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आज का राशिफल May 19, 2020

Today Horoscope in Hindi, May 19, 2020
दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित है। आज का राशिफल निकालते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है। हमारे इस दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों का भविष्यफल बताया जाता है।

इस राशिफल को पढ़कर आप अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे। आज का राशिफल में आपके लिए नौकरी, व्यापार, लेन-देन, परिवार और मित्रों के साथ संबंध, सेहत और दिन भर में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का भविष्यफल होता है।

Today Horoscope in Hindi, May 19, 2020


पढ़ें चंद्र राशि पर आधारित 19 मई 2020 का दैनिक राशिफल। सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन। किसको मिलेंगी खुशियां और किस राशि वालो को करना पड़ सकता है परेशानियों का सामना। अपनी राशि के अनुसार जानिए क्या कहता है आपका राशिफल।


मेष दैनिक राशिफल (Aries Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए सामान्य रूप से व्यतीत होगा। आपको अपने व्यवहार में कुछ हल्के-फुल्के बदलाव महसूस होंगे। आप ज्यादा सशक्त होकर काम को करना चाहेंगे लेकिन मानसिक परेशानी आपको रोक सकती है। किसी बात को लेकर आप कुछ समय से परेशान चल रहे हैं, उसे सबसे पहले हल करें ताकि इस से बाहर निकल पायें। काम के सिलसिले में अच्छे नतीजे आपके इंतजार में रहेंगे। इनकम बढ़ेगी और बैंक बैलेंस भी बढ़ सकता है। गृहस्थ जीवन खुशनुमा रहेगा। प्रेम जीवन में भी शुभ समाचार मिलेंगे।

वृष दैनिक राशिफल (Taurus Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। आपकी इनकम बढ़ेगी और आप हर काम को और भी अच्छे ढंग से करेंगे। सेहत मजबूत रहेगी जिससे आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। काम के सिलसिले में अच्छे नतीजे मिलेंगे। आपकी इच्छाशक्ति भी मजबूत होगी। आपके कार्य भार में बढ़ोतरी होगी। व्यापार भी लाभ देगा। गृहस्थ जीवन में रोमांस और प्यार के अवसर रहेंगे। एक दूसरे के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे। प्रेम जीवन बिताने वाले लोगों को अपने प्रिय की क्रिएटिविटी देखकर खुशी होगी और कुछ नया सोचेंगे जिससे भविष्य को सुंदर बनाया जा सके।

मिथुन दैनिक राशिफल (Gemini Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। अपने काम पर पूरा ध्यान देंगे। काम में मेहनत करके अपने आप को साबित करेंगे। खर्चों में बढ़ोतरी रहेगी। कुछ लोग विदेश जाने के बारे में विचार करेंगे और कुछ लोग जो पहले से विदेश में हैं उन्हें अपने देश लौटने का मौका मिलेगा। इनकम में बढ़ोतरी करने के लिए आप को और अधिक ध्यान से काम करना होगा। गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा। प्रेम जीवन बिता रहे लोगों को प्रिय का साथ मिलेगा और आपका रिश्ता खुशनुमा बनेगा।

कर्क दैनिक राशिफल (Cancer Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। आपको भाग्य का साथ मिलेगा जिससे आपके रुके हुए काम भी होंगे और आपकी स्थिति मजबूत होगी। इनकम में भी बढ़ोतरी होने से मन हर्षित होगा। प्रेम जीवन में खुशनुमा समय रहेगा और एक दूसरे के साथ खुशी भरे पल बिताएंगे। घंटों फोन पर बातचीत करेंगे और रिश्ते में दूरी का एहसास एक दूसरे को नहीं होने देंगे। गृहस्थ जीवन भी शांतिपूर्ण रहेगा। काम के सिलसिले में आपको कुछ निराशा का सामना करना पड़ सकता है परंतु मेहनत करना जारी रखें।

सिंह दैनिक राशिफल (Leo Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। कार्यों में बनते बनते रुकावट आ सकती है जिसके कारण आप थोड़े परेशान होंगे। मानसिक चिंताएं बढ़ेंगी लेकिन दिन ढलने से पहले ही आर्थिक स्थितियां परिवर्तित होंगी और कामों में सफलता मिलनी शुरू हो जाएगी। आपका आत्मविश्वास लौटेगा। काम के सिलसिले में सुखद नतीजे हासिल होंगे। आपका बॉस भी आपसे इंप्रेस रहेगा। पारिवारिक जिम्मेदारियों से आप मजबूत बनेंगे। गृहस्थ जीवन में उतार-चढ़ाव रहेगा। प्रेम जीवन बिता रहे लोगों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। बैंक लोन मिल सकता है।

कन्या दैनिक राशिफल (Virgo Daily Horoscope)
आपके लिए आज का दिन शानदार रहेगा। आप खुद के बर्ताव में बदलाव लाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। लोगों को अपना बनाने की कोशिश करेंगे। भाग्य का सितारा मजबूत रहेगा जिसके बलबूते आपको कामों में जबरदस्त सफलता मिलेगी। इनकम में भी बढ़ोतरी होगी और आपका काम जो अब तक रुका हुआ था वह फिर से चालू हो जाएगा। शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन आज शांतिपूर्ण रहेगा और जो लोग किसी प्रेम संबंध में हैं उन्हें अपने रिश्ते के अच्छे पलों का अनुभव होगा। कहीं रिश्ते की बात चल सकती है। सेहत मजबूत रहेगी।

तुला दैनिक राशिफल (Libra Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए थोड़ा कमजोर रहेगा। आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा और दिमाग से काम लेना होगा तभी काम बनेंगे। इनकम में गिरावट आ सकती है। खर्चों में बढ़ोतरी होगी। मानसिक तनाव बढ़ सकता है लेकिन इस सबके बावजूद पारिवारिक संतुष्टि और परिवार के लोगों का साथ आपके लिए मजबूती का आधार बनेगा। काम के सिलसिले में आपको काफी ध्यान से काम करना होगा। आपके विरोधी सक्रिय हो सकते हैं। गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा। प्रेम जीवन बिता रहे लोगों को आज शांति से काम लेना होगा। सेहत में गिरावट आ सकती है।

वृश्चिक दैनिक राशिफल (Scorpio Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए सामान्य रहेगा। आप अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित रहेंगे लेकिन चिंता करने की बात नहीं। आपको मेहनत करनी चाहिए और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। शादीशुदा लोगों को गृहस्थ जीवन का सुख मिलेगा। संतान से प्रेम बढ़ेगा। प्रेम जीवन बिता रहे लोगों को भी आज सुखद नतीजे मिलेंगे। काम के सिलसिले में आपका दिन शानदार रहेगा। बिजनेस में भी आज कुछ अच्छे समाचार सुनने को मिलेंगे। सेहत मजबूत रहेगी।

धनु दैनिक राशिफल (Sagittarius Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए काफी अच्छा रहेगा। आप अपनी जिम्मेदारियों के बीच प्राथमिकताएं निर्धारित करेंगे और उसी के अनुसार काम करेंगे। काम के सिलसिले में आप पूरी तरह से अनुशासित रहेंगे जिससे आपको अच्छे नतीजे मिलेंगे। पारिवारिक जीवन में समय बिताएंगे। जिम्मेदारियों को निभाएंगे जिससे परिवार वालों का स्नेह भी मिलेगा। शादीशुदा जीवन सामान्य रहेगा। विरोधियों से सतर्क रहना होगा। खर्चों में बढ़ोतरी होगी। प्रेम जीवन के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा।

मकर दैनिक राशिफल (Capricorn Daily Horoscope)
आप के लिये आज का दिन अच्छा रहेगा। आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा कामों में रिस्क लेंगे जिससे बिजनेस में सफलता मिल सकती है। नौकरी पेशा लोगों को अपने काम से कुछ निराशा हो सकती है और उन्हें लगेगा कि उन्हें अपनी मेहनत का सही फल नहीं मिल रहा जिससे वो थोड़े दुखी होंगे लेकिन हिम्मत न हारें और काम करते रहें। गृहस्थ जीवन शानदार रहेगा और अपने जीवनसाथी का सहयोग आपके हर काम में रहेगा जिससे आप मजबूत होंगे। प्रेम जीवन जी रहे लोगों को आज अपने प्रिय के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। सेहत मजबूत रहेगी।

कुंभ दैनिक राशिफल  (Aquarius Daily Horoscope)
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। आपकी इनकम भी बढ़ेगी और आपका मानसिक तनाव भी खत्म होगा। आप में आत्मविश्वास भरा दिखाई देगा जिससे आप किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटेंगे। कामों में सफलता मिलेगी। संपत्ति का लाभ होगा। पारिवारिक सुविधाओं का आनंद उठाएंगे। परिवार के लोगों का सानिध्य मिलेगा। इनकम में सामान्य रूप से बढ़ोतरी होगी। प्रेम जीवन खुशनुमा रहेगा। दांपत्य जीवन में थोड़ा तनाव आ सकता है। सेहत पर ध्यान देना होगा। हल्का बुखार परेशान कर सकता है।

मीन दैनिक राशिफल (Pisces Daily Horoscope)
आपके लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आप मन से प्रसन्न रहेंगे और दूसरों को खुशी देना चाहेंगे। भावुकता आपके अंदर होगी जिससे परिवार के प्रति जिम्मेदारियों का अहसास रहेगा। नौकरी में अच्छा प्रदर्शन करना आपकी फितरत में है, इसे और मजबूत बनाएं। इनकम बढ़ेगी। खर्चों में भी हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।गृहस्थ जीवन पूरी तरह से प्रेम पूर्ण रहेगा और जो लोग किसी प्रेम संबंध में हैं उन्हें अपने रिश्ते में सच्चाई का एहसास होगा जिससे रिश्ते में खूबसूरती आएगी।







भगवान् के आने में देर नहीं || आध्यात्मिक कहानियां

 "भगवान् के आने में देर नहीं"
श्रद्धा और विश्वासपूर्वक भगवान् को पुकारें तथा इतना आर्तभाव रहे जो भगवान् को द्रवित कर दे। और, उनकी कृपालुता पर परम विश्वास रहे। प्रार्थना करने मात्रकी देर है फिर उनके आने में देर नहीं है।
 भगवान् के आने में देर नहीं  || आध्यात्मिक कहानियां
एक दिन की बात है कि महामुनि दुर्वासा दुर्योधन के यहाँ गये। सत्कार-स्वागत हुआ। दुर्योधन ने मन में समझा कि ये हैं बड़े क्रोधी पर बड़े सीधे हैं, सरल हैं, बहुत भोले हैं और जो मुँह से कह दें वह करना पड़ता है ब्रह्मा को भी। यह इनकी ताकत है तो ऐसा उपाय करें कि पाण्डव इनके शाप के भागी बन जायें।
जिसका हृदय दुष्ट होता है उसके हृदय में इसी प्रकार की योजनाएँ आती हैं। दुष्ट व्यक्ति योजना बनाता है पर बनाता है अनिष्ट की अपनी भी और जगत् की भी। उसके द्वारा सुयोजना नहीं होती। दुर्योधन ने सोचा कि ये आ ही गये हैं और ऐसा कोई प्रयत्न करें कि इनके द्वारा अभिशप्त होकर-शाप पाकर पाण्डव मारे जायें तो न अपने को लड़ना पड़े और अपना निष्कण्टक राज्य भी हो जाय। आज ये आ गये हैं, काम बन गया।

 दुर्वासाजी भोजन करके जब आसनपर बैठे तब दुर्योधन ने हाथ-पैर दबाये, वे प्रसन्न हो गये। दुर्योधन ने कहा, महाराजजी ! एक हमारी प्रार्थना भी है। बोले-क्या ? उसने कहा-हमारे पाँच भाई और हैं। वे वन में रहते हैं और बड़े धर्मात्मा हैं। महाराज ! इतने बड़े धार्मिक हैं कि जगत में कोई है नहीं। 

आप एक बार जाकर उनकी कुटिया को भी पवित्र करें। बोले-हाँ, जायँगे। कहा-एक प्रार्थना और है महाराज ! सबेरे जायँगे तो उनके अग्निहोत्र में तथा उनके अन्य कामों में बाधा पड़ेगी। आप शाम को जाइयेगा। उन्होंने कहा-ठीक है शाम को ही जायँगे। सरल हृदय के दुर्वासाजी ने कह दिया जायँगे। उनके साथ चलता-फिरता विश्वविद्यालय था। 

पहले हमारे यहाँ गुरुकुल होते थे। चल गुरुकुल तथा अचल गुरुकुल। गुरुजी के साथ विशाल शिष्यसमूह चलता था। इसलिये वह चल गुरुकुल कहलाता था। अचल गुरुकुल भी थे जैसे सान्दीपनि-आश्रम। दुर्वासाजी के साथ थे दस हजार विद्यार्थी।
दुर्वासाजी शिष्यों के साथ युधिष्ठिर महाराज के पास अपराह्नकाल में पहुँचे। 

महाराज ! आइये, स्वागत है। पैर धोये, अर्घ्य दिया और आचमन कराया। महाराज, भोजन ? दुर्वासाजी बोले-अच्छा, हम नदीतट से संध्या करके आते हैं, शाम हो गयी है। तब आकर जीमेंगे। वे तो चले गये। इन्होंने पीछे से द्रौपदी को बुलाया। बोले-द्रौपदी ! क्या होगा ? द्रौपदी बोली–महाराज ! मैं तो भोजन कर चुकी। 

उसे सूर्य भगवान् का वरदान था कि जब तक पात्र का भोजन द्रौपदी नहीं खायेगी तब तक उसमें से भले लाखों आदमी आकर खा लें पात्र रहेगा अक्षय, किंतु जब द्रौपदी खा लेगी तो उस दिन पात्र में से और भोजन-सामग्री नहीं मिलेगी। द्रौपदी क्या करती कि सभी को भोजन कराने के बाद अतिथियों की, अभ्यागतों की तब तक बाट देखा करती, अपराह्न काल में बाहर खड़ी पुकारती कि कोई भूखा हो, किसी को अन्न चाहिये, वह आ जाय। जब दूर-दूरके लोग आ जाते, भोजन कर लेते, तब द्रौपदी भोजन करती। रोज वहाँ भण्डारा होता, एक दिन नहीं। दूर-दूरके लोग आते कि भई, वहाँ मिलेगा ही और मिलता ही था। किंतु आज तो द्रौपदी भोजन कर चुकी थी। बोली-महाराज! मैं तो भोजन कर चुकी। 

अब कोई सामान तो वहाँ है नहीं। धर्मराज ने कहा, अब क्या होगा ? द्रौपदी बोली-अब क्या होगा, डरते क्यों हैं आप ? मेरे श्रीकृष्ण कहाँ गये हैं। धर्मराज बोले-वह तो गये न द्वारका ! बोली-द्वारका नहीं गये। याद किया श्रीकृष्ण! बचाओ। बस, तैयार। मानो खड़े थे वहीं पर और आकर बोले-कृष्णा ! मुझे बड़ी भूख लगी है, कुछ खाने को हो तो दो। द्रौपदी बोली, भगवन् ! खाने को तो नहीं है। इसीलिये आपका स्मरण किया है। 

आज भोजन को लेकर ही बड़ा संकट आ गया है। भगवान् बोले कि देखो भई, विनोद का अवसर होता है, मैं तो भूखा खड़ा हूँ और तुम मुझसे विनोद करती हो। वह बोली-महाराज ! विनोद नहीं, सचमुच खाने को नहीं है। वे बोले-ला, अपनी बटलोई तो ला। द्रौपदी बटलोई ले आयी। भगवान् ने देखा एक पत्ता साग का, तुलसी का या किसी चीज का उसमें लगा था। भगवान् ने पत्ता उठाया और कहा- तू कहती है कि नहीं है। 

यह तो सारे विश्व को तृप्त करने के लिये पर्याप्त है; क्योंकि इससे तृप्त होंगे विश्वात्मा। सारे विश्व के आत्मा तृप्त हो जायें-विश्वात्मा, फिर क्या।
भगवान् ने उस साग का एक पत्ता खाया और खाकर कह दिया कि सारा विश्व तृप्त हो जाय। कहने भर की देर थी कि सारा विश्व संतृप्त हो गया। उधर दस हजार विद्यार्थियों सहित दुर्वासा मुनि नदी में सूर्योपस्थान कर रहे थे और उन्हें डकार आने लगी। सभी के पेट फूल गये और सब आपस में एक-दूसरे को देखने लगे। दुर्वासाजी ने कहा-अब यहाँ से भागो।
भगवान् के कहने पर जब भीमसेन और सहदेव दुर्वासाजी को बुलाने नदीतट पर गये तब उन्हें भीलों ने बताया कि महाराज ! वे तो एक दूसरे रास्ते से भाग गये। यह है सकाम भक्ति में भगवान् पर एकान्त विश्वास। सकाम भक्ति हो और निष्ठा यदि अनन्य हो तो वह अनन्य निष्ठा सकामता को नष्ट कर देती है और प्रेम दे देती है।
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"जय जय श्री राधे कृष्णा"

पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का ! जो हर काम पूरे करे सवाल का !!

ऋषि मार्कंड़य ने पूछा जभी !
दया करके ब्रह्माजी बोले तभी !!
के जो गुप्त मंत्र है संसार में ! हैं
सब शक्तियां जिसके अधिकार में !! हर
इक का कर सकता जो उपकार है ! जिसे
जपने से बेडा ही पार है !! पवित्र कवच
दुर्गा बलशाली का ! जो हर काम पूरे
करे सवाल का !!
पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का


 सुनो मार्कंड़य मैं
समझाता हूँ ! मैं नवदुर्गा के नाम
बतलाता हूँ !! कवच की मैं सुन्दर चोपाई
बना ! जो अत्यंत हैं गुप्त देयुं बता !! नव
दुर्गा का कवच यह, पढे जो मन चित
लाये ! उस पे किसी प्रकार का,
कभी कष्ट न आये !! कहो जय जय जय
महारानी की ! जय दुर्गा अष्ट
भवानी की !!

 पहली शैलपुत्री कहलावे !
दूसरी ब्रह्मचरिणी मन भावे !!
तीसरी चंद्रघंटा शुभ नाम !
चौथी कुश्मांड़ा सुखधाम !!
पांचवी देवी अस्कंद माता !
छटी कात्यायनी विख्याता !!
सातवी कालरात्रि महामाया !
आठवी महागौरी जग जाया !!
नौवी सिद्धिरात्रि जग जाने ! नव
दुर्गा के नाम बखाने !! महासंकट में बन में
रण में ! रुप होई उपजे निज तन में !!
महाविपत्ति में व्योवहार में ! मान
चाहे जो राज दरबार में !! शक्ति कवच
को सुने सुनाये ! मन कामना सिद्धी नर
पाए !! चामुंडा है प्रेत पर, वैष्णवी गरुड़
सवार ! बैल चढी महेश्वरी, हाथ लिए
हथियार !! कहो जय जय जय
महारानी की ! जय दुर्गा अष्ट
भवानी की !! हंस
सवारी वारही की ! मोर
चढी दुर्गा कुमारी !!
लक्ष्मी देवी कमल असीना ! ब्रह्मी हंस
चढी ले वीणा !! ईश्वरी सदा बैल
सवारी ! भक्तन की करती रखवारी !!
शंख चक्र शक्ति त्रिशुला ! हल मूसल कर
कमल के फ़ूला !! दैत्य नाश करने के कारन !
रुप अनेक किन्हें धारण !! बार बार मैं
सीस नवाऊं ! जगदम्बे के गुण को गाऊँ !!
कष्ट निवारण बलशाली माँ ! दुष्ट
संहारण महाकाली माँ !!
कोटी कोटी माता प्रणाम ! पूरण
की जो मेरे काम !!
दया करो बलशालिनी, दास के कष्ट
मिटाओ ! चमन की रक्षा को सदा,
सिंह चढी माँ आओ !! कहो जय जय जय
महारानी की ! जय दुर्गा अष्ट
भवानी की !! अग्नि से अग्नि देवता !
पूरब दिशा में येंदरी !! दक्षिण में
वाराही मेरी ! नैविधी में खडग
धारिणी !! वायु से माँ मृग वाहिनी !
पश्चिम में देवी वारुणी !! उत्तर में
माँ कौमारी जी! ईशान में शूल
धारिणी !! ब्रहामानी माता अर्श
पर ! माँ वैष्णवी इस फर्श पर !!
चामुंडा दसों दिशाओं में, हर कष्ट तुम
मेरा हरो ! संसार में माता मेरी,
रक्षा करो रक्षा करो !! सन्मुख मेरे
देवी जया ! पाछे हो माता विजैया !!
अजीता खड़ी बाएं मेरे !
अपराजिता दायें मेरे !!
नवज्योतिनी माँ शिवांगी !
माँ उमा देवी सिर की ही !!
मालाधारी ललाट की, और
भ्रुकुटी कि यशर्वथिनी ! भ्रुकुटी के
मध्य त्रेनेत्रायम्
घंटा दोनो नासिका !!
काली कपोलों की कर्ण,
मूलों की माता शंकरी ! नासिका में
अंश अपना, माँ सुगंधा तुम धरो !! संसार
में माता मेरी,
रक्षा करो रक्षा करो !! ऊपर वाणी के
होठों की ! माँ चन्द्रकी अमृत करी !!
जीभा की माता सरस्वती !
दांतों की कुमारी सती !! इस कठ
की माँ चंदिका ! और
चित्रघंटा घंटी की !!
कामाक्षी माँ ढ़ोढ़ी की !
माँ मंगला इस बनी की !!
ग्रीवा की भद्रकाली माँ ! रक्षा करे
बलशाली माँ !! दोनो भुजाओं की मेरे,
रक्षा करे धनु धारनी ! दो हाथों के सब
अंगों की, रक्षा करे जग तारनी !!
शुलेश्वरी, कुलेश्वरी, महादेवी शोक
विनाशानी ! जंघा स्तनों और
कन्धों की, रक्षा करे जग वासिनी !!
हृदय उदार और नाभि की, कटी भाग के
सब अंग की ! गुम्हेश्वरी माँ पूतना, जग
जननी श्यामा रंग की !! घुटनों जन्घाओं
की करे, रक्षा वो विंध्यवासिनी !
टकखनों व पावों की करे,
रक्षा वो शिव की दासनी !! रक्त
मांस और हड्डियों से, जो बना शरीर !
आतों और पित वात में, भरा अग्न और
नीर !! बल बुद्धि अंहकार और, प्राण ओ
पाप समान ! सत रज तम के गुणों में,
फँसी है यह जान !! धार अनेकों रुप ही,
रक्षा करियो आन ! तेरी कृपा से
ही माँ, चमन का है कल्याण !! आयु यश
और कीर्ति धन, सम्पति परिवार !
ब्रह्मणी और लक्ष्मी, पार्वती जग
तार !! विद्या दे माँ सरस्वती, सब
सुखों की मूल ! दुष्टों से रक्षा करो,
हाथ लिए त्रिशूल !भैरवी मेरी भार्या की,
रक्षा करो हमेश ! मान राज दरबार में,
देवें सदा नरेश !! यात्रा में दुःख कोई न,
मेरे सिर पर आये ! कवच तुम्हारा हर जगह,
मेरी करे सहाए !! है जग जननी कर दया,
इतना दो वरदान !
लिखा तुम्हारा कवच यह, पढे
जो निश्चय मान !! मन वांछित फल पाए
वो, मंगल मोड़ बसाए ! कवच
तुम्हारा पढ़ते ही, नवनिधि घर मे आये !!
ब्रह्माजी बोले सुनो मार्कंड़य ! यह
दुर्गा कवच मैंने तुमको सुनाया !!
रहा आज तक था गुप्त भेद सारा ! जगत
की भलाई को मैंने बताया !!
सभी शक्तियां जग की करके एकत्रित !
है मिट्टी की देह को इसे
जो पहनाया !! चमन जिसने श्रद्धा से
इसको पढ़ा जो ! सुना तो भी मुह
माँगा वरदान पाया !! जो संसार में
अपने मंगल को चाहे ! तो हरदम कवच
यही गाता चला जा !! बियाबान
जंगल दिशाओं दशों में ! तू शक्ति की जय
जय मनाता चला जा !! तू जल में तू थल में
तू अग्नि पवन में ! कवच पहन कर
मुस्कुराता चला जा !! निडर हो विचर
मन जहाँ तेरा चाहे ! चमन पाव आगे
बढ़ता चला जा !! तेरा मान धन धान्य
इससे बढेगा ! तू श्रद्धा से दुर्गा कवच
को जो गाए !! यही मंत्र यन्त्र
यही तंत्र तेरा ! यही तेरे सिर से हर संकट
हटायें !! यही भूत और प्रेत के भय
का नाशक ! यही कवच श्रद्धा व
भक्ति बढ़ाये !! इसे निसदिन श्रद्धा से
पढ़ कर ! जो चाहे तो मुह माँगा वरदान
पाए !! इस स्तुति के पाठ से पहले कवच
पढे ! कृपा से आधी भवानी की, बल और
बुद्धि बढे !! श्रद्धा से जपता रहे, जगदम्बे
का नाम ! सुख भोगे संसार में, अंत
मुक्ति सुखधाम !! कृपा करो मातेश्वरी,
बालक चमन नादाँ ! तेरे दर पर आ गिरा,
करो मैया कल्याण !! !! जय
माता दी !!

कौन है जो आज परेशान नहीं है! || लॉकडाउन

मेरे घर के सामने से इंडो नेपाल बॉर्डर तक जाने वाली NH28 निकलती है।
सावन के महीने में, कावड़ के त्यौहार में इस सड़क पर लाखों की भीड़ नंगे पांव उतरती है।
यह एक धार्मिक/सामाजिक उत्सव होता है जिसमें यही समाज, जिसे आज निष्ठुर कहा जा रहा है वही महाजन, सेठ, आम बाशिंदे उन नंगे पैर पैदल चलने वाले लोगों की सुविधा का खयाल रखने का प्रयास करते हैं।
जो आर्थिक रूप से सक्षम होते हैं वो सड़क पर दरियां बिछवा देते हैं, भंडारे चलाते हैं, शर्बत पिलवाते हैं, आराम करने के लिए गद्दे और पावों की चोट और दर्द के लिए दवा देते हैं।
जो आर्थिक रूप से असमर्थ होते है वो पैदल चलते, दौड़ते लोगों के पावों पर गुनगुना पानी फेंकते रहते हैं ताकि थकान उतर सके।


ऐसा करने वाले किसी एक नगर के वासी नहीं होते।
उस हाईवे के किनारे बसे लगभग हर ब्लॉक पर, हर दो तीन किलोमीटर पर, ऐसी व्यवस्था के साथ स्वतः तैनात लोग दिख जाएंगे।
यह इकलौता उदाहरण नहीं है।
लखनऊ में बड़े मंगल के भंडारे में, मुम्बई में गणपति पूजा में, बिहार में छठ में...हर जगह समाज का हिस्सा, दूसरे हिस्से को निःशुल्क, निःस्वार्थ सुविधा देने का प्रयास करता है।
इन्हें किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं होता।
आज उसी शहरी, कस्बाई समाज का हिस्सा सड़कों पर पैदल जाने वाले मजदूरों की वैसी ही युद्धस्तर पर मदद करता नहीं दिख पा रहा तो इसकी सबसे बड़ी वजह कोरोना का संक्रामक होना है।
फिर भी लोग जितना बन पड़ रहा है...कर रहे हैं।
सड़क पर सिर्फ मजदूर नहीं, वो भी हैं जो राह आसान करने की कोशिश कर रहे।
इसमें सरकार और समाज दोनों शामिल हैं।
फिर भी ऐसा घनघोर क्रिटिसिज्म !
क्या हमें गरीबी को एक खास तरह से रोमैंटीसाइज़ करते रहना चाहिए!
क्या भोले और सयाने, निश्छल और कुटिल का शाश्वत, सटीक पैमाना क्रमश: गरीबी और अमीरी को मानना चाहिये!
शायद, हाँ।
कम से कम सैंकड़ो हिंदी फिल्में तो यही बताती है।
वरना कोई तो होता जो नज़र उठाकर खोजता कि जरा देखूं तो सही, जग में आज कौन परेशान नहीं है!
सब हैं...कोई नहीं बचा है।
एक बहुत छोटा सा उदाहरण है,
जब तक किसी के जीवन मरण का सवाल ना बन जाये तो आज कितने लोग हॉस्पिटल का मुंह देखना पसंद करेंगे!
जाने कितने ऐसे लोग है जिन्हें शुगर, बीपी जैसी रेगुलर चेकअप मांगती गंभीर बीमारियां हैं लेकिन वो दो महीने से मनमसोस कर, रामभरोसे घर में बैठे हैं।
क्योंकि, बाहर निकलने में, खासकर अस्पताल जाने में कोरोना का खतरा है।
ये क्या एक ही सेक्शन है समाज का!
पता नहीं कितने हैं जिन्होंने लॉकडाउन के दो चार महीने पहले ही अपना स्टार्टअप शुरू किया था और अब उन्हें पता नहीं है कि अपना ब्रेक इवन पॉइंट वो कभी देख भी पाएंगे या नहीं।
मेरे अपने बहुतेरे जानने वाले हैं जिनके बिज़नेस को ठीक ठाक झटका लग भी चुका है।
एक क्लाइंट रूरल टूरिज्म में हाथ आजमा रहे थे, आज दोनों हाथों से सिर पकड़े हैं।
एक मित्र ने कुछ महीने पहले ही अपनी कोचिंग की नई ब्रांच डाली थी। जगह के मालिक को तगड़ा एडवांस दिया था।आज कोचिंग बंद हैं। ऑनलाइन क्लासेज के लिए पेरेंट्स का रिस्पांस चलताऊ है और फीस देने के नाम पर टालमटोल है, जबकि उसे किराया और टीचर को सैलरी देते रहना है।
एक क्लाइंट ने लाखों का लोन लेकर 78 महीने पहले मिठाई शॉप खोली थी। लॉकडाउन ने लाखों का तैयार माल फंसा दिया।
एक मित्र का टैक्सी बिज़नेस लॉकडाउन के बाद से बंद है...दिल्ली में है। गाड़ियों की किश्त अलबत्ता ज़रूर तनाव दे रही है।
एक क्लाइंट ने इसी जनवरी में साड़ियों के भव्य शोरूम का, इलाके का भव्यतम उद्घाटन किया। कल बता रहे थे कि मार्किट में कपड़ों के नाम पर सिर्फ मास्क, गमछा और अंडरगारमेंट्स बिक पा रहे।
एक कॉर्पोरेट जगत के मित्र को उसके सीनियर मैनेजमेंट का स्पष्ट इशारा है, सेकंड सोर्स ऑफ इनकम का इंतज़ाम देख लो। ठीक ठाक सैलरी कट तो हर हाल में पक्का है।
इलाके के कितने लड़के थे जो प्रमाणपत्र और प्रिंटआउट की दुकान या ऐसे उपक्रम से पेट पाल रहे थे, दो महीने से घर पर हैं।
जो घर में बैठे हैं वो भी हाइपरटेंशन, एंजाइटी, पैनिक अटैक का शिकार हो रहे।
कौन है जो आज परेशान नहीं है!
किसने अपनी सेविंग्स नहीं खंगाली।
किसके गले में रोटी पुराना वाला स्वाद दे रही!
आज यहां सबका अपना रणक्षेत्र है, अपना युद्ध है, अपनी अपनी आहुति है।

एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ?

एक राजा थे..!
उनका नाम हर्षवर्धन था
पड़ोसी राज्य ने उनके राज्य पर
आक्रमण कर दिया
राजा हर्षवर्धन युद्ध में हार गए।
हथकड़ियों में जीते हुए पड़ोसी राजा के
सम्मुख पेश किए गए।
पड़ोसी देश का राजा अपनी जीत से प्रसन्न
था और उसने हर्षवर्धन के सम्मुख
एक प्रस्ताव रखा...



यदि तुम एक प्रश्न का जवाब हमें लाकर दे
दोगे तो हम तुम्हारा राज्य लौटा देंगे,
अन्यथा उम्र कैद के लिए तैयार रहें।

भक्तो आप सभी भी ध्यान से सुने...!

प्रश्न है.. एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ?

इसके लिए तुम्हारे पास एक महीने का समय है
हर्षवर्धन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया..

वे जगह जगह जाकर विदुषियों,
विद्वानों और तमाम घरेलू स्त्रियों से लेकर
नृत्यांगनाओं, वेश्याओं, दासियों और
रानियों, साध्वी सब से मिले और
जानना चाहा कि
एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ...?

किसी ने सोना, किसी ने चाँदी,
किसी ने हीरे जवाहरात,
किसी ने प्रेम-प्यार, किसी ने बेटा-पति-पिता
और परिवार तो किसी ने राजपाट
और संन्यास की बातें कीं,
मगर हर्षवर्धन को सन्तोष न हुआ।

महीना बीतने को आया और हर्षवर्धन को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला..

किसी ने सुझाया कि दूर देश में
एक जादूगरनी रहती है,
उसके पास हर चीज का जवाब होता है
शायद उसके पास इस प्रश्न का भी जवाब हो..

हर्षवर्धन अपने मित्र सिद्धराज के साथ
जादूगरनी के पास गए और
अपना प्रश्न दोहराया।

जादूगरनी ने हर्षवर्धन के मित्र की
ओर देखते हुए कहा..
मैं आपको सही उत्तर बताऊंगी
परंतु इसके एवज में आपके
मित्र को मुझसे शादी करनी होगी ।

जादूगरनी बुढ़िया तो थी ही,
बेहद बदसूरत थी,
उसके बदबूदार पोपले मुंह से एक
सड़ा दाँत झलका जब उसने अपनी
कुटिल मुस्कुराहट हर्षवर्धन की ओर फेंकी ।

हर्षवर्धन ने अपने मित्र को परेशानी में
नहीं डालने की खातिर मना कर दिया,
सिद्धराज ने एक बात नहीं सुनी
और अपने मित्र के जीवन की
खातिर जादूगरनी से विवाह को तैयार हो गया

तब जादूगरनी ने उत्तर बताया..

"स्त्रियाँ, स्वयं निर्णय लेने में
आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं | "

यह उत्तर हर्षवर्धन को कुछ जमा,
पड़ोसी राज्य के राजा ने भी इसे
स्वीकार कर लिया और उसने
हर्षवर्धन को उसका राज्य लौटा दिया

इधर जादूगरनी से सिद्धराज का विवाह हो गया, जादूगरनी ने मधुरात्रि को अपने पति से कहा..

चूंकि तुम्हारा हृदय पवित्र है
और अपने मित्र के लिए तुमने
कुरबानी दी है अतः
मैं चौबीस घंटों में बारह घंटे तो
रूपसी के रूप में रहूंगी और
बाकी के बारह घंटे अपने सही रूप में,
बताओ तुम्हें क्या पसंद है ?

सिद्धराज ने कहा.. प्रिये,
यह निर्णय तुम्हें ही करना है,
मैंने तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया है,
‌और तुम्हारा हर रूप मुझे पसंद है ।

जादूगरनी यह सुनते ही रूपसी बन गई,
उसने कहा..
चूंकि तुमने निर्णय मुझ पर छोड़ दिया है तो मैं अब हमेशा इसी रूप में रहूंगी,
दरअसल मेरा असली रूप ही यही है।

बदसूरत बुढ़िया का रूप तो मैंने अपने आसपास से दुनिया के कुटिल लोगों को दूर करने
के लिए धरा हुआ था ।

अर्थात, सामाजिक व्यवस्था ने औरत को
परतंत्र बना दिया है,
पर मानसिक रूप से कोई भी
महिला परतंत्र नहीं है।
ध्यान रखना भक्तों...!
जो लोग पत्नी को घर की
मालकिन बना देते हैं,
वे अक्सर सुखी देखे जाते हैं।
आप उसे मालकिन भले ही न बनाएं,
पर उसकी ज़िन्दगी के
एक हिस्से को मुक्त कर दें।
उसे उस हिस्से से जुड़े निर्णय स्वयं लेने दें।

*भरोसा और आशीर्वाद*
*कभी दिखाई नही देते ....*
*लेकिन*
*असम्भव को सम्भव*
*बना देते है.....!!*
*माली प्रतिदिन पौधों को पानी देता है*
*मगर फल सिर्फ*
*मौसम में ही आते हैं*
*इसीलिए जीवन में धैर्य रखें*
*प्रत्येक चीज अपने समय पर होगी*
*प्रतिदिन बेहतर काम करे*
*आपको उसका फल*
*समय पर जरूर मिलेगा..*✍
*राधे राधे*

LOCKDOWN कोरोना संकट के बीच कल सुबह 9 बजे देश को फिर संबोधित करेंगे PM मोदी

देश में जारी कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की सुबह 9 बजे एक बार राष्ट्र को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि वो देश के नाम वीडियो संदेश जारी करेंगे.
MASK BOY



नई दिल्ली: देश में जारी कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की सुबह 9 बजे एक बार फिर राष्ट्र को संबोधित करेंगे. कोरोना मामले पर पीएम मोदी का देश के नाम यह तीसरा संबोधन होगा. हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो देशवासियों के लिए वीडियो संदेश जारी करेंगे.  गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री कोरोना संकट को लेकर दो बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं. इससे पहले नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च और 19 मार्च को राष्ट्र को संबोधित किया था. 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन का एलान किया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बता दें कि19 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से देश में निर्मित हालात को लेकर देश को संबोधित किया था. उन्होंने देशवासियों से कोरोना के खिलाफ लड़ने का संकल्प लेने का आग्रह किया था. उन्होंने कहा था कि बीते कुछ दिनों से ऐसा भी लग रहा है जैसे हम संकट से बचे हुए हैं, सब कुछ ठीक है. लेकिन अभी तक विज्ञान, कोरोना महामारी से बचने के लिए, कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है. इसका सामना करने के लिए देश वासियों को सजग रहने और संयम बरतने की जरूरत है.साथ ही उन्होंने देश के लोगों से 22 मार्च को एक दिनों के लिए जनता कर्फ्यू करने की अपील भी की थी.वहीं 24 मार्च के संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लागू करने की बात कही थी.

बता दें कि भारत में कोरोना संकट गहराता जा रहा है देश में कोविड-19 के मामले बढ़कर गुरुवार को 1,965 हो गए और वहीं इससे अब तक 50 लोगों की जान जा चुकी है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना वायरस से अभी 1,764 लोग संक्रमित हैं. जबकि 150 लोग वे हैं, जिन्हें या तो इलाज के बाद छुट्टी मिल चुकी है या दूसरे देश जा चुके हैं. पिछले 24 घंटे में 328 नए मामले (कल के दोपहर के आंकड़े के आधार पर) सामने आए हैं. वहीं, पिछले 24 घंटे में 12 लोगों की मौत हुई है. मंत्रालय द्वारा गुरुवार सुबह जारी किए आकंड़ों के अनुसार देश में कोरोना वायरस के नौ नए मामले सामने आए, जिनमें से चार महाराष्ट्र, तीन मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश तथा पंजाब से एक-एक मामला आया. देश में वायरस से अधिक महाराष्ट्र में 13 लोगों की जान गई. इसके बाद गुजरात में 6, मध्य प्रदेश में 6, पंजाब में 4, कर्नाटक में 3 , तेलंगाना में 3, पश्चिम बंगाल में 3, दिल्ली में 2, जम्मू-कश्मीर में 2, उत्तर प्रदेश में 2 और केरल में 2 मौतें हुई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से एक-एक मौत की खबर है.

सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय |

सुभाष चन्द्र बोस का जन्म कब हुआ था और कहाँ हुआ था?
23 जनवरी 1897 को कटक (ओडिशा) शहर में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ। उनके पिता श्री जानकीनाथ बोस और माँ श्रीमती प्रभावती थे।

सुभाष जी के पिता जी शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी वकील थे फिर उन्होंने निजी अभ्यास शुरू कर दी थी।




उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक का काम किया और वे बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे थे। उन्हें रायबहादुर का खिताब भी अंग्रेजन द्वारा मिला।

सुभाष चन्द्र के नानाजी का नाम गंगा नारायण दत्त था। दत्त परिवार को कोलकाता का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। सुभाष चन्द्र बोस को मिला कर वे 6 बेटियां और 8 बेटे यानी कुल 14 संतानें थी। सुभाष चन्द्र जी 9 स्थान पर थे।

कहा जाता है कि सुभाष चन्द्र जी को अपने भाई शरद चन्द्र से सबसे अधिक लगाव था। शरद बाबु प्रभावती जी और जानकी नाथ के दूसरे बेटे थे। शरद बाबु की पत्नी का नाम विभावती था।

Information About Subhash Chandra Bose in Hindi – Education



सुभाष चन्द्र बोस की शिक्षा और आई.सी.एस. का सफर: प्राइमरी शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल से पूरी की और 1909 में उन्होंने रावेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला लिया। उन पर उनके प्रिंसिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का बहुत प्रभाव पड़ा। वह विवेकानंद जी के साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था।

सन् 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने पर भी दूसरी श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में बी० ए० (ऑनर्स) के छात्र थे। प्रेसिडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया।

सुभाष ने छात्रों का साथ दिया जिसकी वजह से उन्हें एक साल के लिए निकाल दिया और परीक्षा नहीं देने दी। उन्होंने बंगाली रेजिमेंट में भर्ती के लिए परीक्षा दी मगर आँखों के खराब होने की वजह से उन्हें मना कर दिया गया।



स्कॉटिश चर्च में कॉलेज में उन्होंने प्रवेश किया लेकिन मन नहीं माना क्योंकि मन केवल सेना में ही जाने का था।

जब उन्हें लगा की उनके पास कुछ समय शेष बचता है तो उन्होंने टेटोरियल नामक आर्मी में परीक्षा दी और उन्हें विलियम सेनालय में प्रवेश मिला| और फिर बी०ए० (आनर्स) में खूब मेहनत की और सन् 1919 में एक बी०ए० (आनर्स) की परीक्षा प्रथम आकर पास की| और साथ में कलकत्ता विश्वविद्यालय में उनका स्थान दूसरा था।

उनकी अब उम्र इतनी हो चुकी थी की वे केवल एक ही बार प्रयास करने पर ही आईसीएस बना जा सकता था.

उनके पिता जी की ख्वाहिश थी की वह आईसीएस बने और फिर क्या था सुभाष चन्द्र जी ने पिता से एक दिन का समय लिया। केवल ये सोचने के लिए की आईसीएस की परीक्षा देंगे या नही। इस चक्कर में वे पूरी रात सोये भी नहीं थे। अगले दिन उन्होंने सोच लिया की वे परीक्षा देंगे।

वे 15 सितम्बर 1919 को इंग्लॅण्ड चले गए। किसी वजह से उन्हें किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला फिर क्या था उन्होंने अलग रास्ता निकाला।



सुभाष जी ने किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक ज्ञान की ट्राईपास (ऑनर्स) की परीक्षा के लिए दाखिला लिया इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी| और फिर ट्राईपास (ऑनर्स) की आड़ में आईसीएस की तैयारी की और 1920 में उन्होंने वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण की।

स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविन्द घोष के आदर्शों और ज्ञान ने उन्हें अपने भाई शरत चन्द्र से बात करने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने एक पत्र अपने बड़े भाई शरत चन्द्र को लिखा जिसमें उन्होंने पूछा की मैं आईसीएस बन कर अंग्रेजों की सेवा नहीं कर सकता।


फिर उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई०एस० मांटेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र दिया। एक पत्र देशबंधु चित्तरंजन दस को लिखा।

उनके इस निर्णय में उनकी माता ने उनका साथ दिया उनकी माता को उन पर गर्व था| फिर सन् 1921 में ट्राईपास (ऑनर्स) की डिग्री ले कर अपने देश वापस लौटे।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस की भूमिका
भारत की आजादी में सुभाष चन्द्र जी का योगदान



सुभाष चन्द्र बोस ने ठान ली थी की वे भारत की आजादी के लिए कार्य करेंगे। वे कोलकाता के देशबंधु चित्तरंजन दास से प्रेरित हुए और उनके साथ काम करने के लीये इंग्लैंड से उन्होंने दिबबू को पत्र लिखा और साथ में काम करने के लिए अपनी इच्छा जताई।

कहा जाता है कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की सलाह के अनुसार ही सुभाष जी मुंबई गए और महात्मा गांधी जी से मिले।

सुभाष जी, महात्मा गांधी जी से 20 जुलाई 1921 को मिले और गांधी जी के कहने पर सुभाष जी कोलकाता जाकर दास बाबू से मिले।


असहयोग आन्दोलन का समय चल रहा था। दासबाबु और सुभाष जी इस आन्दोलन को बंगाल में देख रहे थे। दासबाबु ने सन् 1922 कांग्रेस के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की।

अंग्रेज सरकार का विरोध करने के लिए कोलकाता महापालिका का चुनाव स्वराज पार्टी ने विधानसभा के अन्दर से लड़ा और जीता।

फिर क्या था…

दासबाबू कोलकाता के महापौर बन गए और इस अधिकार से उन्होंने सुभाष चन्द्र को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बना दिया।

सुभाष चन्द्र ने सबसे पहले कोलकाता के सभी रास्तों के नाम ही बदल डाले और भारतीय नाम दे दिए| उन्होंने कोलकाता का रंगरूप ही बदल डाला।

सुभाष देश के महत्वपूर्ण युवा नेता बन चुके थे। स्वतंत्र भारत के लिए जिन लोगों ने जान दी थी उनके परिवार के लोगों को महापालिका में नौकरी मिलने लगी।



सुभाष जी की पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के साथ अच्छी बनती थी। उसी कारण सुभाष जी ने जवाहर लाल जी के साथ कांग्रेस के अंतर्गत युवकों की इंडिपेंडेंस लीग शुरू की।

सन् 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया था तब कांग्रेस के लोगों ने उसे काले झंडे दिखाए और कांग्रेस ने आठ लोगों की सदस्यता आयोग बनाया ताकि साइमन कमीशन को उसका जवाब दे सके, सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया.

उस आयोग में मोतीलाल नेहरु अध्यक्ष और सुभाष जी सदस्य थे।

आयोग ने नेहरु रिपोर्ट पेश की और और कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कोलकाता में हुआ| ये बात सन् 1928 में हुआ था, सुभाष चन्द्र जी ने खाकी कपडे पहन के मोतीलाल जी को सलामी दी थी।

इस अधिवेशन में गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से पूर्ण स्वराज की जगह डोमिनियन स्टेट्स मांगे।


सुभाष और जवाहर लाल जी तो पूर्ण स्वराज की मांग कर रहे थे| लेकिन गाँधी जी उनकी बात से सहमत नहीं थे.

आखिर में फैसला ये हुआ की गांधी जी ने अंग्रेज सरकार को 2 साल का वक्त दिया जिसमे डोमिनियन स्टेट्स वापस दे दिया जाए, मगर सुभाष और जवाहर लाल जी को गांधी जी का ये निर्णय अच्छा नहीं लगा और गांधी जी से 2 साल की वजह अंग्रेजी सरकार को 1 साल का वक्त देने को कहा।

निर्णय ये हुआ की अगर 1 साल में अंग्रेज सरकार ने डोमिनियन स्टेट्स नहीं दिए तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की मांग करेगी| लेकिन अंग्रेज सरकार के कानों के नीचे जूं भी नहीं रेंगा।


अंत में आकर सन् 1930 में जब कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन जवाहर लाल नेहरु की अध्यक्षता में लाहौर में हुआ तब ऐसा तय किया गया कि 26 जनवरी का दिन स्वतंत्रता का दिन मनाया जाएगा.

कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष बड़ी मात्रा में लोगों के साथ मोर्चा निकल रहे थे। 26 जनवरी 1931 की बात है ये उनके इस कारनामे से पुलिस ने उन पर लाठियां चलाई और उन्हें घायल कर जेल में भेज दिया.

गांधी जी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सभी कैदियों को जेल से सुभाष चन्द्र सहित छुड़ा लिया और अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे बहादुर क्रांतिकारी को आजाद करने से मना कर दिया।

गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेज सरकार से बात की मगर नरमी के साथ सुभाष जी कभी नहीं चाहते थे की ऐसा हो उनका कहना था की गाँधी जी इस समझौते को तोड़ दे| मगर कहा जाता है की गाँधी जी अपने दिए हुए वचन को कभी नहीं तोड़ते थे।

अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह व उनके साथ काम करने वालों को फांसी दे दी और सुभाष चन्द्र जी के दिलों दिमाग में आग लगा दी उन्हें गांधी जी
और कांग्रेस के तरीके बिलकुल पसंद नहीं आये।

Netaji Subhash Chandra Bose Wikipedia in Hindi
कितनी बार कारावास जाना पड़ा सुभाष चन्द्र बोस को?


पूरे जीवन में सुभाष चन्द्र जी को करीब 11 बार कारावास हुआ| 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ।

गोपीनाथ साहा नाम के एक क्रांतिकारी ने सन् 1925 मे कोलकाता की पुलिस में अधिकारी चार्ल्स टेगार्ट को मारना चाहा मगर गलती से अर्नेस्ट डे नाम के व्यापारी को मार दिया| जिस वजह से गोपीनाथ को फांसी दे दी गयी।

इस खबर से सुभाष चन्द्र जी फूट फूट कर रोये और गोपीनाथ का मृत शरीर मांगकर अंतिम संस्कार किया।


सुभाष चन्द्र जी के इस कार्य से अंग्रेजी सरकार ने सोचा की सुभाष चन्द्र कहीं क्रांतिकारियों से मिला हुआ तो नहीं है या फिर क्रांतिकारियों को हमारे लिए भड़काता है।

किसी बहाने अंग्रेज सरकार ने सुभाष को गिरफ्तार किया और बिना किसी सबूत के बिना किसी मुकदमे के सुभाष चन्द्र को म्यांमार के मंडल कारागार में बंदी बनाकर डाल दिया।

चित्तरंजन दास 05 नवम्बर 1925 को कोलकाता में चल बसे| ये खबर रेडियो में सुभाष जी ने सुन ली थी।

कुछ दिन में सुभाष जी की तबियत ख़राब होने लगी थी उन्हें तपेदिक हो गया था| लेकिन अंग्रेजी सरकार ने उन्हें रिहा फिर भी नही किया था.

सरकार की शर्त थी की उन्हें रिहा जभी किया जायेगा जब वे इलाज के लिए यूरोप चले जाए, मगर सुभाष चन्द्र जी ने ये शर्त भी ठुकरा दी क्योंकि सरकार ने ये नहीं बात साफ़ नहीं की थी की सुभाष चन्द्र जी कब भारत वापस आ सकेंगे।

अब अंग्रेजी सरकार दुविधा में पड़ गई थी क्योंकि सरकार ये भी नहीं चाहती थी की सुभाष चन्द्र जी कारावास में ही खत्म हो जाए। इसलिए सरकार के रिहा करने पर सुभाष जी ने अपना इलाज डलहौजी में करवाया।

सन् 1930 में सुभाष कारावास में ही थे और चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुन लिया गया था| जिस कारण उन्हें रिहा कर दिया गया।

सन् 1932 में सुभाष जी को फिर कारावास हुआ और उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया, अल्मोड़ा जेल में उनकी तबियत फिर ख़राब हो गयी, चिकित्सकों की सालाह पर वे यूरोप चले गए।

Netaji Subhash Chandra Bose Biography in Hindi Language
यूरोप में रह कर देश भक्ति: सन् 1933-1936 सुभाष जी यूरोप में ही रहे| वहां वे इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सहायता करने का वादा किया।

आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे मित्र बन गए| उन दिनों जवाहर लाल जी की पत्नी कमला नेहरु का आस्ट्रिया में निधन हो गया, सुभाष जी ने जवाहर जी को वहां जा कर हिम्मत दी। बाद में विट्ठल भाई पटेल से भी मिले।

विठ्ठल भाई पटेल के साथ सुभाष ने मत्रना की जिसे पटेल व बोस की विश्लेषण के नाम से प्रसिद्धि मिली। उस वार्तालाप में उन दोनों ने गांधी जी की घोर निंदा की, यहाँ तक की विठ्ठल भाई पटेल के बीमार होने पर सुभाष जी ने उनकी सेवा भी की मगर विठ्ठल भाई पटेल जी का निधन हो गया।

विठ्ठल भाई पटेल ने अपनी सारी संपत्ति सुभाष जी के नाम कर दी और सरदार भाई पटेल जो विठ्ठल भाई पटेल छोटे भाई थे उन्होंने इस वसीयत को मना कर दिया और मुकदमा कर दिया।

मुकदमा सरदार भाई पटेल जीत गये और सारी संपत्ति गांधी जी के हरिजन समाज को सौंप दी।

सन् 1934 में सुभाष जी के पिता जी की मृत्यु हो गयी। जब उनके पिता जी मृत्युशय्या पर थे तब वे कराची से हवाई जहाज से कोलकाता लौट आये। मगर देर हो चुकी थी.

कोलकाता आये ही थे की उन्हें अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और करावास में डाल दिया और बाद में यूरोप वापस भेज दिया।

History of Subhash Chandra Bose in Hindi
History of Subhash Chandra Bose in Hindi



क्या आपको पता है कि प्रेम विवाह हुआ था सुभाष चंद्र जी का?

आस्ट्रिया में जब वे अपना इलाज करवा रहे थे तब उन्हें अपनी पुस्तक लिखने के लिए अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की जरूरत पड़ी।

उनकी मुलाकात अपने मित्र द्वारा एक महिला से हुई जिनका नाम एमिली शेंकल था। एमिली के पिता जी पशुओं के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। ये बात सन् 1934 की थी।

एमिली और सुभाष जी एक दूसरे की और आकर्षित हुए और प्रेम करने लगे। उन्होंने हिन्दू रीति रिवाज से सन् 1942 में विवाह कर लिया और उनकी एक पुत्री हुई।

सुभाष जी ने जब वो बच्ची चार सप्ताह की थी बस तभी देखा था और फिर अगस्त सन् 1945 में ताद्वान में उनकी विमान दुर्घटना हो गयी और उनकी मृत्यु हो गयी जब उनकी पुत्री अनीता पौने तीन साल की थी।

अनीता अभी जीवित है और अपने पिता के परिवार जानो से मिलने के लिए भारत आती रहती हैं।

हरीपूरा कांग्रेस का अध्यक्ष पद – Subhash Chandra Bose Essay in Hindi
सन् 1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरिपुरा में हुआ| कांग्रेस के 51वां अधिवेशन था इसलिए उनका स्वागत 51 बैलों द्वारा खींचे गए रथ से किया गया| इस अधिवेशन में उनका भाषण बहुत ही प्रभाव शाली था.

सन् 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया| सुभाष जी ने चीनी जनता की सहायता के लिए डा० द्वारकानाथ कोटिनस के साथ चिकित्सा दल भेजने के लिए निर्णय लिया.

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जापान से सहयोग लिया| कई लोगों का कहना था की सुभाष जी जापान की कठपुतली और फासिस्ट कहते थे| मगर ये सब बातें गलती थी.

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi
गांधी जी की जिद की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा

सन् 1938 में गाँधी जी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाष को चुना था लेकिन सुभाष जी की कार्य पद्धति उन्हें पसंद नहीं आयी और द्वितीय विश्वयुद्ध के बादल छा गए थे.

सुभाष जी ने सोचा की क्यों न इंग्लॅण्ड की इस कठिनाई का फायदा उठा कर भारत का स्वतंत्रता संग्राम में तेजी लाइ जाए| परन्तु गाँधी जी इस से सहमत नहीं हुए.

सन् 1939 में जब दुबारा अध्यक्ष चुनने का वक्त आया तब सुभाष जी चाहते थे की कोई ऐसा इंसान अध्यक्ष पद पर बैठे जो किसी बात पर दबाव न बर्दाश्त करें और मानवजाति का कल्याण करें.

जब ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया तो उन्होंने दुबारा अध्यक्ष बनने का प्रताव रखा तो गाँधी जी ने मना कर दिया.

दुबारा अध्यक्ष पद के लिए पट्टाभी सीतारामैय्या को चुना, मगर कवी रविन्द्रनाथ ठाकुर ने गाँधी जी को खत लिखा और कहा की अध्यक्ष पद के लिए सुभाष जी ही सही है.

प्रफुल्लचंद्र राय और मेघ्नाद्र जैसे महान वैज्ञानिक भी सुभाष की फिर अध्यक्ष के रूप मे देखना चाहते थे मगर गाँधी जी ने किसी की भी बात नहीं सुनी और कोई समझौता नहीं किया.

जब महात्मा गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या का साथ दिया और उधर सुभाष जी ने भी चुनाव में अपना नाम दे दिया|

चुनाव में सुभाष जी को 1580 मत और पट्टाभी सीतारामैय्या को 1377 मत प्राप्त हुए और सुभाष जी जीत गए| मगर गाँधी जी ने पट्टाभी सीतारामैय्या हार को अपनी हार बताया और अपने कांग्रेस के साथियों से कहा की अगर वे सुभाष जी के तौर तरीके से सहमत नहीं है तो वो कांग्रेस से हट सकते है.

इसके बाद कांग्रेस में 14 में से 12 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया| जवाहर लाल नेहरु तटस्थ बने और शरदबाबु सुभाष जी के साथ रहे.

सन् 1939 का वार्षिक अधिवेशन त्रिपुरी में हुआ| इस अधिवेशन के समय सुभाष जी को तेज बुखार हो गया और वो इतने बीमार थे की उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर अधिवेशन में लाया गया.

गाँधी जी और उनके साथी इस अधिवेशन में नहीं आये और इस अधिवेशन के बाद सुभाष जी ने समझौते के लिए बहुत कोशिश की मगर गाँधी जी ने उनकी एक न सुनी.

स्थिति ऐसी थी की वे कुछ नहीं कर सकते थे| आखिर में तंग आकर 29 अप्रैल 1939 को सुभाष जी ने इस्तीफा दे दिया.

नजराबंदी से पलायन : सुभाष चंद्र बोस की जीवनी
16 जनवरी 1941 को वे पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद जियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकले.

शरद बाबू के बड़े बेटे शिशिर ने उन्हें अपनी गाडी में कोलकाता से दूर गोमोह तक पहुँचाया| गोमोह रेलवे स्टेशन से फ्रंटियर मेल पकड़कर वे पेशावर पञ्च गए.

उन्हें पेशावर में फोरवर्ड ब्लॉक के एक सहकारी, मियां अकबर शाह मिले| मियां अकबर शाह ने उनकी मुलाकात, कीर्ति किसान पार्टी के भगतराम तलवार से करा दी.

भगतराम के साथ सुभाष जी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की और निकल गए| इस सफ़र में भगतराम तलवार रहमत खान नाम के पठान और सुभाष उनके गूंगे-बहरे चाचा जी बन गए| पहाड़ियों में पैदल चल कर सफ़र पूरा किया.

सुभाष जी काबुल में उत्तमचंद मल्होत्रा एक भारतीय व्यापारी के घर दो महिने रहे| वहां उन्होंने पहले रुसी दूतावास में प्रवेश पाना चाहा| इसमें सफलता नहीं मिली तब उन्होने जर्मन और इटालियन दूतावासों में प्रवेश पाने की कोशिश की| इटालियन दूतावास में उनकी कोशिश सफल रही.

जर्मन और इतालियन के दुतावसों ने उनकी मदद की| अंत में आरलैंड मैजोन्टा नामक इटालियन व्यक्ति के साथ सुभाष काबुल से निकल कर रूस की राजधानी मास्को होते हुए जर्मनी राजधानी बर्लिन पहुचे.

हिटलर से मुलाकात – Story About Netaji Subhash Chandra Bose and Hitler
सुभाष बर्लिन में कई नेताओं के साथ मिले उन्होंने जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता संघठन और आजाद हिन्द रेडियो की स्थापना की|

इसी दौरान सुभाष नेताजी के नाम से भी मशहूर हो गए| जर्मन के एक मंत्री एडम फॉन सुभाष जी के अच्छे मित्र बन गए.

29 मई 1942 के दिन, सुभाष जर्मनी के सर्वोच्च नेता एडोल्फ हिटलर से मिले| लेकिन हिटलर को भारत के विषय में विशेष रूचि नहीं थी| उन्होने सुभाष की मदद को कोई पक्का वादा नहीं किया.

हिटलर ने कई साल पहले माईन काम्फ़ नामक आत्मचित्र लिखा था.

इस किताब मैं उन्होंने भारत और भारतीय लोगों की बुराई की थी| इस विषय पर सुभाष ने हिटलर से अपनी नाराजगी दिखाई, हिटलर ने फिर माफ़ी मांगी और माईन काम्फ़ के अगले संस्करण में वह परिच्छेद निकालने का वादा किया.

अंत में सुभाष को पता लगा की हिटलर और जर्मनी से किये वादे झुटे निकले इसलिए 8 मार्च 1943 को जर्मनी के कील बंदरगाह में वे अपने साथी आबिद हसन सफरानी के साथ एक जर्मन पनडुब्बी में बैठकर पर्वी एशिया की और निकल दिए.

वह जर्मनी पनडुब्बी उन्हें हिन्द महासागर में मैडागास्कर के किनारे तक लेकर गयी| फिर वहां दोनों ने समुद्र में तैरकर जापानी पनडुब्बी तक पहुचे.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान किन्ही भी दो देशों की नौसेनाओं की पनडुब्बियों के द्वारा नागरिकों की यह एक मात्र अदला-बदली हुई थी, वो जापनी पनडुब्बी उन्हें इंडोनेशिया के पादांग बंदरगाह तक पहुचाकर आई.

सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु कैसे हुई?
सुभाष चन्द्र जी की मृत्यु का कारण क्या था

जापान द्वितीय विश्वयुद्ध में हार गया, सुभाष जी को नया रास्ता निकलना जरुरी था। उन्होंने रूस से मदद मांगने की सोच रखी और 18 अगस्त 1945 को नेताजी हवाई जहाज से मचुरिया की तरफ जा रहे थे| इस सफ़र के दौरान वे लापता हो गए| इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए.

23 अगस्त 1945 को रेडियो ने बताया कि सैगोन में नेताजी एक बड़े बमवर्षक वीमान से आ रहे थे की 18 अगस्त को जापान के ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटीत हो गए.

विमान में उनके साथ सवार जापानी जनरल शोदाई पाईलेट और कुछ अन्य लोग मारे गए| नेताजी गंभीर रूप से जल गए थे.

वहां जापान में अस्पताल में ले जाया गया और जहाँ उन्हें मृत घोषीत कर दिया गया और उनका अंतिम संस्कार भी वही कर दिया गया.

सितम्बर में उनकी अस्थियों को इकठ्ठा करके जापान की राजधानी टोकियो के रैकाजी मंदिर में रख दी गयी| भारतीय लेखागार ने सुभाष जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में रात्रि 09:00 बजे हुई थी.

आजदी के बाद भारत सरकार ने इस घटना की जांच करने के लिए सन् 1956 और 1977 में दो बार जांच आयोग नियुक्त किया गया पर दोनों बार ये साबित हुआ की दुर्घटना में ही सुभाष जी की मृत्यु हुई थी.

सन् 1999 में मनोज कुमार मुखर्जी के नेतृत्व में तीसरा आयोग बनाया गया| 2005 में ताइवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बता दिया की ताइवान की भूमि पर उस दिन कोई जहाज दुर्घटना हुई ही नहीं थी| मुखर्जी आयोग रिपोर्ट पेश की जिसमे सुभाष जी की मृत्यु का कोई साबुत पाया नहीं गया.

लेकिन भारत के सरकार ने मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया.

आज तक ये रहस्य ही बना हुआ है की आखिर सुभाष जी की मृत्यु कैसे हुई थी (Subhash Chandra Bose Death) और अभी 2018 से करीब एक दो साल पहले न्यूज रिपोर्ट द्वारा ये बात सामने आई थी की सुभाष जी कुछ साल बाद भी जिन्दा थे और वेश बदल कर जी रहे थे.

फैजाबाद के गुमनामी बाबा से लेकर छतिसगढ राज्य में जिला रायगढ तक में नेताजी के होने को लेकर कई दावे किये गए लेकिन कोई साबुत सामने नहीं आया.

Subhash Chandra Bose Poem in Hindi
सुभाष चंद्र बोस पर कविता

है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं
अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं

यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है
जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जयहिन्द निशानी है
प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था
पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था

यह वीर चक्रवर्ती होगा , या त्यागी होगा सन्यासी
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग-युग तक भारतवासी
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था

बाँधे जाते इंसान,कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं
काया ज़रूर बाँधी जाती,बाँधे न इरादे जाते हैं
वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था,जो मौका पाकर निकल गया
वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया

जिस तरह धूर्त दुर्योधन से,बचकर यदुनन्दन आए थे
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के,पहरेदार छकाए थे
बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा , तोते-सा बेदाग़ गया।
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया

वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है
हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है

साभार - कविताकोश
Netaji Subhash Chandra Bose Motivational Thoughts in Hindi
प्रिय देशवासियों सुभाष चन्द्र बोस के बारे में पूरी दुनिया अच्छे से जानते है और उनके द्वारा बोली गयी कुछ लाइंस नीचे लिखी गयी है। आपको सुभाष चन्द्र बोस की जानकारी भी इस लेख में मिल जाएगी।

स्वतंत्रता की लड़ाई में सुभाष चन्द्र जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है और उनकी सोच जिसने उन्हे सबसे अलग बनाया है। भारत की आजादी में सुभाष चंद्र बोस ने अपने साईंकोन को बहुत प्रेरित किया और उनके दिशा निर्देश पर लोगों ने अपने कदम रखे।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi: ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा !’ यह कहना था भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी “नेताजी सुभाष चन्द्र बोस” का।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की और देश में राज्य कर रहे अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, जिसने भारत को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा दिया गया “जय हिन्द जय भारत का नारा” भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं।

Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi
“एक सच्चे सैनिक को सैन्य प्रशिक्षण और आध्यात्मिक प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है।”

“राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों ; सत्यम् , शिवम्, सुन्दरम् से प्रेरित है।”

“मेरे पास एक लक्ष्य है जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना हैं। मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ! मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है।”

“अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है।”

“अपने पूरे जीवन में मैंने कभी खुशामद नहीं की है। दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनमोल वचन
“जीवन की अनिश्चितता से मैं जरा भी नहीं घबराता।”

“आज हमारे पास एक इच्छा होनी चाहिए ‘मरने की इच्छा’, क्योंकि मेरा देश जी सके – एक शहीद की मौत का सामना करने की शक्ति, क्योंकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीद के खून से प्रशस्त हो सके।”

“जब आज़ाद हिंद फौज खड़ी होती हैं तो वो ग्रेनाइट की दीवार की तरह होती हैं ; जब आज़ाद हिंद फौज मार्च करती है तो स्टीमर की तरह होती हैं।”

“भविष्य अब भी मेरे हाथ में है।”

“राजनीतिक सौदेबाजी का एक रहस्य यह भी है जो आप वास्तव में हैं उससे अधिक मजबूत दिखते हैं।”

Netaji Subhash Chandra Bose Speech in Hindi
“अजेय (कभी न मरने वाले) हैं वो सैनिक जो हमेशा अपने राष्ट्र के प्रति वफादार रहते हैं, जो हमेशा अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं।” – सुभाष चंद्र बोस के विचार

“मैंने अपने अनुभवों से सीखा है ; जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती।” – सुभाष चंद्र बोस के नारे

“इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।” – Subhash Chandra Bose Slogan in Hindi

“एक व्यक्ति एक विचार के लिए मर सकता है, लेकिन वह विचार उसकी मृत्यु के बाद, एक हजार जीवन में खुद को अवतार लेगा।”

“यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का भुगतान अपने रक्त से करें। आपके बलिदान और परिश्रम के माध्यम से हम जो स्वतंत्रता जीतेंगे, हम अपनी शक्ति के साथ संरक्षित करने में सक्षम होंगे।”

Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi in 500 Words
“अच्छे चरित्र निर्माण करना ही छात्रों का मुख्य कर्तव्य होना चाहियें।”

“मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है।”

“माँ का प्यार स्वार्थ रहित और होता सबसे गहरा होता है ! इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।”

“हमारा कार्य केवल कर्म करना हैं ! कर्म ही हमारा कर्तव्य है ! फल देने वाला स्वामी ऊपर वाला है।”

“संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले मुझमे नहीं था।”

“जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।”

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