नहीं बल्कि प्रेशर सिचुएशन में आपकी मेंटल alertness और प्रजेंस ऑफ़ माइंड को चेक करना है। इसीलिए ये ज़रूरी है की आप हर सवाल का जवाब संयम और आत्मविश्वास से दे। question पूछे जाने के बाद कुछ सेकंड अपने जवाब को सोचे. ये आपको calm रह कर आपके थॉट्स recollect करने में मदद करेगा। किसी भी जवाब में carried away ना हो और अपना मेंटल बैलेंस बना कर रखे। 

सक्सेसफुल लोगों की ये आदतें बना सकती हैं आको भी सक्सेसफुल

 सक्सेसफुल लोगों की आदतें बना सकती हैं आको भी सक्सेसफुल
successful people habits ,

कभी सोचा है कि बिल गेट्स जिन्होंने कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी नहीं की वो कैसे दुनिया के सबसे अमीर और सक्सेसफुल इंसान बने. वो कौन-सी आदतें थी जिन्होनें उन्हें जीवन में सफलता दिलाई. अक्सर ये सवाल हमारे जेहन में आता है कि एक इंसान को सक्सेसफुल कौस-सी आदतें बनाती हैं.




तो, चलिए आज आपको इसी सवाल का जवाब देते हैं कि वो आदते कौन-सी हैं:

ज़रूरी नहीं है हर काम में परफेक्ट होना
'आई वांट एवरीथिंग टू भी परफेक्ट’ अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिन्हें हर चीज़ में परफेक्शन चाहिए होता है तो रूक जाइए. क्योकि परफेक्शन आपकी सफलता में रूकाकट पैदा करता है.



दरअसल बात ये है कि जो लोग हर चीज़ में परफेक्शन ढूंढते हैं वो काम कम करते और सोचते ज्यादा है. इसलिए वो अपने लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते.

परफेक्ट होने का मतलब है कि सब एकदम सही होना. पर एक सच ये भी है कि कभी भी कुछ भी सही नहीं होगा. चाहे हम कितना भी प्रयास करें. इसलिए काम करना ज़रूरी है बजाय ये सोचने के बजाय कि ये परफेक्ट है या नहीं.

किताबों को दोस्त बनाते हैं



किताबें अगर आपकी सबसे अच्छी दोस्त हैं, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है. ऐसा माना है कि दुनिया के सबसे सक्सेसफुल लोग रिडिंग पर बहुत ध्यान देते हैं. वो अपने दिन के कुछ मिनट या घंटें रिडिंग में ज़रूर इनवेस्ट करते हैं. क्योकि एक अच्छा रीडर ही अच्छा Communicator भी बन पाता है. इसीलिए तो बिल गेटस् साल में लगभग 50 किताबें पढ़ते हैं.

किताबें की मदद से हम नये आइडियाज़ बना पाते हैं और अपनी नॉलेज भी अच्छी कर पाते हैं.

डायरी में छिपा है सक्सेस का मंत्र 



डायरी लिखना सुनने में थोड़ा अजीब लगता है पर ये एक ऐसी आदत है जो सक्सेसफुल लोग हर रोज़ करते हैं. अपने दिन के बारे में लिखना, पूरी दिन में क्या अच्छा हुआ, क्या अलग हुआ, क्या नया सीखा. इन सबके बारे में लिखने से जीवन में क्लेरिटी आती है.

हजारों साल पहले, सुकरात और अरस्तू जैसे दार्शनिकों के पास आईफ़ोन या आईपैड नहीं थे. लेकिन उन सभी के पास डायरी थीं जिनमें उन्होंने अपने जीवन का लेखा-जोखा रखा था.

डायरी लिखने से हम अपनी वो बातें कह पाते हैं जिन्हें हम किसी से शेयर नहीं करना चाहते हैं अपने करीबी दोस्तों से भी नहीं. जिससे हम हल्का महसूस करते है.

...और ये वाली आदत सबसे मुश्किल है
और एक टाइम ऐसा आता है कि अलॉर्म को भी शर्म आने लगती है. अगर आप उन्हीं लोगों में से हैं जो सुबह जल्दी उठने के नाम पर कहते हैं ‘ये तो ना हो पाएगा’. तो आप कभी सक्सेसफुल नहीं हो सकते. क्योकि ऐसा माना जाता है कि दुनिया में 90 प्रतिशत सक्सेसफुल लोग जल्दी उठते हैं.

जल्दी उठने से हम अपना दिन अच्छे से प्लान कर पाते हैं और उस प्लान पर अमल भी कर पाते हैं. वहीं, सुबह उठकर अगर हम थोड़ी देर एक्सरसाइज़ कर लेते हैं तो मानो सोने पर सुहागा है.

बता दें कि, अमेरिकन टीवी होस्ट ओपरा विनफ्रे कहती हैं कि वह 09:00 बजे काम शुरू करने से पहले प्रति दिन 06:02 बजे उठती हैं.

खुद के साथ समय बिताना



इंसान को सोशल ऐनिमल कहा जाता है हम चाहते हैं कि हम हमेशा लोगों के बीच रहें. पर क्या आपको पता है कि दुनिया के सबसे क्रिएटिव लोग खुद से साथ सबसे ज्यादा समय बिताते हैं.

रिसर्च के मुताबिक,जो लोग अकेले रह सकते हैं वो खुश रहते हैं और स्ट्रेस को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाते हैं. साथ ही, जब हम अकेले रहते हैं तो खुद को ज्यादा अच्छे से समझ पाते हैं.

ऐसा करने से हमारी बॉडी रिलेक्स होती है और हम अपने काम को पूरे फोकस के साथ कर पाते है. इसलिए ज़रूरी है कि अपनी बिज़ी लाइफ से दो पल खुद को लिए निकाल लिए जाए.

हर दिन कुछ नया सीखते हैं



कहते हैं कि ज़िंदगी का असली मतलब ही है कि हर दिन कुछ नया सीखते रहना. हमे हर दिन कुछ नया सिखाता है बस शर्त ये है कि हम सीखने के लिए तैयार हैं या नहीं. 

दुनिया के सबसे सक्सेसफुल लोग अपना समय टीवी देखने, वीडियो गेम खेलने, या वीकेंड पर पार्टी करने में नहीं बिताते. वो अपने स्किल्स को अच्छी करने में अपना टाइम इनवेस्ट करते हैं.

क्योकि जब हम कुछ नया सीखते हैं तो अपने बारें में नई बातें डिस्कवर कर पाते हैं.

अपनी गलतियों से सीखना
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, ‘जिसने कभी गलती नहीं की है उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की है’ जो लोग हारने से नहीं डरते हमेशा सक्सेसफुल होकर निकलते हैं. क्योकि ज़िंदगी हमें हर मोड़ पर हराती है और जो असफलता से डर जाते हैं कभी सफलता हासिल नहीं कर पाते.

असफलता हमें जीवन वो लाइफ लेसन्स देती है जो सफलता कभी नहीं देती. इसलिए असफलता से कभी मत डरो क्योंकि जितनी तेजी से आप असफल होते हैं उतनी ही जल्दी आप सफलता की राह देखेंगे.

अपनी असफलता को स्वीकार करना और उसे पॉज़ीटिव तरीके से देखना सबसे मुश्किल आदतों में से एक है. लेकिन यह सफल बनने के लिए सबसे ज़रूरी है. और हां हमारे बॉलीवुड के किंग खान ने खुद कहा है कि हार कर जीतने वाले को ही बाज़ीगर कहते है.


हेल्दी खाना और फिट रहना



सुनने में थोड़ा क्लीशे लगे पर य हेल्दी रहना सक्सेसफुल बनने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है. क्योकि जब हमारा दिमाग और शरीर स्वास्थ रहता है तभी हम प्रोडक्टिव तरीके से काम कर पाते हैं. दुनिया में सबसे सक्सेसफुल लोग अपनी हेल्थ का सबसे ज्यादा ध्यान रखते हैं.

बता दें कि ओबामा हर रोज़ ऑफिस जाने से पहले 45 मिनट वर्क ऑउट करते हैं. दुनिया के सक्सेसफुल लोग टाइम के हिसाब से खाना खाते हैं. यदि आप अच्छा खाते हैं, तो आप अच्छा काम भी करते हैं. इसलिए ज़रूरी है चीनी कैफीन, फ्राइड स्नैक्स जैसी चीज़ें से परहेज किया जाए.

अगर आप भी किसी ऐसी आदत के बारे में जानते हैं, तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं.

अकेले घुमने है शोकिन तो इन बातों का रखें ध्यान

AKELE BAHAR GHUMNE KE SHOKIN TO IN BATON KA RAKHRN DHYAN
अकेले घुमने है शोकिन तो इन बातों का रखें ध्यान ,


जो लोग घूमना पसंद करते हैं, उनके लिए घूमना एक लत की तरह है. बस मन पक्का हो जाए. फिर भले ही किसी का साथ मिले चाहे ना मिले. ये लोग घूमने निकल पड़ते हैं. कई लोगों के लिए तो नयी जगहों पर घूमना उनके काम का हिस्सा है.




वैसे इसके कई फायदे भी हैं, जो लोग ज़्यादा नहीं घूम पाते वे अपने देश और यहां की अलग-अलग संस्कृतियों के बारे ज़्यादा जान भी नहीं पाते. नई जगह जाना, वहां के लोगों का रहन-सहन व्यवहार आदि देखना ये सब रोमांचकारी है.

मगर यदि आप किसी ऐसी नई जगह पर घूमने जा रहे हैं, जहां के बारे में आप ज़्यादा कुछ नहीं जानते तो आपको अपनी यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए. कई बार आपकी छोटी सी गलती आपको बहुत भारी पड़ सकती है.

तो चलिए हम आपको बताते हैं कि किसी नई जगह की यात्रा पर निकलने से पहले या इसके दौरान विशेष रूप से किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. इंटरनेट की मदद लेने में संकोच न करें
अगर आप किसी नयी जगह की यात्रा पर जा रहे हैं, तो सबसे पहले वहां के बारे में इंटरनेट या फिर किसी जानने वाले से वहां की पूरी जानकारी ज़रूर ले लें. आपको पता होना चाहिए कि आप जहां जा रहे हैं, वो जगह कैसी है, वहां के लोग कैसे हैं.



इसके अतिरिक्त आप सोशल मीडिया के माध्यम से यहां रहने वाले अपने ऑनलाइन दोस्तों को भी सूचित कर सकते हैं कि आप उनके क्षेत्र में आ रहे हैं. इससे आपको वहां लोकल सपोर्ट मिल सकता है. अगर कल को आप वहां किसी तरह की परेशानी में फंसते हैं तो आपके ये ऑनलाइन दोस्त आपकी मदद कर सकते हैं.

2. होटल बुकिंग से पहले पढ़ें रिव्यू 
अगर आप महिला हैं, तो ये आपके लिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी यात्रा के दौरान जहां ठहरने वाली हैं. वहां के बारे में आप अच्छे से पता कर लें. लोग होटल बुक करते हुए केवल दाम देखते हैं. जबकि, दाम से ज़्यादा ज़रूरी ये जानना कि जहां आप रुकने वाले हैं वहां के बारे में लोगों की क्या राय है.

तो ये जानने के लिए होटल बुक करने से पहले आप उस होटल के बारे में वहां ठहर चुके यात्रियों के रिव्यू ज़रूर पढ़ लें. अगर ज़्यादातर पॉज़टिव रिव्यू हों तभी होटल बुक करें वर्ना कोई और होटल सर्च करें. हालांकि किसी भी होटल को लेकर हर किसी की राय एक जैसी नहीं होगी मगर फिर भी आप ये देखें कि ज़्यादातर लोग उस होटल के बारे में क्या कह रहे हैं. 

3. ना करें अपनी पूरी जानकारी शेयर
आमतौर पर ऐसा होता है कि हम यात्रा के दौरान अपने सह यात्रियों से घुल मिल जाते हैं और उन्हें ये सब बता देते हैं कि हम कहां से आ रहे हैं, कहां और किस काम के लिए जा रहे हैं.



जबकि, आज के समय में ऐसा करना समझदारी नहीं कहलाता. इसलिए आप किसी से भी उतनी जानकारी शेयर करें जितनी ज़रूरी हो. जहां आप जा रहे हैं वहां भी किसी से अपने बारे में हर बात ना बताएं.

4. चाट मसाले का पैकेट साथ लेकर चलें 
आप जब यात्रा के लिए निकल रहे हों तो अपने सामान के साथ एक चाट मसाले का पैकेट रखना ना भूलें. ऐसा करते हुए भले आपको थोड़ा अटपटा लगे लेकिन आगे के सफर में ये चाट मसाला आपके बहुत काम आएगा. कई बार आप घूमने की धुन में समय पर खाना पीना भूल जाते हैं.

ऐसे में जब आपको भूख लगे और आसपास कुछ खाने को ना दिखे तो घबराइए मत, बाज़ार में चलते फिरते टमाटर खीरे या मूली कुछ भी लेकर बैग में रख लें और भूख लगने पर चाट मसाला मिला कर खा लें. इससे कम से कम आप एक समय तो भूख पर काबू पा ही सकते हैं.

दिन में तो आप किसी भी होटल में रुक कर खा सकते हैं लेकिन रात में आप किसी पर भरोसा नहीं कर सकते. खाने पीने के मामले में तो बिलकुल नहीं इसलिए खुद की तैयारी हमेशा पूरी रखें. 

5. हथियार जैसा कोई सामान ज़रूर रखें पास 
हिंसा या फिर किसी तरह का हथियार साथ रखना अच्छी बात नहीं है मगर अपनी सुरक्षा के लिए खुद को तैयार रखना बेहद ज़रूरी है. इसीलिए जब आप यात्रा पर निकल रहे हों तो अपने साथ कोई ना कोई ऐसा सामान ज़रूर रखें जो समय आने पर हथियार का काम कर सके.

जैसे कि एक छोटा चाकू, नुकीली बेल्ट, लकड़ी का मजबूत रोल इत्यादि. आज के समय में कुछ कहा नहीं जा सकता कि कब हम किसी बुरी परिस्थिति में फंस जाएं उस समय ऐसा कुछ सामान साथ होना एक तरह से हिम्मत देता है.

6. दिल से नहीं दिमाग से काम लें 
कहते हैं बच्चे मन के सच्चे होते हैं, लेकिन आज के दौर में बच्चों की इस सच्चाई और मासूमियत का खूब फायदा उठाया जा रहा है. यह बात सब जानते हैं कि लोग बड़ों की अपेक्षा बच्चों पर जल्दी तरस खाते हैं और उनकी बात मान लेते हैं. ऐसे में घूमने वाली जगहों पर बच्चों का इस्तेमाल कर के यात्रियों को खूब लूटा जाता है.

इसीलिए जब भी यात्रा पर निकलें तो बच्चों का इस्तेमाल कर होने वाली इस जालसाज़ी से बच कर रहें. बच्चे बड़ी मासूमियत से अपना दुख बता कर आपसे पैसे ऐंठ सकते हैं या फिर आपको बातों में बहला कर आपका सामान चोरी कर सकते हैं. ऐसे ही कुछ बड़े लोग भी होते हैं, जो आपसे अपनी मजबूरी बता कर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं या फिर फोन करने के बहाने आपका फोन लेकर भाग जाएंगे. इसलिए घूमने के दौरान दिल से ज़्यादा दिमाग से काम लें.

7. टैक्सी बुक करते समय रखें ध्यान
नये यात्रियों को देख कर कई टैक्सी ड्राइवर उन्हें टैक्सी में बिठा लेते हैं. अगर आपसे भी कोई टैक्सी में बैठने को कहे तो बिना सोचे समझे टैक्सी में बैठने की गलती ना करें. बैठने से पहले किराये के बारे में तय कर लें. ऐसा ना हो कि आपको डेस्टिनेशन पर उतारने के बाद टैक्सी ड्राइवर आपसे मन चाहे पैसों की मांग करे.

इसके अतिरिक्त टैक्सी यात्रा के दौरान सतर्क रहें. वैसे आज कल कई तरह की कैब सर्विस चलन में हैं जिनका किराया पहले से तय रहता है तथा इसके साथ ही ये सुरक्षित भी हैं. अगर ऐसी सर्विस उपलब्ध हो तो उसी का इस्तेमाल करें. 

8. बात सबसे करें, पर भरोसा किसी पर ना करें 
यह भी बात एकदम सही है कि जब तक आप किसी से बातचीत नहीं करेंगे तब तक नई जगह के बारे में पूरी तरह से कैसे जान पाएंगे. इसलिए घूमने के दौरान सबसे खुल कर बातचीत करें, लोगों से इस शहर के बारे में हर जानकारी लें. मगर किसी पर भी आंख बंद कर के भरोसा मत करें.

अगर आपको कोई कहता है कि वह आपको सस्ते दाम पर होटल दिलवा देगा तो कोई बहाना बना कर मना कर दें. किसी से इतना भी ना घुल मिल जाएं कि वो जो दे उसे आप बिना सोचे समझे खा लें. ये सब आपके लिए खतरनाक हो सकता है इसीलिए सतर्क रहें. 

9. हर तरह के स्कैम से बचें 
अगर आप देश से बाहर घूमने जा रहे हैं तो अपनी करंसी बदलवाते समय सतर्क रहें. ऐसा ना हो कि आपके मेहनत के पैसों के बदले कोई आपको नकली नोट थमा दे. करंसी बदलवाने से पहले गूगल पर ये चैक कर लें कि जहां से आप अपने पैसे बदलवा रहे हैं वो एक्सचेंज ऑफ़िस वेरिफाइड है या नहीं.

इसके अलावा किसी तरह के भी क्रैडिट कार्ड लेने से बचें. ये एक तरह का स्कैम हो सकता है जो आपसे क्रेडिट कार्ट के नाम पर पैसे ऐंठ सकता है.

तो जैसा कि आपने ऊपर पढ़ा, दिल से घूमने जा तो रहे हैं लेकिन यहां ज़्यादातर इस्तेमाल दिमाग का करें. आप जितने अच्छे दिल वाले हैं, आपके साथ धोखाधड़ी के चांस उतने ही ज़्यादा बढ़ सकते हैं.

पाकिस्तान में भारत की इन चीजों को गूगल पर सबसे जयादा सर्च किया जाता है

गूगल ने हाल में हर देश के हिसाब से सर्च रिजल्ट जारी किया है. हर देश कई मामलों में तो एक जैसा ही है जिसमें सेलिब्रेटी, सिनेमा, टीवी शो आदि सर्च के मामले में शीर्ष पर रहे हैं. अगर बात पाकिस्तान के संदर्भ में करें तो साल 2019 में पाकिस्तान के लोगों में भारत के बारे में जानने में अधिक दिलचस्पी रही है.

पाकिस्तान भी भारत की इन चीजों को गूगल पर करता है सर्च


इसके साथ ही पाक में इस साल क्रिकेट का क्रेज भी काफी अधिक रहा है. गूगल ने साल 2019 खत्म होने से पहले अपनी सालाना सर्च रिपोर्ट पेश की है. गूगल की सर्च रिपोर्ट में 2019 में पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली चीजों के बारे में जानकारी दी गई है.

गूगल के सर्च रिपोर्ट में रोचक तथ्य यह है कि इसमें तीन ऐसी शख्सियतों को जगह मिली है जिनका ताल्लुक भारत से है और ये भारतीय नागरिक हैं.

गूगल पर पाकिस्तान के लोगों ने इंडियन एयरफोर्स के पायलट अभिनंदन वर्तमान के बारे में लोगों ने जम कर सर्च किया है. भारत के वीर को पाकिस्तान में काफी सर्च किया गया. उनका मिग विमान पाकिस्तान में क्रैश हो गया था. इसके पहले उन्होंने पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया था, इसके बाद वे 60 घंटे पाकिस्तान की हिरासत में रहे, दबाव पड़ा तो पाकिस्तान ने रिहा कर दिया.

भारत के टीवी रियल्टी शो बिग बॉस सीजन-13 में भी पकिस्तान के लोगों की दिलचस्पी कायम है. यह दूसरे नम्बर पर रहा है. इसके साथ ही मोटू-पतलू गूगल की टॉप सर्च लिस्ट में आठवें नंबर पर रहे. गूगल की इस सूची में पिछले साल की तुलना में अधिक खोजे जाने वाले टॉपिक को शामिल किया गया है.

सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गूगल पर काफी सर्च किया जाता है. उन्होंने केदारनाथ फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री की है. इसके बाद सिम्बा फिल्म में सारा रणवीर सिंह के अपोजिट नजर आईं. सारा जल्द ही कुली नंबर 1 में नजर आएंगी. सारा पकिस्तान में सबसे अधिक सर्च की जाने वाली सूची में छठे नंबर पर हैं.

बॉलीवुड के सिंगर-कम्पोजर अदनान सामी ने 2015 में भारत की नागरिकता ली है. इसके पहले उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट था, वे समय-समय पर पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते रहे हैं. दोनों देशों के बीच जब तनाव होता है तो अदनान और उनके रुख पर नजर रहती है, पाकिस्तान की सर्च लिस्ट में सामी प्रमुख रहे हैं.

इसके साथ ही पाक की स्स्र्च में कबीर सिंह पांचवें और गली बॉय 10 वें नंबर पर रहा है.
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