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WhatsApp 31 दिसंबर से इन डिवाइसेस पर काम करना बंद कर देगा कहीं आपका फ़ोन भी तो नहीं इस लिस्ट में शामिल

हाल ही में  माइक्रोसॉफ्ट ने  खुलासा किया कि यह विंडोज फोन यानि ऑपरेटिंग सिस्टम चलाने वाले डिवाइसेस  पर  आगे कम नहीं करेगा , इस का सीधा असर ऑपरेटिंग सिस्टम के चाहने वालों पर पड़ेगा यानि उनके लिए एक किस्म से ये परेशान करने वाला होगा।


WhatsApp 31 दिसंबर से इन डिवाइसेस पर काम करना बंद कर देगा


साथ ही  व्हाट्सएप भी इस आने वाले समय में ऑपरेटिंग सिस्टम से अपना नाता तोड़ने की कह रहा है। चर्चा में है की  WhatsApp 31 दिसंबर 2019 से सभी विंडोज फोन पर काम करना बंद कर देगा।


हाल ही में, हुए इस खुलासे के बाद
अगर आप व्हाट्सएप यूज करना चाहते हैं तो  समझिये की  iOS 8 पर चलने वाले iOS डिवाइस या iPhones को  बदलने का समय आ गया है क्योंकि ऐसी सभी डिवाइस को व्हाट्सएप सपोर्ट देना बंद कर देगा। आगे से इनकी बजाय व्हाट्सएप को चलाने के लिए न्यूनतम iOS संस्करण iOS 9.0 या उससे अधिक की डिवाइसेस का होना जरुरी है।

WhatsApp 31 दिसंबर से  i phone
एक और खास बात
आपको बता दें की एंड्रॉइड भी इस स्नैप से सुरक्षित नहीं  है, इसके अनुसार एंड्रॉइड 2.3.7 पर चलने वाले एंड्रॉइड फोन भी व्हाट्सएप द्वारा समर्थित नहीं होंगे। इस OS का उपयोग करने वाले अधिक नए उपयोगकर्ताओं को अपने खातों को फिर से लॉगिन या पुनः सत्यापित करने के लिए भी नहीं मिला है।

यहाँ समझने वाली बात ये है की
यदि आप उपर दी की जानकारी के अनुसार इनमे से कोई आईओएस या एंड्रॉइड स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं, तो आपके पास इसे अपडेट करने के लिए 1 फरवरी, 2020 तक का समय है क्योंकि व्हाट्सएप उपरोक्त सभी डिवाइस पर कार्य करना बंद कर देगा।

हालाँकि, इसका ये मतलब बिलकुल भी नहीं है की आपको अपने फ़ोन को बदलना या फेंकना पड़ेगा और  नया फ़ोन लेना होगा बल्कि इसके अतिरिक्त आपके पास आपकी डिवाइस को अपडेट करना जरुरी यदि आपका फ़ोन इसे सपोर्ट करता है तो आप इसके लिए पात्र हैं, तो आप निश्चित रूप से अपने उपकरणों की जाँच करने का प्रयास कर सकते हैं।


WhatsApp 31 दिसंबर से इन डिवाइसेस पर काम करना बंद कर देगा कहीं आपका फ़ोन भी तो नहीं इस लिस्ट में शामिल

यदि आप एक एंड्रॉइड यूजर हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करना आपके लिए थोडा मुश्किल हो सकता है (इतने सारे ओईएम के कारण और अपडेट किए गए सॉफ़्टवेयर के लिए उनका समर्थन)। फिर भी आप अपने फ़ोन की सिस्टम सेटिंग्स> फोन के बारे में> अपडेट के लिए चेक कर सकते हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके डिवाइस में कोई अपडेट लंबित है या नहीं। अगर आप इसके पात्र हैं तो पहले से ही आपकी डिवाइस को व्हाट्सएप के निर्देशानुसार अपडेट करके रखें ताकि आप को परेशानी का सामना न करना पड़े।

ऐसे ही  यदि आप iOS यूजर  हैं, तो 
सेटिंग> सामान्य सेटिंग्स> सॉफ़्टवेयर अपडेट पर जाएं और वेब पर सुरक्षित रहते हुए व्हाट्सएप से डिस्कनेक्ट नहीं होने के लिए नवीनतम उपलब्ध ओएस पर अपडेट करें।



सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय |

सुभाष चन्द्र बोस का जन्म कब हुआ था और कहाँ हुआ था?
23 जनवरी 1897 को कटक (ओडिशा) शहर में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ। उनके पिता श्री जानकीनाथ बोस और माँ श्रीमती प्रभावती थे।

सुभाष जी के पिता जी शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी वकील थे फिर उन्होंने निजी अभ्यास शुरू कर दी थी।




उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक का काम किया और वे बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे थे। उन्हें रायबहादुर का खिताब भी अंग्रेजन द्वारा मिला।

सुभाष चन्द्र के नानाजी का नाम गंगा नारायण दत्त था। दत्त परिवार को कोलकाता का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। सुभाष चन्द्र बोस को मिला कर वे 6 बेटियां और 8 बेटे यानी कुल 14 संतानें थी। सुभाष चन्द्र जी 9 स्थान पर थे।

कहा जाता है कि सुभाष चन्द्र जी को अपने भाई शरद चन्द्र से सबसे अधिक लगाव था। शरद बाबु प्रभावती जी और जानकी नाथ के दूसरे बेटे थे। शरद बाबु की पत्नी का नाम विभावती था।

Information About Subhash Chandra Bose in Hindi – Education



सुभाष चन्द्र बोस की शिक्षा और आई.सी.एस. का सफर: प्राइमरी शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल से पूरी की और 1909 में उन्होंने रावेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला लिया। उन पर उनके प्रिंसिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का बहुत प्रभाव पड़ा। वह विवेकानंद जी के साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था।

सन् 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने पर भी दूसरी श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में बी० ए० (ऑनर्स) के छात्र थे। प्रेसिडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया।

सुभाष ने छात्रों का साथ दिया जिसकी वजह से उन्हें एक साल के लिए निकाल दिया और परीक्षा नहीं देने दी। उन्होंने बंगाली रेजिमेंट में भर्ती के लिए परीक्षा दी मगर आँखों के खराब होने की वजह से उन्हें मना कर दिया गया।



स्कॉटिश चर्च में कॉलेज में उन्होंने प्रवेश किया लेकिन मन नहीं माना क्योंकि मन केवल सेना में ही जाने का था।

जब उन्हें लगा की उनके पास कुछ समय शेष बचता है तो उन्होंने टेटोरियल नामक आर्मी में परीक्षा दी और उन्हें विलियम सेनालय में प्रवेश मिला| और फिर बी०ए० (आनर्स) में खूब मेहनत की और सन् 1919 में एक बी०ए० (आनर्स) की परीक्षा प्रथम आकर पास की| और साथ में कलकत्ता विश्वविद्यालय में उनका स्थान दूसरा था।

उनकी अब उम्र इतनी हो चुकी थी की वे केवल एक ही बार प्रयास करने पर ही आईसीएस बना जा सकता था.

उनके पिता जी की ख्वाहिश थी की वह आईसीएस बने और फिर क्या था सुभाष चन्द्र जी ने पिता से एक दिन का समय लिया। केवल ये सोचने के लिए की आईसीएस की परीक्षा देंगे या नही। इस चक्कर में वे पूरी रात सोये भी नहीं थे। अगले दिन उन्होंने सोच लिया की वे परीक्षा देंगे।

वे 15 सितम्बर 1919 को इंग्लॅण्ड चले गए। किसी वजह से उन्हें किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला फिर क्या था उन्होंने अलग रास्ता निकाला।



सुभाष जी ने किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक ज्ञान की ट्राईपास (ऑनर्स) की परीक्षा के लिए दाखिला लिया इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी| और फिर ट्राईपास (ऑनर्स) की आड़ में आईसीएस की तैयारी की और 1920 में उन्होंने वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण की।

स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविन्द घोष के आदर्शों और ज्ञान ने उन्हें अपने भाई शरत चन्द्र से बात करने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने एक पत्र अपने बड़े भाई शरत चन्द्र को लिखा जिसमें उन्होंने पूछा की मैं आईसीएस बन कर अंग्रेजों की सेवा नहीं कर सकता।


फिर उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई०एस० मांटेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र दिया। एक पत्र देशबंधु चित्तरंजन दस को लिखा।

उनके इस निर्णय में उनकी माता ने उनका साथ दिया उनकी माता को उन पर गर्व था| फिर सन् 1921 में ट्राईपास (ऑनर्स) की डिग्री ले कर अपने देश वापस लौटे।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस की भूमिका
भारत की आजादी में सुभाष चन्द्र जी का योगदान



सुभाष चन्द्र बोस ने ठान ली थी की वे भारत की आजादी के लिए कार्य करेंगे। वे कोलकाता के देशबंधु चित्तरंजन दास से प्रेरित हुए और उनके साथ काम करने के लीये इंग्लैंड से उन्होंने दिबबू को पत्र लिखा और साथ में काम करने के लिए अपनी इच्छा जताई।

कहा जाता है कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की सलाह के अनुसार ही सुभाष जी मुंबई गए और महात्मा गांधी जी से मिले।

सुभाष जी, महात्मा गांधी जी से 20 जुलाई 1921 को मिले और गांधी जी के कहने पर सुभाष जी कोलकाता जाकर दास बाबू से मिले।


असहयोग आन्दोलन का समय चल रहा था। दासबाबु और सुभाष जी इस आन्दोलन को बंगाल में देख रहे थे। दासबाबु ने सन् 1922 कांग्रेस के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की।

अंग्रेज सरकार का विरोध करने के लिए कोलकाता महापालिका का चुनाव स्वराज पार्टी ने विधानसभा के अन्दर से लड़ा और जीता।

फिर क्या था…

दासबाबू कोलकाता के महापौर बन गए और इस अधिकार से उन्होंने सुभाष चन्द्र को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बना दिया।

सुभाष चन्द्र ने सबसे पहले कोलकाता के सभी रास्तों के नाम ही बदल डाले और भारतीय नाम दे दिए| उन्होंने कोलकाता का रंगरूप ही बदल डाला।

सुभाष देश के महत्वपूर्ण युवा नेता बन चुके थे। स्वतंत्र भारत के लिए जिन लोगों ने जान दी थी उनके परिवार के लोगों को महापालिका में नौकरी मिलने लगी।



सुभाष जी की पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के साथ अच्छी बनती थी। उसी कारण सुभाष जी ने जवाहर लाल जी के साथ कांग्रेस के अंतर्गत युवकों की इंडिपेंडेंस लीग शुरू की।

सन् 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया था तब कांग्रेस के लोगों ने उसे काले झंडे दिखाए और कांग्रेस ने आठ लोगों की सदस्यता आयोग बनाया ताकि साइमन कमीशन को उसका जवाब दे सके, सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया.

उस आयोग में मोतीलाल नेहरु अध्यक्ष और सुभाष जी सदस्य थे।

आयोग ने नेहरु रिपोर्ट पेश की और और कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कोलकाता में हुआ| ये बात सन् 1928 में हुआ था, सुभाष चन्द्र जी ने खाकी कपडे पहन के मोतीलाल जी को सलामी दी थी।

इस अधिवेशन में गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से पूर्ण स्वराज की जगह डोमिनियन स्टेट्स मांगे।


सुभाष और जवाहर लाल जी तो पूर्ण स्वराज की मांग कर रहे थे| लेकिन गाँधी जी उनकी बात से सहमत नहीं थे.

आखिर में फैसला ये हुआ की गांधी जी ने अंग्रेज सरकार को 2 साल का वक्त दिया जिसमे डोमिनियन स्टेट्स वापस दे दिया जाए, मगर सुभाष और जवाहर लाल जी को गांधी जी का ये निर्णय अच्छा नहीं लगा और गांधी जी से 2 साल की वजह अंग्रेजी सरकार को 1 साल का वक्त देने को कहा।

निर्णय ये हुआ की अगर 1 साल में अंग्रेज सरकार ने डोमिनियन स्टेट्स नहीं दिए तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की मांग करेगी| लेकिन अंग्रेज सरकार के कानों के नीचे जूं भी नहीं रेंगा।


अंत में आकर सन् 1930 में जब कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन जवाहर लाल नेहरु की अध्यक्षता में लाहौर में हुआ तब ऐसा तय किया गया कि 26 जनवरी का दिन स्वतंत्रता का दिन मनाया जाएगा.

कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष बड़ी मात्रा में लोगों के साथ मोर्चा निकल रहे थे। 26 जनवरी 1931 की बात है ये उनके इस कारनामे से पुलिस ने उन पर लाठियां चलाई और उन्हें घायल कर जेल में भेज दिया.

गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सभी कैदियों को जेल से सुभाष चन्द्र सहित छुड़ा लिया और अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे बहादुर क्रांतिकारी को आजाद करने से मना कर दिया।

गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेज सरकार से बात की मगर नरमी के साथ सुभाष जी कभी नहीं चाहते थे की ऐसा हो उनका कहना था की गाँधी जी इस समझौते को तोड़ दे| मगर कहा जाता है की गाँधी जी अपने दिए हुए वचन को कभी नहीं तोड़ते थे।

अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह व उनके साथ काम करने वालों को फांसी दे दी और सुभाष चन्द्र जी के दिलों दिमाग में आग लगा दी उन्हें गांधी जी
और कांग्रेस के तरीके बिलकुल पसंद नहीं आये।

Netaji Subhash Chandra Bose Wikipedia in Hindi
कितनी बार कारावास जाना पड़ा सुभाष चन्द्र बोस को?


पूरे जीवन में सुभाष चन्द्र जी को करीब 11 बार कारावास हुआ| 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ।

गोपीनाथ साहा नाम के एक क्रांतिकारी ने सन् 1925 मे कोलकाता की पुलिस में अधिकारी चार्ल्स टेगार्ट को मारना चाहा मगर गलती से अर्नेस्ट डे नाम के व्यापारी को मार दिया| जिस वजह से गोपीनाथ को फांसी दे दी गयी।

इस खबर से सुभाष चन्द्र जी फूट फूट कर रोये और गोपीनाथ का मृत शरीर मांगकर अंतिम संस्कार किया।


सुभाष चन्द्र जी के इस कार्य से अंग्रेजी सरकार ने सोचा की सुभाष चन्द्र कहीं क्रांतिकारियों से मिला हुआ तो नहीं है या फिर क्रांतिकारियों को हमारे लिए भड़काता है।

किसी बहाने अंग्रेज सरकार ने सुभाष को गिरफ्तार किया और बिना किसी सबूत के बिना किसी मुकदमे के सुभाष चन्द्र को म्यांमार के मंडल कारागार में बंदी बनाकर डाल दिया।

चित्तरंजन दास 05 नवम्बर 1925 को कोलकाता में चल बसे| ये खबर रेडियो में सुभाष जी ने सुन ली थी।

कुछ दिन में सुभाष जी की तबियत ख़राब होने लगी थी उन्हें तपेदिक हो गया था| लेकिन अंग्रेजी सरकार ने उन्हें रिहा फिर भी नही किया था.

सरकार की शर्त थी की उन्हें रिहा जभी किया जायेगा जब वे इलाज के लिए यूरोप चले जाए, मगर सुभाष चन्द्र जी ने ये शर्त भी ठुकरा दी क्योंकि सरकार ने ये नहीं बात साफ़ नहीं की थी की सुभाष चन्द्र जी कब भारत वापस आ सकेंगे।

अब अंग्रेजी सरकार दुविधा में पड़ गई थी क्योंकि सरकार ये भी नहीं चाहती थी की सुभाष चन्द्र जी कारावास में ही खत्म हो जाए। इसलिए सरकार के रिहा करने पर सुभाष जी ने अपना इलाज डलहौजी में करवाया।

सन् 1930 में सुभाष कारावास में ही थे और चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुन लिया गया था| जिस कारण उन्हें रिहा कर दिया गया।

सन् 1932 में सुभाष जी को फिर कारावास हुआ और उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया, अल्मोड़ा जेल में उनकी तबियत फिर ख़राब हो गयी, चिकित्सकों की सालाह पर वे यूरोप चले गए।

Netaji Subhash Chandra Bose Biography in Hindi Language
यूरोप में रह कर देश भक्ति: सन् 1933-1936 सुभाष जी यूरोप में ही रहे| वहां वे इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सहायता करने का वादा किया।

आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे मित्र बन गए| उन दिनों जवाहर लाल जी की पत्नी कमला नेहरु का आस्ट्रिया में निधन हो गया, सुभाष जी ने जवाहर जी को वहां जा कर हिम्मत दी। बाद में विट्ठल भाई पटेल से भी मिले।

विठ्ठल भाई पटेल के साथ सुभाष ने मत्रना की जिसे पटेल व बोस की विश्लेषण के नाम से प्रसिद्धि मिली। उस वार्तालाप में उन दोनों ने गांधी जी की घोर निंदा की, यहाँ तक की विठ्ठल भाई पटेल के बीमार होने पर सुभाष जी ने उनकी सेवा भी की मगर विठ्ठल भाई पटेल जी का निधन हो गया।

विठ्ठल भाई पटेल ने अपनी सारी संपत्ति सुभाष जी के नाम कर दी और सरदार भाई पटेल जो विठ्ठल भाई पटेल छोटे भाई थे उन्होंने इस वसीयत को मना कर दिया और मुकदमा कर दिया।

मुकदमा सरदार भाई पटेल जीत गये और सारी संपत्ति गांधी जी के हरिजन समाज को सौंप दी।

सन् 1934 में सुभाष जी के पिता जी की मृत्यु हो गयी। जब उनके पिता जी मृत्युशय्या पर थे तब वे कराची से हवाई जहाज से कोलकाता लौट आये। मगर देर हो चुकी थी.

कोलकाता आये ही थे की उन्हें अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और करावास में डाल दिया और बाद में यूरोप वापस भेज दिया।

History of Subhash Chandra Bose in Hindi
History of Subhash Chandra Bose in Hindi



क्या आपको पता है कि प्रेम विवाह हुआ था सुभाष चंद्र जी का?

आस्ट्रिया में जब वे अपना इलाज करवा रहे थे तब उन्हें अपनी पुस्तक लिखने के लिए अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की जरूरत पड़ी।

उनकी मुलाकात अपने मित्र द्वारा एक महिला से हुई जिनका नाम एमिली शेंकल था। एमिली के पिता जी पशुओं के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। ये बात सन् 1934 की थी।

एमिली और सुभाष जी एक दूसरे की और आकर्षित हुए और प्रेम करने लगे। उन्होंने हिन्दू रीति रिवाज से सन् 1942 में विवाह कर लिया और उनकी एक पुत्री हुई।

सुभाष जी ने जब वो बच्ची चार सप्ताह की थी बस तभी देखा था और फिर अगस्त सन् 1945 में ताद्वान में उनकी विमान दुर्घटना हो गयी और उनकी मृत्यु हो गयी जब उनकी पुत्री अनीता पौने तीन साल की थी।

अनीता अभी जीवित है और अपने पिता के परिवार जानो से मिलने के लिए भारत आती रहती हैं।

हरीपूरा कांग्रेस का अध्यक्ष पद – Subhash Chandra Bose Essay in Hindi
सन् 1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरिपुरा में हुआ| कांग्रेस के 51वां अधिवेशन था इसलिए उनका स्वागत 51 बैलों द्वारा खींचे गए रथ से किया गया| इस अधिवेशन में उनका भाषण बहुत ही प्रभाव शाली था.

सन् 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया| सुभाष जी ने चीनी जनता की सहायता के लिए डा० द्वारकानाथ कोटिनस के साथ चिकित्सा दल भेजने के लिए निर्णय लिया.

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जापान से सहयोग लिया| कई लोगों का कहना था की सुभाष जी जापान की कठपुतली और फासिस्ट कहते थे| मगर ये सब बातें गलती थी.

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi
गांधी जी की जिद की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा

सन् 1938 में गाँधी जी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाष को चुना था लेकिन सुभाष जी की कार्य पद्धति उन्हें पसंद नहीं आयी और द्वितीय विश्वयुद्ध के बादल छा गए थे.

सुभाष जी ने सोचा की क्यों न इंग्लॅण्ड की इस कठिनाई का फायदा उठा कर भारत का स्वतंत्रता संग्राम में तेजी लाइ जाए| परन्तु गाँधी जी इस से सहमत नहीं हुए.

सन् 1939 में जब दुबारा अध्यक्ष चुनने का वक्त आया तब सुभाष जी चाहते थे की कोई ऐसा इंसान अध्यक्ष पद पर बैठे जो किसी बात पर दबाव न बर्दाश्त करें और मानवजाति का कल्याण करें.

जब ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया तो उन्होंने दुबारा अध्यक्ष बनने का प्रताव रखा तो गाँधी जी ने मना कर दिया.

दुबारा अध्यक्ष पद के लिए पट्टाभी सीतारामैय्या को चुना, मगर कवी रविन्द्रनाथ ठाकुर ने गाँधी जी को खत लिखा और कहा की अध्यक्ष पद के लिए सुभाष जी ही सही है.

प्रफुल्लचंद्र राय और मेघ्नाद्र जैसे महान वैज्ञानिक भी सुभाष की फिर अध्यक्ष के रूप मे देखना चाहते थे मगर गाँधी जी ने किसी की भी बात नहीं सुनी और कोई समझौता नहीं किया.

जब महात्मा गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या का साथ दिया और उधर सुभाष जी ने भी चुनाव में अपना नाम दे दिया|

चुनाव में सुभाष जी को 1580 मत और पट्टाभी सीतारामैय्या को 1377 मत प्राप्त हुए और सुभाष जी जीत गए| मगर गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या हार को अपनी हार बताया और अपने कांग्रेस के साथियों से कहा की अगर वे सुभाष जी के तौर तरीके से सहमत नहीं है तो वो कांग्रेस से हट सकते है.

इसके बाद कांग्रेस में 14 में से 12 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया| जवाहर लाल नेहरु तटस्थ बने और शरदबाबु सुभाष जी के साथ रहे.

सन् 1939 का वार्षिक अधिवेशन त्रिपुरी में हुआ| इस अधिवेशन के समय सुभाष जी को तेज बुखार हो गया और वो इतने बीमार थे की उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर अधिवेशन में लाया गया.

गाँधी जी और उनके साथी इस अधिवेशन में नहीं आये और इस अधिवेशन के बाद सुभाष जी ने समझौते के लिए बहुत कोशिश की मगर गाँधी जी ने उनकी एक न सुनी.

स्थिति ऐसी थी की वे कुछ नहीं कर सकते थे| आखिर में तंग आकर 29 अप्रैल 1939 को सुभाष जी ने इस्तीफा दे दिया.

नजराबंदी से पलायन : सुभाष चंद्र बोस की जीवनी
16 जनवरी 1941 को वे पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद जियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकले.

शरद बाबू के बड़े बेटे शिशिर ने उन्हें अपनी गाडी में कोलकाता से दूर गोमोह तक पहुँचाया| गोमोह रेलवे स्टेशन से फ्रंटियर मेल पकड़कर वे पेशावर पञ्च गए.

उन्हें पेशावर में फोरवर्ड ब्लॉक के एक सहकारी, मियां अकबर शाह मिले| मियां अकबर शाह ने उनकी मुलाकात, कीर्ति किसान पार्टी के भगतराम तलवार से करा दी.

भगतराम के साथ सुभाष जी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की और निकल गए| इस सफ़र में भगतराम तलवार रहमत खान नाम के पठान और सुभाष उनके गूंगे-बहरे चाचा जी बन गए| पहाड़ियों में पैदल चल कर सफ़र पूरा किया.

सुभाष जी काबुल में उत्तमचंद मल्होत्रा एक भारतीय व्यापारी के घर दो महिने रहे| वहां उन्होंने पहले रुसी दूतावास में प्रवेश पाना चाहा| इसमें सफलता नहीं मिली तब उन्होने जर्मन और इटालियन दूतावासों में प्रवेश पाने की कोशिश की| इटालियन दूतावास में उनकी कोशिश सफल रही.

जर्मन और इतालियन के दुतावसों ने उनकी मदद की| अंत में आरलैंड मैजोन्टा नामक इटालियन व्यक्ति के साथ सुभाष काबुल से निकल कर रूस की राजधानी मास्को होते हुए जर्मनी राजधानी बर्लिन पहुचे.

हिटलर से मुलाकात – Story About Netaji Subhash Chandra Bose and Hitler
सुभाष बर्लिन में कई नेताओं के साथ मिले उन्होंने जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता संघठन और आजाद हिन्द रेडियो की स्थापना की|

इसी दौरान सुभाष नेताजी के नाम से भी मशहूर हो गए| जर्मन के एक मंत्री एडम फॉन सुभाष जी के अच्छे मित्र बन गए.

29 मई 1942 के दिन, सुभाष जर्मनी के सर्वोच्च नेता एडोल्फ हिटलर से मिले| लेकिन हिटलर को भारत के विषय में विशेष रूचि नहीं थी| उन्होने सुभाष की मदद को कोई पक्का वादा नहीं किया.

हिटलर ने कई साल पहले माईन काम्फ़ नामक आत्मचित्र लिखा था.

इस किताब मैं उन्होंने भारत और भारतीय लोगों की बुराई की थी| इस विषय पर सुभाष ने हिटलर से अपनी नाराजगी दिखाई, हिटलर ने फिर माफ़ी मांगी और माईन काम्फ़ के अगले संस्करण में वह परिच्छेद निकालने का वादा किया.

अंत में सुभाष को पता लगा की हिटलर और जर्मनी से किये वादे झुटे निकले इसलिए 8 मार्च 1943 को जर्मनी के कील बंदरगाह में वे अपने साथी आबिद हसन सफरानी के साथ एक जर्मन पनडुब्बी में बैठकर पर्वी एशिया की और निकल दिए.

वह जर्मनी पनडुब्बी उन्हें हिन्द महासागर में मैडागास्कर के किनारे तक लेकर गयी| फिर वहां दोनों ने समुद्र में तैरकर जापानी पनडुब्बी तक पहुचे.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान किन्ही भी दो देशों की नौसेनाओं की पनडुब्बियों के द्वारा नागरिकों की यह एक मात्र अदला-बदली हुई थी, वो जापनी पनडुब्बी उन्हें इंडोनेशिया के पादांग बंदरगाह तक पहुचाकर आई.

सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु कैसे हुई?
सुभाष चन्द्र जी की मृत्यु का कारण क्या था

जापान द्वितीय विश्वयुद्ध में हार गया, सुभाष जी को नया रास्ता निकलना जरुरी था। उन्होंने रूस से मदद मांगने की सोच रखी और 18 अगस्त 1945 को नेताजी हवाई जहाज से मचुरिया की तरफ जा रहे थे| इस सफ़र के दौरान वे लापता हो गए| इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए.

23 अगस्त 1945 को रेडियो ने बताया कि सैगोन में नेताजी एक बड़े बमवर्षक वीमान से आ रहे थे की 18 अगस्त को जापान के ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटीत हो गए.

विमान में उनके साथ सवार जापानी जनरल शोदाई पाईलेट और कुछ अन्य लोग मारे गए| नेताजी गंभीर रूप से जल गए थे.

वहां जापान में अस्पताल में ले जाया गया और जहाँ उन्हें मृत घोषीत कर दिया गया और उनका अंतिम संस्कार भी वही कर दिया गया.

सितम्बर में उनकी अस्थियों को इकठ्ठा करके जापान की राजधानी टोकियो के रैकाजी मंदिर में रख दी गयी| भारतीय लेखागार ने सुभाष जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में रात्रि 09:00 बजे हुई थी.

आजदी के बाद भारत सरकार ने इस घटना की जांच करने के लिए सन् 1956 और 1977 में दो बार जांच आयोग नियुक्त किया गया पर दोनों बार ये साबित हुआ की दुर्घटना में ही सुभाष जी की मृत्यु हुई थी.

सन् 1999 में मनोज कुमार मुखर्जी के नेतृत्व में तीसरा आयोग बनाया गया| 2005 में ताइवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बता दिया की ताइवान की भूमि पर उस दिन कोई जहाज दुर्घटना हुई ही नहीं थी| मुखर्जी आयोग रिपोर्ट पेश की जिसमे सुभाष जी की मृत्यु का कोई साबुत पाया नहीं गया.

लेकिन भारत के सरकार ने मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया.

आज तक ये रहस्य ही बना हुआ है की आखिर सुभाष जी की मृत्यु कैसे हुई थी (Subhash Chandra Bose Death) और अभी 2018 से करीब एक दो साल पहले न्यूज रिपोर्ट द्वारा ये बात सामने आई थी की सुभाष जी कुछ साल बाद भी जिन्दा थे और वेश बदल कर जी रहे थे.

फैजाबाद के गुमनामी बाबा से लेकर छतिसगढ राज्य में जिला रायगढ तक में नेताजी के होने को लेकर कई दावे किये गए लेकिन कोई साबुत सामने नहीं आया.

Subhash Chandra Bose Poem in Hindi
सुभाष चंद्र बोस पर कविता

है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं
अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं

यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है
जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जयहिन्द निशानी है
प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था
पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था

यह वीर चक्रवर्ती होगा , या त्यागी होगा सन्यासी
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग-युग तक भारतवासी
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था

बाँधे जाते इंसान,कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं
काया ज़रूर बाँधी जाती,बाँधे न इरादे जाते हैं
वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था,जो मौका पाकर निकल गया
वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया

जिस तरह धूर्त दुर्योधन से,बचकर यदुनन्दन आए थे
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के,पहरेदार छकाए थे
बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा , तोते-सा बेदाग़ गया।
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया

वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है
हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है

साभार - कविताकोश
Netaji Subhash Chandra Bose Motivational Thoughts in Hindi
प्रिय देशवासियों सुभाष चन्द्र बोस के बारे में पूरी दुनिया अच्छे से जानते है और उनके द्वारा बोली गयी कुछ लाइंस नीचे लिखी गयी है। आपको सुभाष चन्द्र बोस की जानकारी भी इस लेख में मिल जाएगी।

स्वतंत्रता की लड़ाई में सुभाष चन्द्र जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है और उनकी सोच जिसने उन्हे सबसे अलग बनाया है। भारत की आजादी में सुभाष चंद्र बोस ने अपने साईंकोन को बहुत प्रेरित किया और उनके दिशा निर्देश पर लोगों ने अपने कदम रखे।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi: ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा !’ यह कहना था भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी “नेताजी सुभाष चन्द्र बोस” का।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की और देश में राज्य कर रहे अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, जिसने भारत को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा दिया गया “जय हिन्द जय भारत का नारा” भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi
“एक सच्चे सैनिक को सैन्य प्रशिक्षण और आध्यात्मिक प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है।”

“राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों ; सत्यम् , शिवम्, सुन्दरम् से प्रेरित है।”

“मेरे पास एक लक्ष्य है जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना हैं। मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ! मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है।”

“अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है।”

“अपने पूरे जीवन में मैंने कभी खुशामद नहीं की है। दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनमोल वचन
“जीवन की अनिश्चितता से मैं जरा भी नहीं घबराता।”

“आज हमारे पास एक इच्छा होनी चाहिए ‘मरने की इच्छा’, क्योंकि मेरा देश जी सके – एक शहीद की मौत का सामना करने की शक्ति, क्योंकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीद के खून से प्रशस्त हो सके।”

“जब आज़ाद हिंद फौज खड़ी होती हैं तो वो ग्रेनाइट की दीवार की तरह होती हैं ; जब आज़ाद हिंद फौज मार्च करती है तो स्टीमर की तरह होती हैं।”

“भविष्य अब भी मेरे हाथ में है।”

“राजनीतिक सौदेबाजी का एक रहस्य यह भी है जो आप वास्तव में हैं उससे अधिक मजबूत दिखते हैं।”

Netaji Subhash Chandra Bose Speech in Hindi
“अजेय (कभी न मरने वाले) हैं वो सैनिक जो हमेशा अपने राष्ट्र के प्रति वफादार रहते हैं, जो हमेशा अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं।” – सुभाष चंद्र बोस के विचार

“मैंने अपने अनुभवों से सीखा है ; जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती।” – सुभाष चंद्र बोस के नारे

“इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।” – Subhash Chandra Bose Slogan in Hindi

“एक व्यक्ति एक विचार के लिए मर सकता है, लेकिन वह विचार उसकी मृत्यु के बाद, एक हजार जीवन में खुद को अवतार लेगा।”

“यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का भुगतान अपने रक्त से करें। आपके बलिदान और परिश्रम के माध्यम से हम जो स्वतंत्रता जीतेंगे, हम अपनी शक्ति के साथ संरक्षित करने में सक्षम होंगे।”

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi in 500 Words
“अच्छे चरित्र निर्माण करना ही छात्रों का मुख्य कर्तव्य होना चाहियें।”

“मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है।”

“माँ का प्यार स्वार्थ रहित और होता सबसे गहरा होता है ! इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।”

“हमारा कार्य केवल कर्म करना हैं ! कर्म ही हमारा कर्तव्य है ! फल देने वाला स्वामी ऊपर वाला है।”

“संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले मुझमे नहीं था।”

“जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।”

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दसवीं क्लास के बाद क्या करें

2020 में दसवीं क्लास के बाद करियर ऑप्शंस
दसवीं क्लास के बाद क्या करें, दसवीं के बाद करियर विकल्प, 10th class ke bad kya kare
‘दसवीं क्लास की परीक्षा के बाद क्या करें, किस स्ट्रीम का चुनाव करें, क्या मुझे किसी प्रोफेशनल कोर्स का चयन करना चाहिए या फिर ट्रेडिशनल विकल्पों की तरफ ही अपने आप को केन्द्रित करना चाहिए आदि कुछ ऐसे सवाल हैं जो लगभग हर दसवीं पास या दसवीं की पढ़ाई कर रहे छात्रों के दिमाग में उठते हैं और इससे वे बेवजह परेशान रहते हैं. वस्तुतः इन प्रश्नों के उत्तर का सीधा सीधा सम्बन्ध भविष्य में उनके अध्ययन तथा प्रोफेशन से होता है. इनका मुख्य फोकस इन्हीं दो बातों पर होता है. इस लिए इस दौरान ऐसे प्रश्नों के विषय में सोंचकर परेशान होना स्वाभाविक है.



यह जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय क्यों है ?
दसवीं के बाद कुछ भी करने का निर्णय छात्रोंन के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है. इस समय वे एक ऐसी राह पर खड़े होते हैं जहाँ आपको एक निर्णय लेना है जो आपके जीवन को सुखी और समृद्ध बना सके. यदि आप करियर से जुड़े इस निर्णय को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तथा कहीं न कहीं आपके मन में किसी तरह का संदेह हो,तो इस सम्बन्ध में निर्णय लेना काफी मुश्किल हो जाता है.साथ ही इस दौरान अगर आपने कोई गलत निर्णय ले लिया तो उसका परिणाम आपको जीवन भर भुगतना पड़ेगा.

आगे कुछ ऐसे सुझाव प्रस्तुत किये गए हैं जिसकी मदद से आप भविष्य में एक सही निर्णय ले सकते हैं.    

सही डिसीजन (निर्णय) लेने की क्षमता का विकास - किसी भी काम की सफलता के पीछे मुख्यतः सही समय पर लिए गए सही निर्णय की ही अहम भूमिका होती है. इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने सीनियर्स, टीचर्स या माता-पिता तथा अभिभावकों की राय अवश्य लेनी चाहिए.इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि यह बात सही है कि इस निर्णय का प्रभाव दूरगामी होता है लेकिन यह आपके जीवन का आखिरी निर्णय नहीं होता है. वस्तुतः निर्णय लेने की क्षमता जैसी क्वालिटी की डिमांड जॉब मार्केट में बहुत ज्यादा होती है. आप चाहे किसी भी क्षेत्र में जाएं हर जगह आपके इस क्वालिटी की परख की जाती है और इसी पर आपका करियर कुछ हद तक डिपेंड करता है. इसलिए दसवीं के बाद आप सही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं जिससे आपके तार्किक क्षमता का विकास होता है और इसी दौरान आप जीवन से जुड़े पहलुओं पर गौर करना सीखते हैं.

इससे आपको अपने अनुसार चयन करने की स्वतन्त्रता मिलती है - अभी तक आपसे जुड़े हर चीज का निर्णय आपके माता पिता या अभिभावकों द्वारा लिया जाता है लेकिन दसवीं के बाद आप अपने करियर से जुड़े ऑप्शंस को चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं. इसलिए दसवीं के बाद मुझे क्या करना है ? इस महत्वपूर्ण निर्णय को अब आपको ही लेना होता है. हो सकता है कि बहुत सारे करियर विकल्पों की उपस्थिति में आप थोड़ा बहुत कन्फ्यूज हो जाएं लेकिन अत्यधिक सूक्ष्म परीक्षण और डिस्कशन के बाद आप सशक्तता पूर्वक अपने लिए फायदेमंद और तार्किक रूप से संगत करियर विकल्प का चयन अपने लिए कर सकते हैं.

आप को किन किन स्ट्रीम्स का चयन करना चाहिए ?-
दसवीं के बाद सबसे कठिन निर्णय होता है स्ट्रीम का चुनाव करना. सही स्ट्रीम का चुनाव करना बहुत जरुरी है.कारण कि भविष्य के सभी निर्णय मुख्यतः आपके इसी निर्णय पर अवलंबित होते हैं.

किस विषय का चुनाव स्टूडेंट्स को करना चाहिए ?- कभी कभी स्टूडेंट्स अपने जीवन हर्ड मेंटालिटी ( झुण्ड मानसिकता) के दबाव में आकर उस स्ट्रीम का चुनाव कर लेते हैं जो उनकी रुची तथा क्षमता के बिलकुल विपरीत होते हैं लेकिन चूँकि उनके मित्र या जानकार भी इसे ही चुने हैं,इसलिए वे भी ऐसा करते हैं.लेकिन यह एक गलत प्रैक्टिस है और इसके परिणाम आपके लिए भयावह हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अपनी रुचि,योग्यता और क्षमता के अनुरूप ही किसी स्ट्रीम का चयन करें ताकि आप बेहतर रीजल्ट पा सकें. इसलिए सही स्ट्रीम के चयन में आपकी मदद हेतु दसवीं के बाद उपलब्ध कुछ महत्वपूर्ण स्ट्रीम्स का वर्णन आगे कर रहे हैं --

साइंस

सामान्यतः सबका पसंदीदा विषय – विज्ञानं अधिकांश स्टूडेंट्स का पसंदीदा विषय होता है और लगभग हर माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा विज्ञान विषय से ही पढ़ाई करे. यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे कई आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करती है और विभिन्न डोमेनों में शोध करने का अवसर भी प्रदान करती है. दसवीं के बाद विज्ञान विषय चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लेने के बाद आगे चलकर वे आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन ले सकते हैं. इसके विपरीत अगर आपने 12 वीं तथा ग्रेजुएशन आर्ट्स या कॉमर्स से की है तो आप भविष्य में साइंस नहीं ले सकते हैं जबकि साइंस स्ट्रीम वाले पुनः किसी भी स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं.

जहां तक ​​ कक्षा 11 वीं और 12 वीं का सवाल है,तो आपको कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे आधारभूत विषयों का चयन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स द्वारा चुने गए इंस्ट्रक्शन के भाषा के आधार पर उन्हें एक अनिवार्य भाषा का भी चुनाव करना होगा. साथ ही क्लास में थियरी की पढ़ाई के अतिरिक्त लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल भी करना होगा.

यदि आप इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पीसीएम या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित को मूल विषयों के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन आगर आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं तो  आप पीसीएमबी या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित + जीवविज्ञान ले सकते हैं.

कॉमर्स

बिजनेस के लिए सर्वश्रेष्ठ - साइंस के बाद स्टूडेंट्स द्वारा सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीम है कॉमर्स. यदि स्टैटिक्स, फायनांस या इकोनॉमिक्स के फील्ड में जाना चाहते हैं तो आपको इस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा. अगर करियर की बात की जाय तो कॉमर्स स्ट्रीम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी, एकाउंटेंट्स, निवेश बैंकिंग और वित्तीय सलाहकार जैसे कुछ सबसे अधिक आकर्षक और उच्च भुगतान वाली नौकरियों में जाया जा सकता है हालांकि, इसकेलिए कक्षा 12 के बाद इन संबंधित डोमेन में प्रोफेशनल कोर्सेज का चयन करना होगा.

कॉमर्स स्टूडेंट्स के रूप में आपको बिजनेस इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और बिजनेस लॉ आदि मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स को कॉमर्स स्ट्रीम के एक हिस्से के रूप में अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, इनकम टैक्स, मार्केटिंग और जेनरल बिजनेस इकोनोमिक्स में आधारभूत प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. साइंस के स्टूडेंट्स की तरह ही इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा का चयन करना होता है.

आर्ट्स/कला / मानविकी

अवसर गैलरी - आर्ट्स आज भी स्टूडेंट्स का बीच बहुत काम पसंद किया जाने वाला विषय है जबकि इस क्षेत्र में अवसरों की भरमार है. लेकिन आजकल इस विषय को लेकर लोगों की धारणा बदली है तथा अधिकतर स्टूडेंट्स आर्ट्स विषय लेना पसंद कर रहे हैं. यह कुछ रोचक ऑफ-बीट और रोमांचक कैरियर के अवसर प्रदान कर रही है. पहले आर्ट्स विषय को उन्हीं स्टूडेंट्स के लिए सही माना जाता था जो आगे चलकर शोध में दिलचस्पी रखते थें लेकिन अब यह धारणा बिलकुल बदल चुकी है. आजकल आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास अन्य स्ट्रीम की भांति ही आकर्षक और संतोषजनक करियर विकल्प मौजूद हैं. एक आर्ट्स का स्टूडेंट जर्नलिज्म, लिटरेचर, सोशल वर्क, एजुकेशन और कई अन्य करियर विकल्पों का चयन कर सकता है.

जहां तक ​​विषयों का संबंध है, तो आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास विभिन्न प्रकार के विषयों के चयन का विकल्प होता है  जिनमें से समाजशास्त्र, इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र इत्यादि विषय शामिल हैं. इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा विकल्प का चयन करना पड़ता है.

इसके अतरिक्त कुछ अन्य बातें -पिछले दशक में  भारत के शिक्षा क्षेत्र में बहुत विविधता देखने को मिली है, इसकी वजह से दसवी के बाद कई सुनहरे करियर विकल्प मौजूद हैं. कई ऐसे कई शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और यहां तक ​​कि कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी हैं जिन्हें आप अपनी दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद चुन सकते हैं. एक दसवीं के छात्र होने के नाते यह हो सकता है कि आपको भविष्य में मिलने वाले सभी अवसरों तथा उसके अंतर्गत आने वाली चुनौतियों का सही ज्ञान न हो, तो ऐसी परिस्थिति में किसी काउंसेलर की मदद लें.

निर्णय लेने के दौरान किन किन बातों पर गौर करना चाहिए?-
अब आपको प्रत्येक विषय तथा स्ट्रीम्स की जानकारी हो चुकी है तो अब आपके लिए कौन सा स्ट्रीम तथा विषय आपके लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है यह निर्णय लेने का समय होता है. लेकिन अभी भी यदि आप निर्णय लेने में अपने आप को समर्थ नहीं पा रहे हैं तो आप को घबड़ाने की जरुरत नहीं है. कभी भी जीवन से सम्बंधित ऐसे निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए. इस प्रक्रिया को आपके लिए थोड़ा और सरल बनाने के उद्देश्य से यहाँ कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं जिनका पालन आपको करना चाहिए-

अपनी रुचियों और जुनून का आकलन करें

अक्सर हम देखते हैं कि बहुत सारे प्रोफेशनल्स अनचाहे मन से काम करते हैं तथा अपने काम में दैनिक रूप से पीसते हुए नजर आते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि आप ऐसा बिलकुल नहीं चाहेंगे. जीवन में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हमेशा अपनी रुचियों और जुनूनों  को ध्यान में रखना चाहिए.

और इस प्रक्रिया में आपका पहला कदम यह पहचाने का होना चाहिए कि कौन सा विषय या करियर विकल्प आपको उत्साहित करता है. आप जीवन भर उसके लिए कुछ कर सकते हैं और कभी भी इससे नाखुश और असंतुष्ट नहीं हो सकते,केवल तभी आप वास्तव में इसका आनंद उठा सकते हैं.इसलिए, चाहे आप कोई भी स्ट्रीम चुनते हों,  सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप इसके अंतर्गत कवर किए गए विषयों में दिलचस्पी रखते हैं या नहीं.

अपनी शक्तियों और कमजोरियों का विश्लेषण करें

अपनी रुचियों का आकलन करने के बाद,आपके लिए दूसरा कदम अपने स्किल्स और क्षमताओं का आकलन करना है. यदि आप केवल अपनी रुचि के आधार पर एक एक स्ट्रीम चुनते हैं लेकिन इसमें शामिल विषयों को समझने का सही स्किल  और क्षमता आपमें नहीं है, तो भविष्य में यह आपके लिए एक बड़ी समस्या पैदा करेगा. उदाहरण के लिए, आपकी रूचि प्राइमरी साइंस में हो सकती है लेकिन 12 वीं के स्तर पर पढ़ाए जाने वाले साइंस  विषय अधिक विस्तृत और कठिन लग सकते हैं. मानलीजिये आपका मौलिक अंकगणित बहुत अच्छा है लेकिन हो सकता है कि 12 वीं के पीसीएम में पढ़ाया जाने वाला मैथ आपको बहुत कठिन लगे. तो आप उन विषयों में बेहतर रीजल्ट नहीं दे पाएंगे. इसलिए हमेशा अपने स्किल्स और क्षमताओं का पूर्ण विश्लेषण करना चाहिए, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी स्ट्रीम का चयन करना चाहिए.

सही करियर विकल्प की पहचान करें

एक बार जब आप उन चीज़ों की पहचान करना शुरू करते हैं जिनके बारे में आप रुचि रखते हैं, तो बहुत सारे और विविध विकल्प आपके सामने होते हैं, जिनमें से सबका चयन करना सही निर्णय नहीं हो सकता है. उदाहरण के लिए मानलीजिये कि आपको पतंग उड़ाना बहुत पसंद है, लेकिन एक करियर विकल्प के रूप में इसका चयन करना शायद एक सही निर्णय नहीं हो सकता है.

इसलिए, आपको यह पहचानने की आवश्यकता है कि आपके कौन से इन्ट्रेस्ट क्षेत्र आपको अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिसमें आप एक स्थायी करियर बना सकते हैं. इसके लिए आप प्रोफेशनल करियर काउंसेलर की मदद ले सकते हैं. वे आपको अपने कौशल का विश्लेषण करने में मदद कर सकते हैं और सही करियर विकल्प चुनने में आपकी सहायता कर सकते हैं.

दूसरों की मदद लें

ऊपर के पहले तीन चरणों के बाद भी, यदि आपको अभी भी लगता है कि आप स्ट्रीम के चयन को लेकर भ्रमित और अनिश्चित हैं, तो आपको कक्षा 10 के बाद अपने माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर से सलाह लेनी चाहिए. आजकल मार्केट में कई अन्य करियर विकल्प और अवसर मौजूद हैं जो कक्षा 10 के बाद आपकी  प्रतीक्षा कर रहे हैं जिनका आप चयन कर सकते हैं. माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर आपको हमेशा सही सलाह देंगे तथा सही स्ट्रीम के चयन में आपकी भरपूर मदद करेंगे.

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना फॉर्म

 मातृत्व लाभ योजना
PMMVY Application Form 2020 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना फॉर्म.
 PMMVY Application Form Download Rs. 6000 Pregnancy Aid Scheme Registration 2020 गर्भावस्था सहायता योजना पंजीकरण आवेदन पत्र डाउनलोड Pradhan Mantri Matratva Vandana yojana

PMMVY Application Form 2020 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना फॉर्म.


गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रूपये का मातृत्व लाभ योजना :-
भारत दुनिया के उन देशों में से एक है, जहाँ मातृत्व मृत्यु दर बहुत अधिक है, और यह दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही है इसे रोकना बहुत जरुरी है. विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकीय (WHS) सन 2015 के अनुमान के अनुसार, भारत की MMR या मातृ मृत्यु दर हर 1 लाख जीवित जन्म में से 174 लोगों की मृत्यु पर आधारित है. हर 1,00,000 में से 174, यह देखने में बहुत ही कम संख्या लगती है, किन्तु उल्लेखनीय यह है कि दुनिया के विभिन्न अन्य देशों की तुलना में यह बहुत अधिक है तो सवाल यह उठता है कि -‘असल में मातृ मृत्यु दर है क्या?’ यह मृत्यु दर नवजात बच्चे की मौत की संख्या की गिनती नहीं है. बल्कि यह उन महिलाओं की मौत की संख्या की गिनती है, जोकि एक बच्चे को जन्म देने के दौरान होती हैं. गर्भावस्था के समय, बच्चे के जन्म के समय, या पोस्ट प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली मौत के कई कारण हो सकते है.

आम तौर पर गरीबों की शारीरिक हालत के साथ – साथ गर्भावस्था के समय शारीरिक तनाव और अधिक बढ़ जाता है. यह महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण है, साथ ही अनुचित गर्भावस्था प्रबंधन भी गर्भवती महिलाओं की मौत का कारण बन सकता है. गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बहुत ही सावधानी बरतने की जरुरत होती है. उनके खान – पान में भी बदलाव हो जाता है और उन्हें पोषित आहार लेने की आवश्यकता होती है ताकि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त पोषण प्राप्त हो सके. लेकिन गरीब परिवारों की महिलाएँ इन सभी सुविधाओं के लिए असमर्थ होती है क्योकि उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वे अपना और अपने बच्चे दोनों का गुजारा कर सकें|

इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश की गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है|

गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रूपये का मातृत्व लाभ योजना की विशेषतायें :-

गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रूपये के मातृत्व लाभ योजना की विशेषताएं इस प्रकार हैं-

भारत के चुने गए जिलों में सभी गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रूपये का वित्तीय लाभ देना है|
इस योजना के तहत भारत के 650 जिलों को जोड़ा जायेगा.
वित्तीय सहायता के लिए पैसे सीधे लाभ उठाने वाली गर्भवती महिलाओं के बैंक खातों में डाल दिए जायेंगे|
प्रदान किये जाने वाले पैसे गर्भावस्था से संबंधित कुछ विभिन्न खर्चों को कवर करने के लिए होंगे, जैसे कि टीकाकरण के लिए खर्च, अस्पतालों में प्रवेश के लिए खर्च, पोषक आहार की खरीद के लिए खर्च आदि और भी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाले खर्च हैं|

इस तरह की पहले की योजना :-

वर्तमान भारत सरकार के अनुसार मातृत्व मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिए यह नई योजना है, किन्तु राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार गर्भवती महिलाओं को लाभ पहुँचाने के लिए इस योजना में कुछ भी नया नहीं है. उन्होंने सन 2013 में पारित हुए, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में एक खंड में इसका उल्लेख किया है. यह 2005 में शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना और इंद्रा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना जैसे विभिन्न अन्य योजनाओं का भाग है. इसके अलावा सन 2010 में भारत सरकार ने पहले से ही पायलट प्रोजेक्ट का परिचालन बनाया है. इसे निम्न आधार पर बताया गया है|

इस योजना के पूर्व परिक्षण को लागू करने के लिए 53 जिलों को चुना गया.

शुरुआत में, लाभ प्राप्त करने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रस्ताव या वित्तीय सहायता 6000 रूपये के इरादे के बजाय 4000 रूपये की वित्तीय सहायता दी गई.

इसके तहत 2010 – 2011 और 2013 – 2014 के बीच लगभग 61,972 गर्भवती महिलाओं को लाभ दिया गया.

वर्ष 2020 में परेशानी से बचना चाहते हैं तो मे इन जरुरी तारीखों का रखें ध्यान

सबसे पहले आपको ढेर सारी शुभ कामनाओं के साथ नव वर्ष की बधाई , अब आते है नए वर्ष पर होने वाले कुछ विशेष कार्यों पर जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए वो कहते हैं न की कोई काम अगर हमे करना है तो उसकी तैयारी पहले से ही कर लेना अच्छा रहता है | आपका वर्ष 2020 बिना किसी विघ्‍न-बाधा के गुजरे इसी का ख्याल रखते हुए हम आपको कुछ जरूरी कामों की अंतिम तारीख एक बार याद दिलाना चाहते हैं जो आपके लिए महत्वपूर्ण भी है | इस पोस्ट में आपको ऐसे ही 10 कामों के बारे में बताने जा रहें है जिनकी आखरी तारीख कुछ इस प्रकार है |



फास्टैग लेने की अंतिम तारीख : 15 जनवरी

हाईवे से गुजरने वाले सभी वाहनों के ल‍िए फास्‍टैग जरूरी क‍िया गया है. 15 जनवरी के बाद ज‍िन वाहनों पर फास्टैग नहीं लगा होगा, उनसे दोगुना टोल वसूला जाएगा. पहले इसके ल‍िए आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी. इसे बढ़ाकर 15 जनवरी किया गया है.

सीनियर सिटीजंस के लिए पीएमवीवीवाई में निवेश : 31 मार्च
फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर ब्‍याज दरें लगातार घट रही हैं. इनके बीच प्रधानमंत्री वय वंदना योजना वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए एक और विकल्‍प है जिस पर वे विचार कर सकते हैं. यह बुजुर्गों के लिए उपलब्‍ध पेंशन स्‍कीम है. यह स्‍कीम 10 साल के लिए एक तय दर पर पेंशन के भुगतान की गारंटी देती है.

इसका रिटर्न 8-8.3 फीसदी की रेंज में है. यह निवेश के मोड निर्भर करता है. यह दर फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट के मुकाबले ज्‍यादा है. अभी एसबीआई सीनियर सिटीजंस को 10 साल की अवधि के फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर 6.75 फीसदी ब्‍याज दे रहा है.

स्‍कीम के तहत सीनियर सिटीजंस 15 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं. इस स्‍कीम में 31 मार्च तक निवेश किया जा सकता है.

बिलेटेड आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन : 31 मार्च
अगर वित्‍त वर्ष 2018-19 के लिए आपने अब तक आईटीआर फाइल नहीं किया है तो जरूरी है कि आप ऐसा 31 मार्च, 2020 तक कर दें. अगर बिलेटेड आईटीआर फाइल करने की यह मियाद आप चूक जाते हैं तो आप अपना आईटीआर तब तक फाइल नहीं कर पाएंगे जब तक इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट आपसे ऐसा करने के लिए नहीं कहता है.

याद रखें कि बिलेट‍ेड आईटीआर फाइल करने के लिए आपको 10,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी. हालांकि, अगर आप इसे 31 दिसंबर तक फाइल कर देते तो आपको 5,000 रुपये की लेट फीस देनी पड़ती.

सरकार को किराये पर टीडीएस जमा करने की अंतिम तारीख : टैक्‍स डिडक्‍शन की तारीख पर न‍िर्भर
अगर आप किराये के मकान में रहते हैं और महीने में 50,000 रुपये से ज्‍यादा का किराया देते हैं तो इस पर आपको टैक्‍स काटने की जरूरत है. आयकर कानून के अनुसार, ऐसे किरायेदार को वित्‍त वर्ष में एक बार कुल किराये पर 5 फीसदी की दर से टैक्‍स काटने की जरूरत है.

यह टैक्‍स घर खाली करते वक्‍त या वित्‍त वर्ष के अंत में काटा जा सकता है. जिस महीने ये काटा जाता है, उसके 30 दिनों के भीतर सरकार के पास टीडीएस को जमा करने की जरूरत पड़ती है. ऐसा नहीं करने पर पेनाल्‍टी और ब्‍याज लगता है.

टैक्‍स बचत से जुड़े निवेश : 31 मार्च
टैक्‍स बचत करने के लिए जरूरी है कि आप 31 मार्च से पहले टैक्‍स सेविंग इनवेस्‍टमेंट कर दें. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप टैक्‍स-सेविंग्‍स डिडक्‍शन क्‍लेम नहीं कर सकेंगे. नतीजतन आपको ज्‍यादा टैक्‍स देना पड़ेगा.

कंपनी को निवेश के सबूत जमा करने की मियाद : अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग
टैक्‍स बचत से जुड़ी एक और बात जो आपको ध्‍यान में रखने की जरूरत है वह यह है कि जरूरी दस्‍तावेजों को अपनी कंपनी को समय रहते जमा कर दें. इससे अतिरिक्‍त टीडीएस कटने से बच जाएगा. टैक्‍स बचत के लिए आपको निवेश के प्रूफ, रेंट एग्रीमेंट इत्‍यादि को जमा करने की जरूरत पड़ती है. हालांकि, याद रखें कि ऐसे दस्‍तावेजों को जमा करने की डेडलाइन अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग होती है.

कंपनी, बैंक से टीडीएस सर्टिफिकेट जुटाने की तारीख : 15 जून से जुटाना शुरू कर दें
आईटीआर फाइल करने में पहला स्‍टेप कंपनी और बैंक से टीडीएस सर्टिफिकेट हासिल कर लेना है. कंपनी को आपको फॉर्म 16 (टीडीएस सर्टिफिकेट) देने की जरूरत पड़ती है. इसमें वर्ष के दौरान दी गई सैलरी और काटे गए टैक्‍स का ब्‍योरा होता है.

इसी तरह बैंक भी फॉर्म 16 ए (टीडीएस सर्टिफिकेट) जारी करते हैं. यह ब्‍याज के 10,000 रुपये से ज्‍यादा होने पर काटे गए टैक्‍स के लिए जारी किया जाता है. सीनियर सिटीजंस के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये है.

बैंक और आपकी कंपनी 15 जून से आपको टीडीएस सर्टिफिकेट देती है. इसे हासिल करना नहीं भूलें.

आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन : 31 जुलाई
31 मार्च तक टैक्‍स सेविंग्‍स पूरी कर लेने के बाद अगला स्‍टेप अपना आईटीआर फाइल करने का है. आम करदाता और एचयूएफ के लिए आईटीआर फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है. अगर आप इस तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो आपको पेनाल्‍टी देनी होगी. डेडलाइन के बाद लेकिन 31 दिसंबर 2020 से प‍हले आप आटीआर फाइल करते हैं तो आपसे 5,000 रुपये की पेनाल्‍टी वसूली जाएगी.

जनवरी 2021 और मार्च 2021 के बीच आईटीआर फाइल करने पर पेनाल्‍टी की रकम 10,000 रुपये होगी. छोटे करदाता जिनकी इनकम 5 लाख रुपये से ज्‍यादा नहीं है, उनके लिए अधिकतम पेनाल्‍टी 1,000 रुपये है.

पैन से आधार को लिंक करने की अंतिम तारीख : 31 मार्च
पैन को आधार के साथ लिंक करने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 किया गया है. पहले इसकी समयसीमा 31 दिसंबर, 2019 थी. याद रखें अगर समय रहते पैन को आधार के साथ लिंक नहीं किया गया तो आपका पैन इनऑपरेटिव हो जाएगा.

होम लोन पर पीएमएवाई के तहत क्रेडिट सब्‍सिडी : 31 मार्च
मिडिल इनकम ग्रुप के लिए प्रधानमंत्री आवास (पीएमएवाई) योजना के तहत लाभ लेने के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च है. पीएमएवाई स्‍कीम के अनुसार, मिडिल इनकम ग्रुप I और II घर खरीदने पर क्रेडिट सब्सिडी हासिल कर सकते हैं. यह सब्सिडी कुछ शर्तों के साथ मिलती है.

स्‍कीम के तहत सालाना हाउसहोल्‍ड इनकम के आधार पर कैटेगरी को बांटा गया है. एमआईजी-I के लिए हाउसहोल्‍ड इनकम 6 लाख से 12 लाख रुपये के बीच रखी गई है. इस कैटेगरी के लिए चार फीसदी क्रेडिट सब्सिडी उपलब्‍ध है.

इसी तरह एमआईजी-II श्रेणी में वो आते हैं जिनकी हाउसहोल्‍ड इनकम 12 लाख से 18 लाख रुपये के बीच है. इन्‍हें तीन फीसदी की क्रेडिट सब्सिडी उपलब्‍ध है.

सावधान - इनका अगला निशाना आप भी हो सकते है ये है इनके ठगने के तरीके

प्रिय पाठक जैसा की आप जानते हैं परिवर्तन के इस दौर में सबकुच्छ बहुत तेजी से बदल रहा है | अब जमाना hi - tech  हो गया है | अब हर कोई स्मार्ट फोन रखता है हर किसी का बेंक में खता है साथ एटीएम आदि की सुविधाओं का लगभग सभी जानकर या कुछ जिन्हें इस बारे में पूर्ण ज्ञान भी नहीं आनन्द ले रहे हैं |

अब बात ये है की आप इन  सबको लेकर जागरूक कितने हैं  या कहें की आपको इनके बारे में कितनी जानकारी है ??
देखिये हर कोई सारी  बातों की जानकारी ये तो शायद मुश्किल हो लेकिन इस दौर आप जिस भी सुविधा का आनन्द लेना चाहें तो उससे जुडी जानकारी जरुरी समझकर आपको ले लेनी चाहिए |

आज हम आपके साथ कुछ जानकारी शेयर करेंगे जो शायद आपके या आपके किसी जानकर को फायदा पहुंचा सके --

सबसे पहले बात करते है फ़ोन की  तो कभी भी किसी अनजान नम्बर से मिस्काल आये तो जल्दबाजी में उस नम्बर पर फोन न करें पहले यह निश्चित कर ले ये नम्बर 
+91 से शुरू होता है जोकि भारत ( india ) का नेशनल कोड है | ये लोग आपको आर्थिक हानी पंहुचा सकते हैं 

कभी भी किसी लोटरी की सुचना पर भरोसा करने से पहले ये निच्शित करना न भूलें की आपने ऐसी किसी लोटरी में रूचि दिखाई भी थी या नहीं |

अपने स्मार्ट फोन में उल - जलूल एप्पस डाउनलोड न करें ये भी आपकी प्राइवेसी को लिक कर सकती हैं इसलिए हमेसा विस्वसनीय और जांची परखी एप्प का प्रयोग करें |

यदि आप whatsapp इस्तेमाल किसी अंजान ग्रुप को ज्वाइन न करें न ही किसी अंजन व्यक्ति को अपने ग्रुप में ऐड करें |
whatsapp पर आने वाले फ्री रिचार्ज के लिंकों से तो दूर ही रहें आजकल कुछ हैकर श्री नरेंद्र मोदी जी का नाम का इस्तेमाल भी लोगों को ठगने के लिए क्र रहें हैं इस तस्वीर में देखें 

अपनी email ID , एटीएम , व् अनन्य ऑनलाइन एकाउंट्स के पासवर्ड समय - समय पर नियमित रूप से बदलते रहें |

किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी बेंकिंग सम्बन्धी जानकारी जैसे पासवर्ड या एटीएम नम्बर , उसपर लिखे CVV नम्बर की जानकारी न दें चाहे वो कोई बेंक अधिकारी ही क्यों न हो | फोन पर तो इस बात का विशेष ध्यान रखें |

जानकारियां तो और भी बहोत सी है लेकिन पोस्ट को ज्यादा लम्बा न करने के उदेश्य से हमने वो ही बातें शेयर की है जो आजकल चलन पर है ये कुछ विशेष तरीके है जिनसे आपकी पर्सनल जानकारी हासिल करके ठगना आसन हो जाता है
तो सजग रहें सचेत रहें ओरों को भी सावधान करें बाकि हम आगे भी ऐसी जानकारियां आपसे साझा करते रहेंगे 
धन्यवाद 

आगर जीवन में इन्हें अपनाएंगे तो सफलता आपके क़दमों में होगी

1.खुद की कमाई से कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनाओ..!
2. दिन मे 3 लोगो की प्रशंसा करो..!
3. खुद की भुल स्वीकारने मेभी कभी संकोच मत करो..!
4. किसी के सपनो पर हँसो मत
5. आपके पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी कभी आगे जाने का मौका दो

6. रोज हो सके तो सुरज को उगता हुए देखे
7. खुब जरुरी हो तभी कोई चीज उधार लो
8. किसी के पास से कुछ जानना हो तो विवेक से दो बार...पुछो
9. कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दो
10. ईश्वर पर पुरा भरोस रखो..!


11. प्रार्थना करना कभी मत भुलो,प्रार्थना मे अपार शक्ति होती है..!
12. अपने काम से मतलब रखो..!
13. समय सबसे ज्यादा कीमती है, इसको फालतु कामो मेँ खर्च मत करो..
14. जो आपके पास है, उसी मेँ खुश रहना सिखो..!
15. बुराई कभी भी किसी कि भी मत करो, क्योकिँ बुराई नाव मेँछेद समान है,बुराई छोटी हो बडी नाव तो डुबो ही देती है..!

16. हमेशा सकारात्मक सोच रखो..!
17. हर व्यक्ति एक हुनर लेकर पैदा होता है बस उस हुनर को दुनिया के सामने लाओ.
18. कोई काम छोटा नही होता हर काम बडा होता है जैसे कि सोचो जो काम आप कर रहे हो अगर वह काम आप नही करते हो तो दुनिया पर क्या अस होता
19. सफलता उनको ही मिलती है जो कुछ करते है
20. कुछ पाने के लिए कुछ खोना नही बल्कि कुछ करना पडता है

पेड बूढा ही सही,
आंगन में रहनेदो,
फल न सही, छाव तो अवश्य देगा
ठीक उसी प्रकार
माता-पिता बूढे ही सही,
घर में ही रहने दो,
दोलत तो नहीं कमा सकते,
लेकीन आपके बच्चों को संस्कार अवश्य देगे ।।
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